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गुरु पूर्णिमा, गुरु परंपरा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का पर्व है : मुख्यमंत्री योगी
Tue, 16 Jul 2019 05:08 PM IST
राजेश सैनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
Published by: राजेश सैनी
Updated Tue, 16 Jul 2019 05:08 PM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
गोरखुपुर के गोरखनाथ मंदिर में आयोजित गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम में गोरक्षपीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरु पूर्णिमा पर्व व वेदव्यास जयंती की बधाई दी। उन्होंने इस मौके पर कहा आज भारत की प्राचीन परंपरा, गुरु परंपरा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का पर्व है। गुरु, समाज का मार्ग दर्शन करते हुए समाज को नई दिशा देता है। गुरु शिष्य की परंपरा को समय-समय पर अनेक ऋषि मुनियों ने अपने उदार चरित्र से नई ऊंचाइयां दी हैं।
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हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि महायोगी श्री गोरक्षनाथ की धरती पर हमें गुरु शिष्य की इस महान परंपरा को निभाने का अवसर मिला है। भारत की महान गुरु शिष्य परंपरा के दीप गुरु नानक एवं गुरु गोविंद सिंह महाराज के जीवन का चरित्र चित्रण करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिस समय देश, विदेशी आक्रांताओं से जूझ रहा था उस समय भारत के महापुरुषों ने अपने प्रेरणादायी कर्तव्यों के माध्यम से भारत के महान गौरव की रक्षा की।
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अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ जी को याद करते हुए योगी जी ने कहा कि चार वर्ष पूर्व तक हम सभी को गुरु महाराज का आशीर्वाद प्राप्त होता था। आज वो हमारे बीच नहीं हैं मगर उनका आर्शीवाद सदैव हम सभी के साथ है। योगी जी ने कहा कि गुरुदेव द्वारा प्रशस्त किए गए मार्ग जैसे गौ सेवा, शिक्षण संस्थान, चिकित्सा एवं वनवासी सेवा कार्यक्रमों के माध्यम से गोरक्षनाथपीठ लोक कल्याण के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ रही है।
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योगी जी ने कहा कि दुःख का सबसे बड़ा कारण मैं और मेरा है। जब व्यक्ति नकारात्मक होकर सिर्फ अपने और अपने परिवार के बारे में सोचता है तो समाज पतन की ओर बढ़ता है और यदि सकारात्मक होकर सबके भले के लिए सोचता है तो उसे सफलता प्राप्त होती है और समाज का भी भला होता है। उन्होंने कहा कि कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता। सभी को अपने-अपने क्षेत्रों में कार्य करते हुए एक आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए जिससे समाज को एक नई ऊर्जा प्राप्त हो। ईश्वर किसी के साथ अन्याय नहीं करता, हम ईश्वर की कृपा को किस रूप में लेते हैं यह हम पर निर्भर करता है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धर्म सिर्फ उपासना या पूजा पद्धति नहीं है बल्कि धर्म एक माध्यम हैं जो हमें लोक कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। योग परंपरा की व्याख्या करते हुए योगी जी ने कहा कि योग, भारत की ऋषि परंपरा का प्रसाद है, जिसको वैश्विक पटल पर पीएम नरेंद्र मोदी ने पहचान दिलाई। आज पूरा विश्व, 21 जून को योग दिवस के रूप में मना रहा है। कहा कि पहले कुम्भ का मतलब अराजकता और गंदगी हुआ करता था मगर 2019 के कुम्भ को यूएनओ द्वारा विश्व की अमूल्य धरोहर घोषित किया गया जिसमें दुनिया के 127 देशों के लोगों ने हिस्सा लिया। योगी आदित्यनाथ ने सभा में मौजूद सभी लोगों से संकल्प लेकर अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाने की अपील की।