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मछुआरों की बहादुरी को सलाम, जान पर खेलकर बचाई किशोरी की जिंदगी
Wed, 23 Jan 2019 01:34 AM IST
ajay Kumar
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Published by: ajay Kumar
Updated Wed, 23 Jan 2019 01:34 AM IST
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किशोरी की जान बचाने वाले कल्लू और सोनू
- फोटो : amar ujala
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गोरखपुर। दोहरीघाट निवासी मां-बेटी के लिए मुक्तिपथ के सोनू और कल्लू भगवान से कम नहीं हैं। यह हम नहीं कह रहे बल्कि झर-झर बहते आंसू के साथ ये उस भावविह्वल मां के बोल हैं, जिसकी बेटी इन दो साहसी युवाओं की बहादुरी से मौत के मुंह से वापस आई। गैर के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाले इन दो मछुआरों की बहादुरी पूरे दिन इलाके में चर्चा का विषय बनी रही। हुआ यूं कि मऊ के दोहरीघाट की रहने वाली किशोरी मंगलवार को मां की डांट से नाराज होकर जान देने पर आमादा हो गई। आक्रोश में होश खो बैठी नादान किशोरी ने बड़हलगंज-दोहरीघाट पुल से सरयू नदी में छलांग लगा दी। वहां पर मुक्तिपथ निवासी कल्लू और सोनू नाव से मछली मार रहे थे। किशोरी को नदी में कूदते देख बिना देर किए दोनों बीच नदी में जा पहुंचे।
दी में कूदकर दोनों ने मिलकर किशोरी को बाहर निकाला। वहां पर मौजूद लोगों की मदद से पुलिस और किशोरी के घरवालों को इसकी जानकारी दी। बाद में पुलिस ने किशोरी को घरवालों के सुपुर्द कर दिया। अपने कदम से शर्मसार कक्षा नौ की इस छात्रा की आंखों में पश्चाताप के आंसू थे। उसने मां से माफी मांगी, फिर सोनू और कल्लू को धन्यवाद बोलकर घर गई। मां-बेटी के लिए फरिश्ता बने सोनू और कल्लू ने बताया कि तैरना तो आता है लेकिन बीच नदी से किसी को बाहर लाना काफी मुश्किल काम था। लेकिन धैर्य और समझदारी काम आई। किशोरी को नदी की धारा से किनारे तक ला सके।
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दी में कूदकर दोनों ने मिलकर किशोरी को बाहर निकाला। वहां पर मौजूद लोगों की मदद से पुलिस और किशोरी के घरवालों को इसकी जानकारी दी। बाद में पुलिस ने किशोरी को घरवालों के सुपुर्द कर दिया। अपने कदम से शर्मसार कक्षा नौ की इस छात्रा की आंखों में पश्चाताप के आंसू थे। उसने मां से माफी मांगी, फिर सोनू और कल्लू को धन्यवाद बोलकर घर गई। मां-बेटी के लिए फरिश्ता बने सोनू और कल्लू ने बताया कि तैरना तो आता है लेकिन बीच नदी से किसी को बाहर लाना काफी मुश्किल काम था। लेकिन धैर्य और समझदारी काम आई। किशोरी को नदी की धारा से किनारे तक ला सके।
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