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नारायणी और रोहुआ की तबाही ने छोड़ा बर्बादी का मंजर
Updated Wed, 23 Aug 2017 11:28 PM IST
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सोहगीबरवां। बाढ़ का पानी गांवों से निकल चुका है। नारायणी और रोहुआ अपने वास्तविक रूप में बहने लगी हैं। लेकिन, पीछे जो तबाही का निशान छोड़ा है, वह सालों तक सालता रहेगा। हालांकि राहत व बचाव कार्य जारी है। सरकारी स्तर के साथ ही कई सामाजिक लोग भी इसमें जुटे हैं। बाढ़ के दौरान लोगों को सबसे पहले अपनी व परिवार की जान बचाने की फिक्र थी। अब उनको घर परिवार चलाने की चिंता सताने लगी है। बाढ़ के बाद दूर तक खेतों में गन्ने और धान की पीली पड़ चुकी फसल दिख रही है।
सोहगीबरवा के गौतम का गन्ना बेजान सा हो गया है। कहते हैं कि अब पूरे साल का खर्च कैसे चलेगा, समझ में नहीं आ रहा है। इसी गांव के राजेंद्र प्रसाद की धान की फसल भी बर्बाद हो गई है। घर में जो अनाज था वह बाढ़ की भेंट चढ़ गया। उनके समक्ष भी परिवार को पालने की चिंता है। पिपरासी के प्रभु प्रसाद की झोपड़ी का मलबा दिखाई दिया। उन्होंने बताया कि ज्यादा पानी आने के कारण झोपड़ी बैठ गई। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि विनय सिंह ने बताया कि अभी लेखपाल का सर्वे चल रहा है। शिकारपुर ग्राम का भी यही आलम है। इस बाढ़ में जिन गांव टोला व खेतों को नुकसान हुआ है। उससे उबरने में कितना दिन लगेगा सटीक कहना मुश्किल है। हालांकि इन क्षेत्रों में सरकारी व गैर सरकारी मदद के बढ़ते हाथ ने मरहम लगाने का काम जरूर किया है।
बताते चलें कि बीते दिनों नारायणी नदी और रोहुआ नाले के उफान ने कई परिवारों को सड़क पर ला दिया है। जहां दर्जनों घर बाढ़ की भेंट चढ़ गए। वहीं धान व गन्ने कीखड़ी पचासों एकड़ फसल भी बर्बाद हुई है।
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सभी क्षेत्रों में सर्वेक्षण का कार्य चल रहा है। रिपोर्ट आने के साथ ही जिले से मिले निर्देश के मुताबिक सभी पीड़ितों को मदद मिलेगी। बाढ़ से जो नुकसान हुआ है, प्रशासन की ओर से हर संभव मदद की जाएगी।
विवेकानंद मिश्र, बीडीओ, निचलौल
गांव लेकर कस्बे तक संक्रामक रोगों का खतरा
घुघली। बाढ़ के बाद अब संक्रामक रोगों की चिंता सता रही है। गंडक नदी के समीप बसे गांवों में भारी बारिश से फसलों और मकानों को तो नुकसान पहुंचा ही, सड़कें भी चलने लायक नहीं रह गई हैं। कोटिया, पकड़ियार विशुनपुर का भंगडा टोला, केवटनिया टोला, त्रिमुहानी, कोटवा गांव का मल्लाही टोला, बनहवा टोला, घुघली बुजुर्ग, बिरैचा आदि में संक्रामक रोगों की आशंका प्रबल हो गई है।
यही हाल नगर पंचायत घुघली का है। मुख्य मार्ग व गलियों में चलना मुश्किल है। नगर के प्रत्येक मुहल्लों में बजबजाती नालियां संक्रामक रोगों को दावत दे रही हैं। उपनगर के मुख्य मार्ग पर बरसात का पानी बह रहा है। सड़कों के बगल में बनवाई गई नाली जगह-जगह जाम हो गई है। उसमें दुर्गंध शुरू हो गई है। कस्बे के मोहन जायसवाल, राधेश्याम गुप्त, राजेश जायसवाल, चंदन सिंह, चतुर्भुजा सिंह, संदीप पांडेय, लालबाबू रौनियार आदि ने कहा कि नालियों की सफाई और जलनिकासी के लिए कारगर कदम नहीं उठाया गया तो संक्रामक रोग हो सकता है।
