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मोहर्रम पर रक्तदान, कर्बला के शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि
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मोहर्रम पर रक्तदान, कर्बला के शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि
गोरखपुर। कर्बला की सरजमीं पर हक के लिए कुर्बान होने वाले 72 मासूमों की याद में रक्तदान की पहल को मुस्लिम समाज बेहतरीन श्रद्धांजलि के रूप में देख रहा है। मियां साहब इमामबाड़ा इस्टेट के सज्जादानशीन हजरत अदनान फर्रुख अली शाह की ओर से सातवीं मोहर्रम को इमामबाड़ा परिसर में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। अमर उजाला फाउंडेशन शिविर में सहयोगी है।
डा. विजाहत करीम कहते हैं कि इस्लाम में एक दूसरे की मदद को बेहतरीन इखलाक माना गया है। रक्तदान अजीम मदद है, क्योंकि इसकी जरूरत कभी भी किसी को भी पड़ सकती है। अगर हमारे खून देने से किसी की जिंदगी बचती है तो इससे बड़ा पुण्य का काम कोई दूसरा नहीं हो सकता। निरंतर रक्तदान करने वाले कई बीमारियों से महफूज रहते हैं इसलिए स्वस्थ रहने के लिए भी रक्तदान करते रहना चाहिए।
जमात-ए-इस्लामी के शुजायत हुसैन खान कहते हैं कि इमाम बाड़ा इस्टेट मेें मोहर्रम पर रक्तदान की पहल समाज को प्रेरणा देने वाला काम है। रक्तदान नेकी का काम है । नौजवानों से गुजारिश है कि इस कार-ए-खैर में जोश खरोश के साथ हिस्सा लें। खून पैदा नहीं किया जा सकता, किसी की जिंदगी बचाने के लिए दूसरे व्यक्ति के खून की ही जरूरत होती है।
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जिला अस्पताल रक्तकोष प्रभारी डा. एसके यादव ने बताया कि नियमित रक्तदान करना दूसरों को जीवनदान देने जैसा तो है ही रक्तदाता के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है। उन्होंने नए अनुसंधानों का हवाला देते हुए बताया कि नियमित रक्तदान करने वाले को रक्तचाप की समस्या नहीं होती। रक्त का पतलापन बरकरार रहता है जिससे हृदयरोग का खतरा भी नहीं रहता। ताजा रिसर्च में नियमित रक्तदान करने वाले कैंसर जैसी बीमारी से भी महफूज रहते हैं। उन्होंने मियां साहब की पहल पर इमामबाड़ा इस्टेट में सातवीं मोहर्रम को होने वाले रक्तदान शिविर को कर्बला शरीफ के शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि बताया।
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गोरखपुर। कर्बला की सरजमीं पर हक के लिए कुर्बान होने वाले 72 मासूमों की याद में रक्तदान की पहल को मुस्लिम समाज बेहतरीन श्रद्धांजलि के रूप में देख रहा है। मियां साहब इमामबाड़ा इस्टेट के सज्जादानशीन हजरत अदनान फर्रुख अली शाह की ओर से सातवीं मोहर्रम को इमामबाड़ा परिसर में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। अमर उजाला फाउंडेशन शिविर में सहयोगी है।
डा. विजाहत करीम कहते हैं कि इस्लाम में एक दूसरे की मदद को बेहतरीन इखलाक माना गया है। रक्तदान अजीम मदद है, क्योंकि इसकी जरूरत कभी भी किसी को भी पड़ सकती है। अगर हमारे खून देने से किसी की जिंदगी बचती है तो इससे बड़ा पुण्य का काम कोई दूसरा नहीं हो सकता। निरंतर रक्तदान करने वाले कई बीमारियों से महफूज रहते हैं इसलिए स्वस्थ रहने के लिए भी रक्तदान करते रहना चाहिए।
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जमात-ए-इस्लामी के शुजायत हुसैन खान कहते हैं कि इमाम बाड़ा इस्टेट मेें मोहर्रम पर रक्तदान की पहल समाज को प्रेरणा देने वाला काम है। रक्तदान नेकी का काम है । नौजवानों से गुजारिश है कि इस कार-ए-खैर में जोश खरोश के साथ हिस्सा लें। खून पैदा नहीं किया जा सकता, किसी की जिंदगी बचाने के लिए दूसरे व्यक्ति के खून की ही जरूरत होती है।
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जिला अस्पताल रक्तकोष प्रभारी डा. एसके यादव ने बताया कि नियमित रक्तदान करना दूसरों को जीवनदान देने जैसा तो है ही रक्तदाता के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है। उन्होंने नए अनुसंधानों का हवाला देते हुए बताया कि नियमित रक्तदान करने वाले को रक्तचाप की समस्या नहीं होती। रक्त का पतलापन बरकरार रहता है जिससे हृदयरोग का खतरा भी नहीं रहता। ताजा रिसर्च में नियमित रक्तदान करने वाले कैंसर जैसी बीमारी से भी महफूज रहते हैं। उन्होंने मियां साहब की पहल पर इमामबाड़ा इस्टेट में सातवीं मोहर्रम को होने वाले रक्तदान शिविर को कर्बला शरीफ के शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि बताया।