{"_id":"573f57964f1c1bf857ac7f36","slug":"bed-entrance-exam-result-on-head-seat-plan-is-not-compleated","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीएड प्रवेश रिजल्ट सिर पर, सीटें अभी तय नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीएड प्रवेश रिजल्ट सिर पर, सीटें अभी तय नहीं
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 20 May 2016 11:59 PM IST
विज्ञापन
bed result
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीएड का प्रवेश परीक्षा का रिजल्ट सप्ताह भीतर घोषित होने को है लेकिन गोरखपुर यूनिवर्सिटी अभी तक अपने कॉलेजों की बीएड सीटों का निर्धारण नहीं कर सकी है। इसके चलते कॉलेज प्रबंधन में उहापोह की स्थिति बनी हुई है। यूनिवर्सिटी सूत्रों के मुताबिक यूनिवर्सिटी से जुड़े 57 में 16 कॉलेजों में अभी क्षमता के मुताबिक शिक्षक ही नहीं हैं, जिसके चलते सीट निर्धारण का निर्णय नहीं लिया जा सका है।
उधर, यूनिवर्सिटी का लेट-लतीफ रवैया देख बीएड प्रवेश परीक्षा की आयोजक लखनऊ यूनिवर्सिटी ने गोरखपुर यूनिवर्सिटी को पत्र भेजकर 13 बिंदुओं पर ब्यौरा मांगा है। इसके पीछे आयोजक यूनिवर्सिटी की मंशा काउंसिलिंग से पहले सीटों की स्थिति का आंकड़ा तैयार करना है, जिससे काउंसिलिंग के दौरान अभ्यर्थियों को उनकी इच्छा के अनुरूप कॉलेज का विकल्प दिया जा सके।
दरअसल यह समस्या तब से खड़ी हुई है, जब शिक्षकों के मानक और सीटों के बीच तालमेल का अभाव देख पिछले सत्र में गोरखपुर यूनिवर्सिटी ने सभी वित्तपोषित कॉलेजों को सीटें शून्य कर दी थीं जबकि स्व- वित्तपोषित कॉलेजों को आधी सीटों पर ही प्रवेश की अनुमति दी गई। पिछले वर्ष की स्थिति को देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस बार पहले से ही कॉलेजों में शिक्षकों के मानक को लेकर छानबीन शुरू कर दी थी।
विज्ञापन
31 कॉलेजों ने तो मानक पूरा होने का दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए लेकिन 26 कॉलेज अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं कर सके। जब यूनिवर्सिटी की ओर से इन कॉलेजों पर मानक पूरा करने का दबाव बनाया गया तो 10 ऐसे कॉलेजों ने दौड़भाग कर शिक्षकों की संख्या पूरी कर ली, जिनकी फाइलें इसे लेकर प्रक्रिया में थीं, लेकिन 16 कॉलेजों में शिक्षकों की स्थिति अब भी साफ नहीं हो सकी है।
वित्तपोषित कॉलेजों में फिर नहीं होगा प्रवेश
गोरखपुर। तय सीटों के मुताबिक शिक्षक नियुक्त करने का यूनिवर्सिटी प्रशासन का दबाव स्व-वित्तपोषित कॉलेजों पर तो देखने को मिला और ज्यादातर कॉलेजों ने इसे पूरा भी कर लिया लेकिन वित्तपोषित कॉलेज चाहकर भी कुछ नहीं कर सके। वजह साफ है, इन कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति उच्च शिक्षा चयन आयोग द्वारा ही संभव है, जो इस वर्ष भी नहीं हो सकी। नतीजतन इन कॉलेजों में एक बार फिर प्रवेश नहीं हो सकेंगे। इन कॉलेजों में 50 सीट के लिए मानक आठ शिक्षकों के मुकाबले छह या उससे उससे कम शिक्षक हैं। बीआरडी पीजी कॉलेज देवरिया में छह, दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज में सात, बुद्ध पीजी कॉलेज कुशीनगर में चार, स्वामी देवानंद पीजी कॉलेज मठलार देवरिया में दो शिक्षक हैं। एमएमएम पीजी कॉलेज भाटपार रानी देवरिया में एक भी शिक्षक नहीं हैं।
विज्ञापन
उधर, यूनिवर्सिटी का लेट-लतीफ रवैया देख बीएड प्रवेश परीक्षा की आयोजक लखनऊ यूनिवर्सिटी ने गोरखपुर यूनिवर्सिटी को पत्र भेजकर 13 बिंदुओं पर ब्यौरा मांगा है। इसके पीछे आयोजक यूनिवर्सिटी की मंशा काउंसिलिंग से पहले सीटों की स्थिति का आंकड़ा तैयार करना है, जिससे काउंसिलिंग के दौरान अभ्यर्थियों को उनकी इच्छा के अनुरूप कॉलेज का विकल्प दिया जा सके।
विज्ञापन
दरअसल यह समस्या तब से खड़ी हुई है, जब शिक्षकों के मानक और सीटों के बीच तालमेल का अभाव देख पिछले सत्र में गोरखपुर यूनिवर्सिटी ने सभी वित्तपोषित कॉलेजों को सीटें शून्य कर दी थीं जबकि स्व- वित्तपोषित कॉलेजों को आधी सीटों पर ही प्रवेश की अनुमति दी गई। पिछले वर्ष की स्थिति को देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस बार पहले से ही कॉलेजों में शिक्षकों के मानक को लेकर छानबीन शुरू कर दी थी।
विज्ञापन
31 कॉलेजों ने तो मानक पूरा होने का दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए लेकिन 26 कॉलेज अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं कर सके। जब यूनिवर्सिटी की ओर से इन कॉलेजों पर मानक पूरा करने का दबाव बनाया गया तो 10 ऐसे कॉलेजों ने दौड़भाग कर शिक्षकों की संख्या पूरी कर ली, जिनकी फाइलें इसे लेकर प्रक्रिया में थीं, लेकिन 16 कॉलेजों में शिक्षकों की स्थिति अब भी साफ नहीं हो सकी है।
वित्तपोषित कॉलेजों में फिर नहीं होगा प्रवेश
गोरखपुर। तय सीटों के मुताबिक शिक्षक नियुक्त करने का यूनिवर्सिटी प्रशासन का दबाव स्व-वित्तपोषित कॉलेजों पर तो देखने को मिला और ज्यादातर कॉलेजों ने इसे पूरा भी कर लिया लेकिन वित्तपोषित कॉलेज चाहकर भी कुछ नहीं कर सके। वजह साफ है, इन कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति उच्च शिक्षा चयन आयोग द्वारा ही संभव है, जो इस वर्ष भी नहीं हो सकी। नतीजतन इन कॉलेजों में एक बार फिर प्रवेश नहीं हो सकेंगे। इन कॉलेजों में 50 सीट के लिए मानक आठ शिक्षकों के मुकाबले छह या उससे उससे कम शिक्षक हैं। बीआरडी पीजी कॉलेज देवरिया में छह, दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज में सात, बुद्ध पीजी कॉलेज कुशीनगर में चार, स्वामी देवानंद पीजी कॉलेज मठलार देवरिया में दो शिक्षक हैं। एमएमएम पीजी कॉलेज भाटपार रानी देवरिया में एक भी शिक्षक नहीं हैं।