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गोरखपुर: सीलिंग की गायब फाइल तलाशने नोडल अफसर के घर पहुंची पुलिस
Tue, 10 Dec 2019 12:23 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 10 Dec 2019 12:23 PM IST
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बशारतपुर में अर्बन सीलिंग की बेशकीमती जमीन से जुड़ी मूल फाइल गुम होने के मामले में प्रशासन और पुलिस की टीम सोमवार को संयुक्त तौर पर आरोपी एवं पूर्व नोडल अधिकारी पीयूष पांडेय के कोतवाली थाने के पास स्थित घर पहुंची। हालांकि घर पर ताला लटका था जिससे उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। कैंट इंस्पेक्टर रवि राय ने बताया कि प्रशासन के अभिलेखों में आरोपी के पास फाइल होने की सूचना दर्ज है। मजिस्ट्रेट से सर्च वारंट प्राप्त कर तलाशी के लिए पुलिस पहुंची थी।
जिला प्रशासन के लिए यह फाइल सिरदर्द बन गई है। हाई कोर्ट में मूल फ ाइल के साथ एक बार डीएम के . विजयेंद्र पांडियन तलब हो चुके हैं। उस समय तो फाइल गुम होने के साथ ही एफआईआर आदि का हवाला देने पर उन्हें राहत मिल गई थी। इसी मामले में 11 दिसंबर को फिर सुनवाई है जिसके लिए एसीएम (प्रथम) सुरेश राय को जिला प्रशासन का पक्ष रखने के लिए नामित किया गया है। वे कल इलाहाबाद जाएंगे।
अभी तक की पड़ताल में जो जानकारी सामने आई है उसके मुताबिक फ ाइल सदर तहसील में 2005-06 में तैनात तत्कालीन नायब तहसीलदार रामभेज के पास थी। उनसे पूछताछ पर पता चला कि उन्होंने पूर्व कानूनगो छविलाल को फाइल दी थी और उनकी अब मृत्यु हो चुकी है। यानी प्रशासन की तलाश एक बार फि र थम गई है। नई फ ाइल तैयार करने में अड़चन आ रही है। प्रशासन को मिली कुछ अहम जानकारी पर एसीएम के साथ ही कैंट इंस्पेक्टर, कलेक्ट्रेट पुलिस चौकी इंचार्ज समेत कैंट पुलिस ने शाम को विभाग के पूर्व नोडल अधिकारी के घर पहुंची मगर कोई मिला नहीं।
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यह है मामला : बशारतपुर की करीब 11 हजार वर्ग मीटर जमीन को लेकर 2008 में हाईकोर्ट में दाखिल एक याचिका विजय नाथ यादव व अन्य बनाम उप्र राज्य के मामले में जमीन से जुड़ी मूल फाइल गायब हो गई है। इसकी जानकारी प्रशासन को तब हुई जब हाईकोर्ट ने मूल फाइल की मांग की। कोर्ट ने मूल फाइल के साथ 16 नवंबर को डीएम के. विजयेंद्र पांडियन को तलब भी किया था।
इसके बाद आनन.फानन में जब खोजबीन शुरू हुई तो फाइल मिली ही नहीं। इसपर जिला प्रशासन ने 15 नवंबर को कैंट थाने में अर्बन सीलिंग कार्यालय के सेवानिवृत्त कर्मचारी भूपेंद्र सहाय, सेवानिवृत्त नोडल अधिकारी पीयूष पांडेय, अर्बन सीलिंग कार्यालय में तत्कालीन टाइपिस्ट व पेशकार बच्छलाल, तत्कालीन जिला शासकीय अधिवक्ता समरजीत सिंह समेत कई अज्ञात के खिलाफ एफ आईआर भी दर्ज कराई है। उधर जमीन पर एक पूरी कॉलोनी बस चुकी है।
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जिला प्रशासन के लिए यह फाइल सिरदर्द बन गई है। हाई कोर्ट में मूल फ ाइल के साथ एक बार डीएम के . विजयेंद्र पांडियन तलब हो चुके हैं। उस समय तो फाइल गुम होने के साथ ही एफआईआर आदि का हवाला देने पर उन्हें राहत मिल गई थी। इसी मामले में 11 दिसंबर को फिर सुनवाई है जिसके लिए एसीएम (प्रथम) सुरेश राय को जिला प्रशासन का पक्ष रखने के लिए नामित किया गया है। वे कल इलाहाबाद जाएंगे।
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अभी तक की पड़ताल में जो जानकारी सामने आई है उसके मुताबिक फ ाइल सदर तहसील में 2005-06 में तैनात तत्कालीन नायब तहसीलदार रामभेज के पास थी। उनसे पूछताछ पर पता चला कि उन्होंने पूर्व कानूनगो छविलाल को फाइल दी थी और उनकी अब मृत्यु हो चुकी है। यानी प्रशासन की तलाश एक बार फि र थम गई है। नई फ ाइल तैयार करने में अड़चन आ रही है। प्रशासन को मिली कुछ अहम जानकारी पर एसीएम के साथ ही कैंट इंस्पेक्टर, कलेक्ट्रेट पुलिस चौकी इंचार्ज समेत कैंट पुलिस ने शाम को विभाग के पूर्व नोडल अधिकारी के घर पहुंची मगर कोई मिला नहीं।
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यह है मामला : बशारतपुर की करीब 11 हजार वर्ग मीटर जमीन को लेकर 2008 में हाईकोर्ट में दाखिल एक याचिका विजय नाथ यादव व अन्य बनाम उप्र राज्य के मामले में जमीन से जुड़ी मूल फाइल गायब हो गई है। इसकी जानकारी प्रशासन को तब हुई जब हाईकोर्ट ने मूल फाइल की मांग की। कोर्ट ने मूल फाइल के साथ 16 नवंबर को डीएम के. विजयेंद्र पांडियन को तलब भी किया था।
इसके बाद आनन.फानन में जब खोजबीन शुरू हुई तो फाइल मिली ही नहीं। इसपर जिला प्रशासन ने 15 नवंबर को कैंट थाने में अर्बन सीलिंग कार्यालय के सेवानिवृत्त कर्मचारी भूपेंद्र सहाय, सेवानिवृत्त नोडल अधिकारी पीयूष पांडेय, अर्बन सीलिंग कार्यालय में तत्कालीन टाइपिस्ट व पेशकार बच्छलाल, तत्कालीन जिला शासकीय अधिवक्ता समरजीत सिंह समेत कई अज्ञात के खिलाफ एफ आईआर भी दर्ज कराई है। उधर जमीन पर एक पूरी कॉलोनी बस चुकी है।