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झांकियों में दिखा भारतीय समाज का हर रंग
Updated Fri, 25 Aug 2017 07:59 PM IST
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गोरखपुर।
एक तरफ अंध विश्वासी बाबाओं की ओर से फैलाए गए मकड़ जाल का दृश्य था, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीयों की दुर्दशा की झलक। पत्नियों की हुकूमत को दर्शाती झांकी जहां लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला रही थी तो वहीं समाज में बेटियों से रेप आखिर कब तक की झांकी उनके दर्द को बयां कर रही थी। वहीं सर्जिकल स्ट्राइक जहां लोगों में देशभक्ति का संचार कर रही थी तो बाढ़ राहत कोष की झांकी बाढ़ पीड़ितों की मदद की अलख जगा रही थी। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की झांकी घटते लिंगानुपात पर चोट कर रही थी।
शुक्रवार को अराध्य देव झूलेलाल के वार्षिकोत्सव पर सिंधी समाज की ओर से निकाली गई झांकियों में सिंधियों ने अपने हुनर को झांकियों में उतार दिया था। महोत्सव की शुरूआत पल्लव साहब के साथ हुई। झूलेलाल की कुनरी साहब की कलश पूजा झूलेलाल मंदिर में श्रद्धा के साथ लाई गई, जहां 16 अगस्त से चल रहे सिंधियों के नवरात्रि व्रत का समापन हुआ। इसके बाद महानगर विभिन्न स्थानों पर सिंधियों की ओर से स्थापित झूलेलाल की प्रतिमाओं का पूजन अर्चन किया गया और उन्हें सुसज्जित वाहनों में रखा गया। शोभायात्रा को राज्यसभा सांसद शिव प्रताप शुक्ल ने झंडी दिखाकर रवाना किया। कहा कि देश के विकास में सिंधि समाज ने अप्रितम योगदान दिया है। नगर निगम के पूर्व उपसभापति मनु जायसवाल ने सिंधी समाज की संस्कृति को सराहा।
शोभायात्रा गोरखनाथ स्थित झूलेलाल मंदिर से शुरू होकर तरंग क्रॉसिंग, कैलाशनगर, जटाशंकर गुरुद्वारा, आर्यनगर, बक्शीपुर, बैंकरोड, विजय चौक, गोलघर होते हुए जलकल बिल्डिंग पर खत्म हुई। वहीं झूलेलाल के पांच रथों का विसर्जन राजघाट में किया गया।
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डांडिया की धुन ने बढ़ाया उत्साह
शोभायात्रा की अगुवाई बैंड की धुन और सिंधियों के अराध्य देव झूलेलाल के पांच रथ कर रहे थे। इसके बाद सिंधियों की ओर प्रस्तुत सांस्कृतिक झलकियां उनके भारतीय समाज से जुड़ाव को दर्शा रही थी। शहर के विभिन्न इलाकाें में बनी नौ झांकियां शोभायात्रा की शोभा में चार चांद लगा रही थीं।
एक तरफ अंध विश्वासी बाबाओं की ओर से फैलाए गए मकड़ जाल का दृश्य था, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीयों की दुर्दशा की झलक। पत्नियों की हुकूमत को दर्शाती झांकी जहां लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला रही थी तो वहीं समाज में बेटियों से रेप आखिर कब तक की झांकी उनके दर्द को बयां कर रही थी। वहीं सर्जिकल स्ट्राइक जहां लोगों में देशभक्ति का संचार कर रही थी तो बाढ़ राहत कोष की झांकी बाढ़ पीड़ितों की मदद की अलख जगा रही थी। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की झांकी घटते लिंगानुपात पर चोट कर रही थी।
शुक्रवार को अराध्य देव झूलेलाल के वार्षिकोत्सव पर सिंधी समाज की ओर से निकाली गई झांकियों में सिंधियों ने अपने हुनर को झांकियों में उतार दिया था। महोत्सव की शुरूआत पल्लव साहब के साथ हुई। झूलेलाल की कुनरी साहब की कलश पूजा झूलेलाल मंदिर में श्रद्धा के साथ लाई गई, जहां 16 अगस्त से चल रहे सिंधियों के नवरात्रि व्रत का समापन हुआ। इसके बाद महानगर विभिन्न स्थानों पर सिंधियों की ओर से स्थापित झूलेलाल की प्रतिमाओं का पूजन अर्चन किया गया और उन्हें सुसज्जित वाहनों में रखा गया। शोभायात्रा को राज्यसभा सांसद शिव प्रताप शुक्ल ने झंडी दिखाकर रवाना किया। कहा कि देश के विकास में सिंधि समाज ने अप्रितम योगदान दिया है। नगर निगम के पूर्व उपसभापति मनु जायसवाल ने सिंधी समाज की संस्कृति को सराहा।
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शोभायात्रा गोरखनाथ स्थित झूलेलाल मंदिर से शुरू होकर तरंग क्रॉसिंग, कैलाशनगर, जटाशंकर गुरुद्वारा, आर्यनगर, बक्शीपुर, बैंकरोड, विजय चौक, गोलघर होते हुए जलकल बिल्डिंग पर खत्म हुई। वहीं झूलेलाल के पांच रथों का विसर्जन राजघाट में किया गया।
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डांडिया की धुन ने बढ़ाया उत्साह
शोभायात्रा की अगुवाई बैंड की धुन और सिंधियों के अराध्य देव झूलेलाल के पांच रथ कर रहे थे। इसके बाद सिंधियों की ओर प्रस्तुत सांस्कृतिक झलकियां उनके भारतीय समाज से जुड़ाव को दर्शा रही थी। शहर के विभिन्न इलाकाें में बनी नौ झांकियां शोभायात्रा की शोभा में चार चांद लगा रही थीं।