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प्रस्ताव स्वीकृति में देरी पर ‘मिनी सदन’ में हंगामा
siddharthnagar
Updated Mon, 26 Feb 2018 12:06 AM IST
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जिला पंचायत की बैठक में मौजूद सांसद, विधायक व अध्यक्ष।
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। मनरेगा के तहत सदस्यों के प्रस्तावों को स्वीकृत न किए जाने पर रविवार को जिला पंचायत की बैठक (मिनी सदन) में जमकर हंगामा हुआ। सांसद, विधायक की मौजूदगी में सदस्यों ने एक स्वर में अफसरों पर इसका ठिकरा फोड़ा। सांसद ने जब एएमए से इस बारे में जानकारी मांगी तो वे जवाब नहीं दे सके। बस इतना कहा कि मामला उनके कार्यभार संभालने (जून) से पूर्व का है। सांसद ने इसे दायित्वों के प्रति लापरवाही ठहराते हुए एक सप्ताह में स्पष्टीकरण लेने के लिए सीडीओ को निर्देशित किया। सभी सदस्यों ने इस पर सहमति जताई। बैठक के दौरान वित्तीय सत्र 2018-19 के लिए अनुमानित 54.68 करोड़ के बजट को मंजूरी दी गई।
पूर्वाह्न साढ़े 11 बजे से शुरू हुई बैठक में विभागों की समीक्षा के दौरान सदस्यों ने आपूर्ति, समाज कल्याण विभाग से कोई भी प्रतिनिधि मौजूद न होने पर नाराजगी जताई। सदस्यों ने कहा कि मौजूदा सत्र के शुरुआत में ही मनरेगा के प्रस्ताव लिए गए थे। अब तक कोई भी प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हुआ। सांसद जगदंबिका पाल ने इस बारे में एएमए अरविंद कुमार आनंद से जानकारी मांगी तो उन्होंने अनभिज्ञता जताई। उनका कहना था कि जून 2017 में कार्यभार संभालने के बाद से कोई प्रस्ताव नहीं आया। पहले की प्रगति ही उन्हें जानकारी नहीं। इस पर सांसद बिफर पड़े। उन्होंने कहा कि आखिर आपने सात माह तक कुछ जानने की जरूरत क्यों नहीं समझी। यह घोर लापरवाही है। सीडीओ को निर्देश दिया कि रजिस्टर बनाकर सभी प्रस्तावों को लिपिबद्ध किया जाए। पहले कितने प्रस्ताव आए और उन पर क्या कार्रवाई हुई।
इस बारे में एएमए से सात दिनों के अंदर लिखित जवाब लेते हुए अवगत कराएं। सभी सदस्यों ने ध्वनिमत से इस पर सहमति जताई। बाद में सीडीओ अनिल कुमार मिश्र ने बताया कि सत्यापन के दौरान कुछ ऐसे प्रस्ताव मिले, जिन पर पहले से काम हुआ था। लिहाजा दोबारा प्रस्ताव मांगे गए थे। सदस्यों ने दोबारा प्रस्ताव भी भेजे जाने की जानकारी दी। सांसद ने कहा कि अगर कुछ प्रस्ताव गलत थे तो उसे छोड़कर अन्य को पास क्यों नहीं हुए। उन्होंने सीडीओ के प्रति भी नाराजगी जताई। सीडीओ ने इस जानकारी के लिए मोहलत मांगी। कई माह बाद बैठक बुलाने पर भी आपत्ति दर्ज कराई। कहना था, बैठक इतने अंतराल के बाद होती है कि कई सामयिक मुद्दे छूट जाते हैं। इस पर प्रत्येक तीन माह पर बैठक कराने का निर्णय लिया गया।
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बैठक में सदस्यों ने जिला पंचायत में निर्माण कार्यों के लिए मनमाने ढंग से ठेकेदारों के पंजीयन का आरोप लगाते हुए सभी नए 48 पंजीयन रद्द करने की मांग की। बैठक में कमीशनखोरी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। सदस्यों ने अध्यक्ष व एएमए पर कार्यों में हिस्सा लगाने का आरोप लगाया। विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि जिला पंचायत को लूटपाट का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा। विकास कार्यों में न तो कोई गुणवत्ता से समझौता होगा और न ही हिस्सेदारी चलने दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिला पंचायत में वही चलेगा जो सदस्य चाहेंगे, सीडीओ या एएमए की मनमानी नहीं चलेगी।
बैठक में सदर विधायक श्यामधनी राही, शोहरतगढ़ विधायक चौधरी अमर सिंह, पूर्व विधायक सईद भ्रमर, राज्यसभा सांसद आलोक तिवारी के प्रतिनिधि अफसर रिजवी, एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह के प्रतिनिधि विजय बहादुर सिंह, सदस्य अजय सिंह, रामसागर चौधरी, महेश कन्नौजिया, सत्यनारायण यादव, अतहर अलीम, मो.उमर, अकालमति, मंजू पासवान, परवेज, अब्दुल सलाम, दीनेंद्र दत्त यादव, गंगा मिश्र आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष गरीबदास गौतम व संचालन प्रशासनिक अधिकारी अर्जुन सिंह ने किया।
