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जिले में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर का ट्रायल शुरू
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Thu, 21 Dec 2017 08:28 PM IST
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अफसरों के साथ बैठक करते डीएम राजीव रौतेला।
- फोटो : Amar Ujala
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जनवरी से शुरू होने जा रही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 का जिले में ट्रायल शुरू कर दिया गया है। तहसील दिवस, समाधान दिवस आईजीआरएस पर आने वाली शिकायतों के जरिए इसका परीक्षण किया जा रहा है। हेल्पलाइन के संचालन के लिए लखनऊ में 500 सीट का काल सेंटर बनाया गया है, जो 24 घंटे काम करेगा।
बृहस्पतिवार को डीएम राजीव रौतेला ने हेल्पलाइन की तैयारियों की समीक्षा के साथ ही प्रशिक्षण के दौरान अफसरों को इस नई सेवा की बारीकियां बताईं। उन्होंने सभी अफसरों को अपने स्मार्ट फोन पर आईजीआरएस एप लागू करने को कहा। समीक्षा एवं प्रशिक्षण के दौरान एडीएम (फाइनेंस) डॉ. चंद्रभूषण त्रिपाठी, एडीएम (प्रशासन) प्रभुनाथ, एडीएम (सिटी) रजनीश चंद्र, सीआरओ बलराम समेत विभिन्न विभागों के 60 अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण जिला सूचना विज्ञान अधिकारी रेखा गाडिया तथा ई डिस्क्ट्रिक्ट मैनेजर नीरज सिंह ने दिया।
अफसरों के चार लेवल बनाए गए
डीएम ने बताया कि शिकायतों के निस्तारण के लिए चार लेवल बनाए गए हैं। लेवल वन में ब्लॉक, तहसील, थाना, सीएचसी, पीएचसी, मंडी समिति, खाद्य, गन्ना, आरईएस, जल निगम, विद्युत, राजस्व, स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा, शिक्षा, समाज कल्याण के अधिकारी-कर्मचारी आएंगे। इसमें उन विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी भी शामिल किए गए हैैं जिनके ब्लॉक, तहसील में कोई अधिकारी नही है। इसी तरह लेवल दो में जिला एवं लेवल तीन में मंडल स्तरीय अधिकारी हाेंगे। लेवल चार में शासन स्तरीय अधिकारी को शामिल किया गया है।
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ऐसे काम करेगा सिस्टम
इस योजना के तहत हेल्पलाइन पर फोन से ही अपनी समस्या दर्ज कराई जा सकेगी। शिकायत के प्रकार का आकलन करने के बाद लखनऊ में बने काल सेंटर से संबंधित लेवल के अफसराें के पास शिकायतें भेज दी जाएंगी। लेवल वन के अधिकारियों को 15 दिन में समस्याओं का निस्तारण करना होगा। यदि लेवल वन पर समस्या का निस्तारण नहीं हो पाता है, तो कॉल सेंटर से उसे विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी को भेजा जाएगा। उन्हें एक सप्ताह में इसका निस्तारण कराना होगा। यदि वे भी इसका निस्तारण नहीं कर पाते हैं तो विभाग के मंडलीय अधिकारी को निस्तारण के लिए भेजा जाएगा। इन्हें तीन दिन में इसका निस्तारण करना होगा।
हेल्पलाइन पर सुझाव भी दे सकेंगे
डीएम ने बताया कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर समस्याएं, सूचना मांग एवं सुझाव लिए जाएंगे। अफसरों के निस्तारण के बाद शासन स्तर से क्रास चेकिंग की जाएगी। शिकायतकर्ता के संतुष्ट होने पर ही मामले का पूरा निस्तारण माना जाएगा अन्यथा संबंधित लेवल के अफसर को दोबारा शिकायत लौटा दी जाएगी। उन्होंने बताया कि किसी न्यायालय में चल रहा मुकदमा, दूसरे राज्य का मामला, शासकीय सेवा संबंधी प्रकरण एवं जन सूचना अधिकार से जुड़ी समस्याएं इस सेवा के तहत नहीं आएंगी।
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बृहस्पतिवार को डीएम राजीव रौतेला ने हेल्पलाइन की तैयारियों की समीक्षा के साथ ही प्रशिक्षण के दौरान अफसरों को इस नई सेवा की बारीकियां बताईं। उन्होंने सभी अफसरों को अपने स्मार्ट फोन पर आईजीआरएस एप लागू करने को कहा। समीक्षा एवं प्रशिक्षण के दौरान एडीएम (फाइनेंस) डॉ. चंद्रभूषण त्रिपाठी, एडीएम (प्रशासन) प्रभुनाथ, एडीएम (सिटी) रजनीश चंद्र, सीआरओ बलराम समेत विभिन्न विभागों के 60 अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण जिला सूचना विज्ञान अधिकारी रेखा गाडिया तथा ई डिस्क्ट्रिक्ट मैनेजर नीरज सिंह ने दिया।
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अफसरों के चार लेवल बनाए गए
डीएम ने बताया कि शिकायतों के निस्तारण के लिए चार लेवल बनाए गए हैं। लेवल वन में ब्लॉक, तहसील, थाना, सीएचसी, पीएचसी, मंडी समिति, खाद्य, गन्ना, आरईएस, जल निगम, विद्युत, राजस्व, स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा, शिक्षा, समाज कल्याण के अधिकारी-कर्मचारी आएंगे। इसमें उन विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी भी शामिल किए गए हैैं जिनके ब्लॉक, तहसील में कोई अधिकारी नही है। इसी तरह लेवल दो में जिला एवं लेवल तीन में मंडल स्तरीय अधिकारी हाेंगे। लेवल चार में शासन स्तरीय अधिकारी को शामिल किया गया है।
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ऐसे काम करेगा सिस्टम
इस योजना के तहत हेल्पलाइन पर फोन से ही अपनी समस्या दर्ज कराई जा सकेगी। शिकायत के प्रकार का आकलन करने के बाद लखनऊ में बने काल सेंटर से संबंधित लेवल के अफसराें के पास शिकायतें भेज दी जाएंगी। लेवल वन के अधिकारियों को 15 दिन में समस्याओं का निस्तारण करना होगा। यदि लेवल वन पर समस्या का निस्तारण नहीं हो पाता है, तो कॉल सेंटर से उसे विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी को भेजा जाएगा। उन्हें एक सप्ताह में इसका निस्तारण कराना होगा। यदि वे भी इसका निस्तारण नहीं कर पाते हैं तो विभाग के मंडलीय अधिकारी को निस्तारण के लिए भेजा जाएगा। इन्हें तीन दिन में इसका निस्तारण करना होगा।
हेल्पलाइन पर सुझाव भी दे सकेंगे
डीएम ने बताया कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर समस्याएं, सूचना मांग एवं सुझाव लिए जाएंगे। अफसरों के निस्तारण के बाद शासन स्तर से क्रास चेकिंग की जाएगी। शिकायतकर्ता के संतुष्ट होने पर ही मामले का पूरा निस्तारण माना जाएगा अन्यथा संबंधित लेवल के अफसर को दोबारा शिकायत लौटा दी जाएगी। उन्होंने बताया कि किसी न्यायालय में चल रहा मुकदमा, दूसरे राज्य का मामला, शासकीय सेवा संबंधी प्रकरण एवं जन सूचना अधिकार से जुड़ी समस्याएं इस सेवा के तहत नहीं आएंगी।