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‘धम्म चक्र की प्रासंगिकता सार्वकालिक’
Updated Sat, 26 Aug 2017 12:28 AM IST
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महराजगंज। शुक्रवार को गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ महाविद्यालय में ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ स्मृति व्याख्यान माला के दूसरे दिन मुख्य अतिथि पूर्व प्राचार्य डॉ वेद प्रकाश पांडेय ने कहा कि सुनना एक कला, तपस्या और साधना है। सुनना सार्थक तब होता है जब इंसान उसे आत्मसात कर आनंद महसूस करता है।
वर्तमान समय में धम्म चक्र की प्रासंगिकता विषय पर विशिष्ट अतिथि जवाहरलाल नेहरू पीजी कालेज के प्रवक्ता डॉ. विनोद कुमार कुशवाहा ने कहा कि धम्म चक्र की प्रासंगिकता सार्वकालिक रहेगी। यह सारनाथ स्तंभ से लिया गया है। धम्म चक्र में 24 तीलियों का अपना अर्थ है। जैसे संयम, आरोग्य, शांति, त्याग शील, सेवा, क्षमा, प्रेम, मैत्रीभाव, बंधुत्व, कल्याण, समृद्धि, उद्योग, सुरक्षा, नियम, समता, अर्थ, नीति, न्याय, सहकार्य, कर्तव्य, अधिकार, बुद्धिमत्ता। हमारे संविधान में इन्हीं तीलियों का अर्थ समाहित है। सम्राट अशोक ने भी इन्हीं मार्गों का विस्तार किया। सामाजिक कुरीतियों से बचने के लिए धम्म चक्र की 24 तीलियों के निहितार्थ को आत्मसात करना होगा।
अध्यक्षता प्राचार्य डा. परशुराम गुप्ता ने की। उन्होंने अतिथियों को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया। संचालन शैलेंद्र कुमार ने किया। डा. शिव कुमार ने अतिथियों का आभार जताया। डॉ सरोज रंजन, डॉ रामपाल यादव, डॉ रामपाल यादव, डॉ दीपेंद्र पांडेय, सुनील कुमार, शैलेश भारती, दिलीप कुमार, अंजना गुप्ता, प्रिया दुबे, गीता, गौरव गुप्ता, मनोजनाथ योगी, यशवंत प्रजापति, अजय प्रताप त्रिपाठी, संदीप कुमार समेत तमाम छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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वर्तमान समय में धम्म चक्र की प्रासंगिकता विषय पर विशिष्ट अतिथि जवाहरलाल नेहरू पीजी कालेज के प्रवक्ता डॉ. विनोद कुमार कुशवाहा ने कहा कि धम्म चक्र की प्रासंगिकता सार्वकालिक रहेगी। यह सारनाथ स्तंभ से लिया गया है। धम्म चक्र में 24 तीलियों का अपना अर्थ है। जैसे संयम, आरोग्य, शांति, त्याग शील, सेवा, क्षमा, प्रेम, मैत्रीभाव, बंधुत्व, कल्याण, समृद्धि, उद्योग, सुरक्षा, नियम, समता, अर्थ, नीति, न्याय, सहकार्य, कर्तव्य, अधिकार, बुद्धिमत्ता। हमारे संविधान में इन्हीं तीलियों का अर्थ समाहित है। सम्राट अशोक ने भी इन्हीं मार्गों का विस्तार किया। सामाजिक कुरीतियों से बचने के लिए धम्म चक्र की 24 तीलियों के निहितार्थ को आत्मसात करना होगा।
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अध्यक्षता प्राचार्य डा. परशुराम गुप्ता ने की। उन्होंने अतिथियों को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया। संचालन शैलेंद्र कुमार ने किया। डा. शिव कुमार ने अतिथियों का आभार जताया। डॉ सरोज रंजन, डॉ रामपाल यादव, डॉ रामपाल यादव, डॉ दीपेंद्र पांडेय, सुनील कुमार, शैलेश भारती, दिलीप कुमार, अंजना गुप्ता, प्रिया दुबे, गीता, गौरव गुप्ता, मनोजनाथ योगी, यशवंत प्रजापति, अजय प्रताप त्रिपाठी, संदीप कुमार समेत तमाम छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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