ईओ डॉ. लव कुमार मिश्र ने कहा कि साफ सफाई को लेकर नगर पंचायत प्रशासन सजग है। सफाई कर्मियों की कई टोली लगाकर सफाई कराई जाती है। जलजमाव की समस्या दूर करने का प्रयास जारी है।
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सोहगीबरवा के गौतम का गन्ना बेजान सा हो गया है। कहते हैं कि अब पूरे साल का खर्च कैसे चलेगा, समझ में नहीं आ रहा है। इसी गांव के राजेंद्र प्रसाद की धान की फसल भी बर्बाद हो गई है। घर में जो अनाज था वह बाढ़ की भेंट चढ़ गया। उनके समक्ष भी परिवार को पालने की चिंता है। पिपरासी के प्रभु प्रसाद की झोपड़ी का मलबा दिखाई दिया। उन्होंने बताया कि ज्यादा पानी आने के कारण झोपड़ी बैठ गई। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि विनय सिंह ने बताया कि अभी लेखपाल का सर्वे चल रहा है। शिकारपुर ग्राम का भी यही आलम है। इस बाढ़ में जिन गांव टोला व खेतों को नुकसान हुआ है। उससे उबरने में कितना दिन लगेगा सटीक कहना मुश्किल है। हालांकि इन क्षेत्रों में सरकारी व गैर सरकारी मदद के बढ़ते हाथ ने मरहम लगाने का काम जरूर किया है।
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बताते चलें कि बीते दिनों नारायणी नदी और रोहुआ नाले के उफान ने कई परिवारों को सड़क पर ला दिया है। जहां दर्जनों घर बाढ़ की भेंट चढ़ गए। वहीं धान व गन्ने कीखड़ी पचासों एकड़ फसल भी बर्बाद हुई है।
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सभी क्षेत्रों में सर्वेक्षण का कार्य चल रहा है। रिपोर्ट आने के साथ ही जिले से मिले निर्देश के मुताबिक सभी पीड़ितों को मदद मिलेगी। बाढ़ से जो नुकसान हुआ है, प्रशासन की ओर से हर संभव मदद की जाएगी।
विवेकानंद मिश्र, बीडीओ, निचलौल
गांव लेकर कस्बे तक संक्रामक रोगों का खतरा
घुघली। बाढ़ के बाद अब संक्रामक रोगों की चिंता सता रही है। गंडक नदी के समीप बसे गांवों में भारी बारिश से फसलों और मकानों को तो नुकसान पहुंचा ही, सड़कें भी चलने लायक नहीं रह गई हैं। कोटिया, पकड़ियार विशुनपुर का भंगडा टोला, केवटनिया टोला, त्रिमुहानी, कोटवा गांव का मल्लाही टोला, बनहवा टोला, घुघली बुजुर्ग, बिरैचा आदि में संक्रामक रोगों की आशंका प्रबल हो गई है।
यही हाल नगर पंचायत घुघली का है। मुख्य मार्ग व गलियों में चलना मुश्किल है। नगर के प्रत्येक मुहल्लों में बजबजाती नालियां संक्रामक रोगों को दावत दे रही हैं। उपनगर के मुख्य मार्ग पर बरसात का पानी बह रहा है। सड़कों के बगल में बनवाई गई नाली जगह-जगह जाम हो गई है। उसमें दुर्गंध शुरू हो गई है। कस्बे के मोहन जायसवाल, राधेश्याम गुप्त, राजेश जायसवाल, चंदन सिंह, चतुर्भुजा सिंह, संदीप पांडेय, लालबाबू रौनियार आदि ने कहा कि नालियों की सफाई और जलनिकासी के लिए कारगर कदम नहीं उठाया गया तो संक्रामक रोग हो सकता है।
ईओ डॉ. लव कुमार मिश्र ने कहा कि साफ सफाई को लेकर नगर पंचायत प्रशासन सजग है। सफाई कर्मियों की कई टोली लगाकर सफाई कराई जाती है। जलजमाव की समस्या दूर करने का प्रयास जारी है।