{"_id":"67-83311","slug":"Gorakhpur-83311-67","type":"story","status":"publish","title_hn":"आरटीओ दफ्तर में ही लिपिक को डांटने लगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आरटीओ दफ्तर में ही लिपिक को डांटने लगे
Gorakhpur
Updated Sat, 01 Mar 2014 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोरखपुर। आरटीओ दफ्तर में शुक्रवार को भी आम दिनों जैसी ही गहमागहमी थी। कैंपस में वकीलों के तख्ते के इर्द-गिर्द भीड़ और लोगों की आमदोरफ्त भी। दोपहर सवा बारह बजे मैं भी पहुंचा। आरटीओ के कमरे के करीब पहुंचा तो शोर सुनकर रुक गया। जिज्ञासावश पर्दा हटाया तो सबसे पहले सफेद कुर्ता-पायजामा पहने एक शख्स नजर आए। कुर्ते की सफेदी और आसपास मौजूद उनके साथी उनकी नेतागिरी की तस्दीक कर रहे थे। कमरे में आरटीओ मौजूद नहीं थे। नेता और समर्थक सामने खड़े आरटीओ दफ्तर के एक क्लर्क को उसकी जिम्मेदारी बताते हुए डांटने में लगे थे। क्लर्क भी शायद अपनी सफाई में कुछ कहना चाह रहा था लेकिन उसे मौका नहीं मिल रहा था। कुछ देर तक नेता और उनके समर्थकों की बात सुनने के बाद मालूम हुआ कि नेता के एक सहयोगी ने कुछ दिन पहले ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया था लेकिन तय समय में लाइसेंस उसके यहां नहीं पहुंचा। वह कई बार आरटीओ दफ्तर भी गया लेकिन काम नहीं बना तो उसने नेता से शिकायत की। फिर क्या था नेता भी पहुंच गए आरटीओ दफ्तर। यूं तो ऐसे तमाम लोग रोज ही ऐसी शिकायतें लेकर चक्कर लगाते रहते हैं लेकिन नियम-कायदे बताकर आरटीओ दफ्तर के कर्मचारी उन्हें टालते रहते हैं। थक-हारकर ये परेशान लोग इन्हीं कर्मचारियों से नियम कायदे से इतर रास्ता तलाशने की मनुहार करते हैं। बहरहाल, इसी शोर के बीच आरटीओ और दूसरे अफसर कमरे में दाखिल हुए तो क्लर्क ने बताया कि पता गलत होने की वजह से ड्राइविंग लाइसेंस नहीं पहुंचा। अफसरों ने पता ठीक कराकर लाइसेंस दोबारा जारी करने की बात पर मामला शांत कराया।
विज्ञापन