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घर-घर ढूंढे जाएंगे खसरे के मरीज
Gorakhpur
Updated Fri, 11 Oct 2013 05:38 AM IST
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गोरखपुर। खसरा उन्मूलन के लिए पहली बार निगरानी मीजल्स सर्विलांस कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके लिए महामारी प्रतिक्रिया दल (एपिडेमिक रिस्पॉन्स) टीम बनायी गयी है। 14 अक्टूबर से ये टीम अपना काम शुरू कर देगी। इन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम द्वारा प्रशिक्षण दिया गया है। टीम के सदस्य घर-घर जाकर खसरे के मरीज ढूंढेंगे। स्वास्थ्य केन्द्रों पर टेस्ट किट उपलब्ध करा दिए गए हैं। केन्द्रों के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी और चिकित्सा अधीक्षक को हर हफ्ते रिपोर्ट भेजने की जिम्मेदारी दी गई है।
बच्चों को जन्म के समय खसरे का टीका लगता है। शोध में पाया गया है कि ये टीका पर्याप्त नहीं है। इसका दूसरा डोज लगाकर ही बीमारी को रोका जा सकता है। इस रिपोर्ट के बाद शासन के निर्देश पर सर्विलांस टीम गठित की गई है। एक इलाके में पांच केस मिलने पर अलर्ट जारी कर दिया जाएगा। टीम वहां जाकर जानकारी जुटाएगी। किसी खास इलाके में 10 केस मिलने पर घर-घर सर्वे किया जाएगा और ब्लड सैंपल लिए जाएंगे। ब्लड सैंपल से सीरम निकालकर लखनऊ स्थित लैब में जांच के लिए भेजा जाएगा। वहीं पर इस बीमारी की जांच होगी। सैंपल को लखनऊ लैब भेजने तक सुरक्षा की दृष्टि से कोल्ड चेन को बनाए रखने के लिए भी खास व्यवस्था की गई है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. आईवी विश्वकर्मा ने बताया कि मार्च-अप्रैल में इसका प्रकोप बढ़ता है। पहला डोज दिया जा चुका है, दूसरे डोज को प्रभावी बनाने और निरंतर काम हो सके इस नाते टीम का गठन किया गया है। इस काम के लिए प्राइवेट डॉक्टरों की मदद ली जाएगी और उन्हें भी प्रशिक्षित किया जाएगा।
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बच्चों को जन्म के समय खसरे का टीका लगता है। शोध में पाया गया है कि ये टीका पर्याप्त नहीं है। इसका दूसरा डोज लगाकर ही बीमारी को रोका जा सकता है। इस रिपोर्ट के बाद शासन के निर्देश पर सर्विलांस टीम गठित की गई है। एक इलाके में पांच केस मिलने पर अलर्ट जारी कर दिया जाएगा। टीम वहां जाकर जानकारी जुटाएगी। किसी खास इलाके में 10 केस मिलने पर घर-घर सर्वे किया जाएगा और ब्लड सैंपल लिए जाएंगे। ब्लड सैंपल से सीरम निकालकर लखनऊ स्थित लैब में जांच के लिए भेजा जाएगा। वहीं पर इस बीमारी की जांच होगी। सैंपल को लखनऊ लैब भेजने तक सुरक्षा की दृष्टि से कोल्ड चेन को बनाए रखने के लिए भी खास व्यवस्था की गई है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. आईवी विश्वकर्मा ने बताया कि मार्च-अप्रैल में इसका प्रकोप बढ़ता है। पहला डोज दिया जा चुका है, दूसरे डोज को प्रभावी बनाने और निरंतर काम हो सके इस नाते टीम का गठन किया गया है। इस काम के लिए प्राइवेट डॉक्टरों की मदद ली जाएगी और उन्हें भी प्रशिक्षित किया जाएगा।
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