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खून मिलने से बच गई होती जान
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गोरखपुर के गोला स्थित झझवापार गांव की अनन्या की मेडिकल कॉलेज में खून नहीं मिलने से जान चली गई। (फा?
- फोटो : GORAKHPUR DEHAT
काश... 70 एमएल खून मिल जाता तो बच सकती थी मासूम की जान
जानीपुर (गोरखपुर)। गोला थाना क्षेत्र के झझवापार गांव के लालमुनी प्रसाद की नातिन अनन्या (11माह) ने केवल 70 एमएल खून न मिलने के कारण दम तोड़ दिया। परिवार वालों का आरोप है कि तबीयत ज्यादा खराब होने पर अनन्या को सोमवार को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। लालमुनी के मुताबिक डाक्टरों ने खून की कमी बताते हुए 70 एमएल खून की तत्काल जरूरत बताई। खून लेने जाने पर यह कहकर मना कर दिया गया कि एक बोतल में 350 एमएल रक्त होता है, 70 एमएल खून देने के लिए बाकी रक्त वह बर्बाद नहीं करेंगे।
जानीपुर के प्रधान राजेश सिंह राजन ने बताया कि मेडिकल कालेज में खून देने से मना करने पर उन्होंने क्षेत्र के विधायक से फोन कराया और खुद भी खून देने जा रहे थे लेकिन तब तक बच्ची ने दम तोड़ दिया। प्रधान ने कहा कि यदि समय रहते अनन्या को ब्लड मिल गया होता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। परिजन भी यही कहकर रो रहे थे कि समय से खून नहीं मिला। देर शाम को राजघाट के मुक्तिधाम पर मासूम के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
इस बारे में मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक के प्रभारी राजेश राय ने कहा कि ब्लड बैंक में थैलासीमिया और गंभीर रोगियों को मुफ्त में खून दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर दो पार्ट में भी खून दिया जाता है, लेकिन डॉक्टरों की सिफारिश पर। आरोप गलत है। यदि चिकित्सक की सिफारिश पर आए होते तो खून जरूर दिया गया होता।
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जानीपुर (गोरखपुर)। गोला थाना क्षेत्र के झझवापार गांव के लालमुनी प्रसाद की नातिन अनन्या (11माह) ने केवल 70 एमएल खून न मिलने के कारण दम तोड़ दिया। परिवार वालों का आरोप है कि तबीयत ज्यादा खराब होने पर अनन्या को सोमवार को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। लालमुनी के मुताबिक डाक्टरों ने खून की कमी बताते हुए 70 एमएल खून की तत्काल जरूरत बताई। खून लेने जाने पर यह कहकर मना कर दिया गया कि एक बोतल में 350 एमएल रक्त होता है, 70 एमएल खून देने के लिए बाकी रक्त वह बर्बाद नहीं करेंगे।
जानीपुर के प्रधान राजेश सिंह राजन ने बताया कि मेडिकल कालेज में खून देने से मना करने पर उन्होंने क्षेत्र के विधायक से फोन कराया और खुद भी खून देने जा रहे थे लेकिन तब तक बच्ची ने दम तोड़ दिया। प्रधान ने कहा कि यदि समय रहते अनन्या को ब्लड मिल गया होता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। परिजन भी यही कहकर रो रहे थे कि समय से खून नहीं मिला। देर शाम को राजघाट के मुक्तिधाम पर मासूम के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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इस बारे में मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक के प्रभारी राजेश राय ने कहा कि ब्लड बैंक में थैलासीमिया और गंभीर रोगियों को मुफ्त में खून दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर दो पार्ट में भी खून दिया जाता है, लेकिन डॉक्टरों की सिफारिश पर। आरोप गलत है। यदि चिकित्सक की सिफारिश पर आए होते तो खून जरूर दिया गया होता।
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