54.68 करोड़ का बजट पास
जिला पंचायत की बैठक में वर्ष 2018-19 के लिए 54.68 करोड़ रुपये का अनुमानित बजट को मंजूरी दी गई। यह वर्ष 2017-18 के पुनरीक्षित बजट 65.18 करोड़ से करीब 10.49 करोड़ रुपये कम है। एएमए के मुताबिक तेरहवां वित्त आयोग व बीआरजीएफ योजना बंद होने से अगले वित्तीय वर्ष में इसके तहत अनुदान नहीं मिलना है। लिहाजा इसे बजट में शामिल नहीं किया गया है। बजट में राज्य वित्त आयोग, ठेकेदारों के जमानत राशि, ग्रामीण क्षेत्र के व्यापारियों से टैक्स, जिला पंचायत की दुकानों के किराए से प्राप्तियों को शामिल किया गया है।
बैठक में ये मुद्दे भी उठे
* कर्जमाफी के बाद भी हो रही वसूली
सदस्य सत्यनारायण यादव ने कहा कि सरकार की कर्जमाफी योजना के तहत ऋण माफी का प्रमाण पत्र मिलने के बाद भी किसानों से बैंक कर्मी वसूली कर रहे हैं। ब्याज, बीमा आदि का हवाला देकर पैसा मांगा जा रहा है। इस पर अंकुश लगाने की मांग की।
* अस्तपाल में हावी हैं दलाल
मो.उमर ने कहा कि जिला अस्पताल में दलालों का वर्चस्व है। गेट पर पहुंचते ही पर्ची छीन लेते हैं। इंट्राकैथ भी बाहर से खरीदने को विवश किया जाता है। बेड पर चादर नहीं बदली जाती। महेश कन्नौजिया ने लोटन सीएचसी में डॉक्टरों के रात में न रहने की शिकायत की।
* इटवा सीएचसी के डॉक्टर पर दर्ज हो केस
सदस्य अजय सिंह ने पिछले दिनों इटवा में परीक्षार्थियों से भरे वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने के प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा कि घायल छात्राओं को प्रारंभिक इलाज दिए बगैर रेफर कर दिया गया। इसके चलते गोरखपुर पहुंचते ही एक छात्रा की मौत हो गई। दोषी चिकित्सक पर केस दर्ज किया जाए। सीएमओ ने प्रकरण में अधीक्षक के पहले ही तबादले की जानकारी दी।
* भू-माफिया के नाम पर हो रहा उत्पीड़न
अब्दुल सपलाम ने कहा कि भू-माफिया पर कार्रवाई की पहल अच्छी है, लेकिन राजस्व कर्मचारी
भू-माफिया के नाम पर गरीबों को उजाड़ रहे हैं। डरा-धमका कर पर पैसा वसूला जा रहा है। इस पर सांसद व विधायक ने बाहरी व नए लेखपालों की मनमानी रोकने के लिए सीडीओ को निर्देशित किया।
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पूर्वाह्न साढ़े 11 बजे से शुरू हुई बैठक में विभागों की समीक्षा के दौरान सदस्यों ने आपूर्ति, समाज कल्याण विभाग से कोई भी प्रतिनिधि मौजूद न होने पर नाराजगी जताई। सदस्यों ने कहा कि मौजूदा सत्र के शुरुआत में ही मनरेगा के प्रस्ताव लिए गए थे। अब तक कोई भी प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हुआ। सांसद जगदंबिका पाल ने इस बारे में एएमए अरविंद कुमार आनंद से जानकारी मांगी तो उन्होंने अनभिज्ञता जताई। उनका कहना था कि जून 2017 में कार्यभार संभालने के बाद से कोई प्रस्ताव नहीं आया। पहले की प्रगति ही उन्हें जानकारी नहीं। इस पर सांसद बिफर पड़े। उन्होंने कहा कि आखिर आपने सात माह तक कुछ जानने की जरूरत क्यों नहीं समझी। यह घोर लापरवाही है। सीडीओ को निर्देश दिया कि रजिस्टर बनाकर सभी प्रस्तावों को लिपिबद्ध किया जाए। पहले कितने प्रस्ताव आए और उन पर क्या कार्रवाई हुई।
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इस बारे में एएमए से सात दिनों के अंदर लिखित जवाब लेते हुए अवगत कराएं। सभी सदस्यों ने ध्वनिमत से इस पर सहमति जताई। बाद में सीडीओ अनिल कुमार मिश्र ने बताया कि सत्यापन के दौरान कुछ ऐसे प्रस्ताव मिले, जिन पर पहले से काम हुआ था। लिहाजा दोबारा प्रस्ताव मांगे गए थे। सदस्यों ने दोबारा प्रस्ताव भी भेजे जाने की जानकारी दी। सांसद ने कहा कि अगर कुछ प्रस्ताव गलत थे तो उसे छोड़कर अन्य को पास क्यों नहीं हुए। उन्होंने सीडीओ के प्रति भी नाराजगी जताई। सीडीओ ने इस जानकारी के लिए मोहलत मांगी। कई माह बाद बैठक बुलाने पर भी आपत्ति दर्ज कराई। कहना था, बैठक इतने अंतराल के बाद होती है कि कई सामयिक मुद्दे छूट जाते हैं। इस पर प्रत्येक तीन माह पर बैठक कराने का निर्णय लिया गया।
