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चंद सपाई रोकने थे, रोक दिए गए सैकड़ों फरियादी

Tue, 20 Jun 2017 07:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Tue, 20 Jun 2017 07:59 PM IST
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चंद सपाई रोकने थे, रोक दिए गए सैकड़ों फरियादी
कलेक्ट्रेट गेट पर प्रदर्शन करते सपा कार्यकर्ता। - फोटो : Amar Ujala
चंद सपाइयों को रोकने के लिए मंगलवार को जिला प्रशासन ने पूरे कलेक्ट्रेट की नाकाबंदी कर दी। धरने से दो घंटे पहले ही कलेक्ट्रेट के सभी गेट बंद कर दिए गए। पैदल आने-जाने तक का रास्ता नहीं छोड़ा गया। अंदर पहुंचने के लिए जद्दोजहद कर रहे फरियादियों, वादकारियों की संख्या थोड़ी ही देर में इतनी बढ़ गई कि कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट समेत सभी के बाहर सड़क पर जाम लग गया। यही नहीं, तहसील दिवस में पहुंचने तक के लिए लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। सदर तहसील का कैंपस कलेक्ट्रेट से सटे होने से प्रशासन ने तहसील का भी गेट बंद करा दिया था। जिला प्रशासन की दलील है कि कलेक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन पर रोक है। इसके लिए नगर निगम के लक्ष्मी बाई पार्क में स्थल चिह्नित है। सपा नेता के कहने पर प्रशासन ने उन्हें इससे जुड़े आदेश भी दिखाए।
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अपनी जमीन बचाने के लिए समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव कुंवर प्रताप सिंह ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट स्थित डीएम दफ्तर के सामने धरना देने की घोषणा की थी। इसकी जानकारी उन्होंने डीएम को भी दी थी। एक दिन पहले सोमवार को डीएम ने इस धरने पर रोक लगा दी और मातहतों को निर्देश दिए कि कोई सपाई कैंपस में दाखिल न हो सके। इसी क्रम में एडीएम सिटी और सिटी मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में भारी संख्या में पुलिस मंगलवार की सुबह 10 बजे से ही कलेक्ट्रेट के सभी गेटों पर तैनात रही।
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दाखिल न हो सके तो सड़क पर बैठ गए सपाई

प्रशासन ने जब सपाइयों को कलेक्ट्रेट में नहीं घुसने दिया तो सपा के प्रदेश सचिव कुंवर प्रताप सिंह के नेतृत्व में उनके समर्थक कचहरी चौराहा स्थित कलेक्ट्रेट मुख्य द्वार के बाहर ही धरने पर बैठ गए। इससे दोनों तरफ की सड़क जाम हो गई। करीब घंटे भर की जद्दोजहद के बाद पुलिस किसी तरह उन्हें वहां से हटा पाई। कुंवर प्रताप सिंह का कहना है कि चौरीचौरा के रुद्रपुर में स्थित 55 डिसमिल जमीन को लेकर चल रहे विवाद में एसडीएम चौरीचौरा ने 28 नवंबर 2016 को ही उनके पक्ष में फैसला दिया था, लेकिन कब्जा करने वाला भू-मफिया है। इस कारण उसके दबदबे और प्रशासनिक अफसरों की उदासीनता के कारण साल भर बाद भी जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका।
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