{"_id":"67-95783","slug":"Gorakhpur-95783-67","type":"story","status":"publish","title_hn":"असिंचित क्षेत्रों को भी मिलेगा पानी : राधा मोहन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
असिंचित क्षेत्रों को भी मिलेगा पानी : राधा मोहन
Gorakhpur
Updated Tue, 23 Sep 2014 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोरखपुर। केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा कि किसानों की समस्याओं के प्रति सरकार गंभीर है। उसके समाधान के लिए हर उपाय किए जाएंगे। तीन वर्षों के अंदर देश के 56 प्रतिशत असिंचित क्षेत्रों में प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत पानी देने की व्यवस्था की जाएगी। मृदा परीक्षण के लिए मोबाइल स्वायल टेस्टिंग लैब हर जगह उपलब्ध कराई जाएगी। उन्नत किस्म के बीजों को किसानों को उपलब्ध कराकर उत्पादकता बढ़ाई जाएगी। देश के 571 जिलों में कौन सी खेती बेहतर होगी, कृषि वैज्ञानिक इसके लिए सलाह देंगे। उन्होंने आने वाले दिनों में पूर्वांचल में कृषि विश्वविद्यालय खोलने की भी बात कही
ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ को श्रद्धांजलि देने गोरखनाथ मंदिर पहुंचे केंद्रीय कृषि मंत्री ने यह बातें संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि देश का किसान गेहूं, मक्का, धान तथा बाजरे के स्थान पर लाभ आधारित खेती करना चाहता हैं, लेकिन बहुत से क्षेत्रों में पानी की समस्या आड़े आती है। केंद्र सरकार ने पहल करके प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत हर खेत को पानी देने का निर्णय लिया है और तीन वर्ष की कार्ययोजना तैयार की है।
उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में केंद्र सरकार की अपनी सीमाएं हैं। कृषि पूरी तरह से राज्य के ढांचे पर निर्भर है। केंद्र सरकार तय सीमा के अंदर धन और उच्च तकनीकी सुविधाएं दे सकती है। उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2013-14 में कृषि विकास योजना के मद में प्रदेश सरकार को कुल 561 करोड़ की धनराशि दी गई थी। यह सरकार उसमें से केवल 434 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाई। राज्य सरकार जब तक किसानों के हित में कार्य नहीं करेंगी, राज्य की स्थिति में सुधार नहीं आएगा। कहा कि गोरखपुर क्षेत्र में केले की खेती और मत्स्य पालन की अपार संभावनाएं हैं। इसके लिए उच्च तकनीक से संपन्न कृषि विज्ञान केंद्र खोला जाएगा।
विज्ञापन
सूखे की स्थिति पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जून, जुलाई में निराशाजनक मानसून के बाद अब स्थिति में थोड़ा सुधार आया है। कम बारिश के बाद भी देश में मात्र तीन प्रतिशत कम बुवाई की गई। राज्यों ने सूखाग्रस्त घोषित करने में देरी की। उत्तर प्रदेश में मात्र 44 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया। केंद्र की तरफ से गठित टीम इसकी समीक्षा करेगी। उसके बाद राहत के इंतजाम किए जाएंगे।
विज्ञापन
ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ को श्रद्धांजलि देने गोरखनाथ मंदिर पहुंचे केंद्रीय कृषि मंत्री ने यह बातें संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि देश का किसान गेहूं, मक्का, धान तथा बाजरे के स्थान पर लाभ आधारित खेती करना चाहता हैं, लेकिन बहुत से क्षेत्रों में पानी की समस्या आड़े आती है। केंद्र सरकार ने पहल करके प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत हर खेत को पानी देने का निर्णय लिया है और तीन वर्ष की कार्ययोजना तैयार की है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में केंद्र सरकार की अपनी सीमाएं हैं। कृषि पूरी तरह से राज्य के ढांचे पर निर्भर है। केंद्र सरकार तय सीमा के अंदर धन और उच्च तकनीकी सुविधाएं दे सकती है। उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2013-14 में कृषि विकास योजना के मद में प्रदेश सरकार को कुल 561 करोड़ की धनराशि दी गई थी। यह सरकार उसमें से केवल 434 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाई। राज्य सरकार जब तक किसानों के हित में कार्य नहीं करेंगी, राज्य की स्थिति में सुधार नहीं आएगा। कहा कि गोरखपुर क्षेत्र में केले की खेती और मत्स्य पालन की अपार संभावनाएं हैं। इसके लिए उच्च तकनीक से संपन्न कृषि विज्ञान केंद्र खोला जाएगा।
विज्ञापन
सूखे की स्थिति पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जून, जुलाई में निराशाजनक मानसून के बाद अब स्थिति में थोड़ा सुधार आया है। कम बारिश के बाद भी देश में मात्र तीन प्रतिशत कम बुवाई की गई। राज्यों ने सूखाग्रस्त घोषित करने में देरी की। उत्तर प्रदेश में मात्र 44 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया। केंद्र की तरफ से गठित टीम इसकी समीक्षा करेगी। उसके बाद राहत के इंतजाम किए जाएंगे।