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तेज हुई ठंड, कंबल खरीदे ही नहीं जा सके
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तेज हुई ठंड, कंबल खरीदे ही नहीं जा सके
गोरखपुर। ठंड तेज हो गई और अभी तक कंबल खरीद की प्रक्रिया ही नहीं पूरी हो सकी। जैम पोर्टल पर पहली बार एक ही फर्म के आवेदन करने से टेंडर निरस्त हो गया जबकि दूसरी बार टेंडर फाइनल होने के पहले ही शासन ने प्रक्रिया ही बदल दी। अब नए सिरे से ओपन टेंडर निकाला गया है। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, 17 दिसंबर तक प्रक्रिया पूरी हो जाने की उम्मीद है जिसके बाद कंबल वितरण शुरू हो जाएगा।
एक माह पहले मिला था फंड
बेसहारा गरीबों को ठंड से बचाने के लिए 35 लाख रुपये का फंड मिले करीब एक महीने हो गए। सभी तहसीलों के लिए पांच लाख रुपये आवंटित हुए हैं। वहीं अलाव के लिए 50-50 हजार रुपये प्रत्येक तहसील को दिए गए हैं।
सभी तहसीलों को 200 कंबल दिए गए
कंबल की खरीद पूरे होने तक प्रशासन ने अपने स्तर पर 1500 कंबलों का इंतजाम किया है। सभी तहसीलों के एसडीएम को 200 कंबल, गरीबों को वितरित करने के लिए दिए गए हैं। डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने कहा कि कंबल या संसाधनों की कोई कमी नहीं है। अफसर यह ध्यान दें कि ठंड के मौसम में कोई भी बेसहारा गरीब खुले आसमान के नीचे रात न गुजारे। ऐसे लोगाें को तहसीलों के अफसर-कर्मचारी व पुलिस नजदीक के रैन बसेरों में पहुंचाएं। अगर किसी रैन बसेरे में जगह नहीं है तो उन्हें विवाह घरों में इंतजाम किया जाए। सभी प्रमुख चौराहों, रेलवे-बस स्टेशनों, जिला अस्पताल के पास नियमित अलाव जलाए जाएं।
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गोरखपुर। ठंड तेज हो गई और अभी तक कंबल खरीद की प्रक्रिया ही नहीं पूरी हो सकी। जैम पोर्टल पर पहली बार एक ही फर्म के आवेदन करने से टेंडर निरस्त हो गया जबकि दूसरी बार टेंडर फाइनल होने के पहले ही शासन ने प्रक्रिया ही बदल दी। अब नए सिरे से ओपन टेंडर निकाला गया है। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, 17 दिसंबर तक प्रक्रिया पूरी हो जाने की उम्मीद है जिसके बाद कंबल वितरण शुरू हो जाएगा।
एक माह पहले मिला था फंड
बेसहारा गरीबों को ठंड से बचाने के लिए 35 लाख रुपये का फंड मिले करीब एक महीने हो गए। सभी तहसीलों के लिए पांच लाख रुपये आवंटित हुए हैं। वहीं अलाव के लिए 50-50 हजार रुपये प्रत्येक तहसील को दिए गए हैं।
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सभी तहसीलों को 200 कंबल दिए गए
कंबल की खरीद पूरे होने तक प्रशासन ने अपने स्तर पर 1500 कंबलों का इंतजाम किया है। सभी तहसीलों के एसडीएम को 200 कंबल, गरीबों को वितरित करने के लिए दिए गए हैं। डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने कहा कि कंबल या संसाधनों की कोई कमी नहीं है। अफसर यह ध्यान दें कि ठंड के मौसम में कोई भी बेसहारा गरीब खुले आसमान के नीचे रात न गुजारे। ऐसे लोगाें को तहसीलों के अफसर-कर्मचारी व पुलिस नजदीक के रैन बसेरों में पहुंचाएं। अगर किसी रैन बसेरे में जगह नहीं है तो उन्हें विवाह घरों में इंतजाम किया जाए। सभी प्रमुख चौराहों, रेलवे-बस स्टेशनों, जिला अस्पताल के पास नियमित अलाव जलाए जाएं।
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