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बैठक में सदस्यों ने जिला पंचायत में निर्माण कार्यों के लिए मनमाने ढंग से ठेकेदारों के पंजीयन का आरोप लगाते हुए सभी नए 48 पंजीयन रद्द करने की मांग की। बैठक में कमीशनखोरी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। सदस्यों ने अध्यक्ष व एएमए पर कार्यों में हिस्सा लगाने का आरोप लगाया। विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि जिला पंचायत को लूटपाट का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा। विकास कार्यों में न तो कोई गुणवत्ता से समझौता होगा और न ही हिस्सेदारी चलने दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिला पंचायत में वही चलेगा जो सदस्य चाहेंगे, सीडीओ या एएमए की मनमानी नहीं चलेगी।
बैठक में सदर विधायक श्यामधनी राही, शोहरतगढ़ विधायक चौधरी अमर सिंह, पूर्व विधायक सईद भ्रमर, राज्यसभा सांसद आलोक तिवारी के प्रतिनिधि अफसर रिजवी, एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह के प्रतिनिधि विजय बहादुर सिंह, सदस्य अजय सिंह, रामसागर चौधरी, महेश कन्नौजिया, सत्यनारायण यादव, अतहर अलीम, मो.उमर, अकालमति, मंजू पासवान, परवेज, अब्दुल सलाम, दीनेंद्र दत्त यादव, गंगा मिश्र आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष गरीबदास गौतम व संचालन प्रशासनिक अधिकारी अर्जुन सिंह ने किया।
54.68 करोड़ का बजट पास
जिला पंचायत की बैठक में वर्ष 2018-19 के लिए 54.68 करोड़ रुपये का अनुमानित बजट को मंजूरी दी गई। यह वर्ष 2017-18 के पुनरीक्षित बजट 65.18 करोड़ से करीब 10.49 करोड़ रुपये कम है। एएमए के मुताबिक तेरहवां वित्त आयोग व बीआरजीएफ योजना बंद होने से अगले वित्तीय वर्ष में इसके तहत अनुदान नहीं मिलना है। लिहाजा इसे बजट में शामिल नहीं किया गया है। बजट में राज्य वित्त आयोग, ठेकेदारों के जमानत राशि, ग्रामीण क्षेत्र के व्यापारियों से टैक्स, जिला पंचायत की दुकानों के किराए से प्राप्तियों को शामिल किया गया है।
बैठक में ये मुद्दे भी उठे
* कर्जमाफी के बाद भी हो रही वसूली
सदस्य सत्यनारायण यादव ने कहा कि सरकार की कर्जमाफी योजना के तहत ऋण माफी का प्रमाण पत्र मिलने के बाद भी किसानों से बैंक कर्मी वसूली कर रहे हैं। ब्याज, बीमा आदि का हवाला देकर पैसा मांगा जा रहा है। इस पर अंकुश लगाने की मांग की।
* अस्तपाल में हावी हैं दलाल
मो.उमर ने कहा कि जिला अस्पताल में दलालों का वर्चस्व है। गेट पर पहुंचते ही पर्ची छीन लेते हैं। इंट्राकैथ भी बाहर से खरीदने को विवश किया जाता है। बेड पर चादर नहीं बदली जाती। महेश कन्नौजिया ने लोटन सीएचसी में डॉक्टरों के रात में न रहने की शिकायत की।
* इटवा सीएचसी के डॉक्टर पर दर्ज हो केस
सदस्य अजय सिंह ने पिछले दिनों इटवा में परीक्षार्थियों से भरे वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने के प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा कि घायल छात्राओं को प्रारंभिक इलाज दिए बगैर रेफर कर दिया गया। इसके चलते गोरखपुर पहुंचते ही एक छात्रा की मौत हो गई। दोषी चिकित्सक पर केस दर्ज किया जाए। सीएमओ ने प्रकरण में अधीक्षक के पहले ही तबादले की जानकारी दी।
* भू-माफिया के नाम पर हो रहा उत्पीड़न
अब्दुल सपलाम ने कहा कि भू-माफिया पर कार्रवाई की पहल अच्छी है, लेकिन राजस्व कर्मचारी
भू-माफिया के नाम पर गरीबों को उजाड़ रहे हैं। डरा-धमका कर पर पैसा वसूला जा रहा है। इस पर सांसद व विधायक ने बाहरी व नए लेखपालों की मनमानी रोकने के लिए सीडीओ को निर्देशित किया।