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राप्ती नदी में मिला सिसवां के डॉक्टर का शव
Updated Fri, 14 Jul 2017 12:27 AM IST
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महराजगंज। विगत कई दिनों से लापता सिसवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के जनरल फिजिशियन डॉक्टर आशीष रंजन का शव बृहस्पतिवार को गोरखपुर के राजघाट स्थित राप्ती नदी से निकाला गया। चिकित्सक के मौत की खबर सुनते ही सिसवा सीएचसी व पीएचसी के चिकित्सक व कर्मचारियों में शोक की लहर दौड़ गई।
विगत मंगलवार को इलाज कराने गए सिसवा सीएचसी के जनरल फिजिशियन डॉक्टर आशीष रंजन बिना बताये लापता थे। जिसके बाद परिजनों ने कैंट थाने में बुधवार को गुमशुदगी का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज करने के बाद से ही डॉक्टर की लोकेशन सर्विलांस के आधार पर राजघाट पूल के पास पता चला जिसके बाद से ही तलाश जारी थी। बृहस्पतिवार को राप्ती नदी से डाक्टर आशीष रंजन को मृत हालत में बाहर निकाला। यह खबर जैसे ही सिसवां के चिकित्सक व कर्मचारियों को पता चला पूरे परिसर में शोक की लहर दौड़ पडी। सीएचसी व पीएचसी परिसर में चिकित्सकों ने दो मिनट का मौन रखकर मृत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना किया। इस दौरान सीएचसी प्रभारी डॉक्टर केके झा, पीएचसी प्रभारी डॉक्टर ओमशिव मणि त्रिपाठी, डॉक्टर बालकेश्वर, फार्मासिस्ट उमेश चंद गुप्ता, अवधेश यादव, मुकेश गुप्ता, आयुष चिकित्सक डॉ. मनोज दूबे, डॉ. अतुल रंजन, डॉ. आशुतोष पटेल, डॉ.शिवानंद उपाध्याय, एलटी कमलेश सिंह, रमेश यादव, अविनाश सिंह, पिंटू मौर्या, कीर्ति तिवारी, अंजू राय, माधुरी राय आदि कर्मचारी उपस्थित रहे।
सरल व मृदुभाषी थे डॉक्टर आशीष रंजन
सिसवा बाजार। सिसवा सीएचसी पर तैनात जनरल फिजिशियन डॉक्टर आशीष रंजन अपने सरल व मृदुभाषी स्वभाव की वजह से चिकित्सकों, कर्मचारियों व मरीजों के बीच एक अलग छाप छोड़ गए।
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विगत मई 2014 में महराजगंज के परतावल सीएचसी से सिसवा सीएचसी पर स्थांतरित होकर आए डाक्टर आशीष रंजन को मौजूदा सीएचसी व पीएचसी प्रभारी डॉक्टर सुमित कुमार महराज ने चिकित्सकों की कमी के कारण डाक्टर आशीष को पीएचसी पर ही अटैच कर दिया। ठीक एक वर्ष के अपने कार्यकाल में डाक्टर आशीष रंजन ने पीएचसी पर चिकित्सकों,कर्मचारियों व मरीजों के बीच अपनी एक अलग पहचान बना लिए थे। मरीजों की बिमारी तो इनके सरल व मधुर स्वभाव से ही संतुष्ट होकर ही कुछ ठीक हो जाती थी। लेकिन शासनादेश के बाद जून 2015 में इनका अटैचमेंट कैंसिल कर एक बार पुन: इन्हें सीएचसी सिसवा पर तैनात कर दिया गया। तबसे इन्होंने सीएचसी पर अपनी एक अलग ख्याति स्थापित कर ली थी। लेकिन बृहस्पतिवार की देर शाम डॉक्टर आशीष रंजन के मौत की खबर आते ही पूरा हॉस्पिटल परिसर व नगर के लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। जिसे लोग हमेशा अपने जेहन में जिंदा रखेंगे।
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विगत मंगलवार को इलाज कराने गए सिसवा सीएचसी के जनरल फिजिशियन डॉक्टर आशीष रंजन बिना बताये लापता थे। जिसके बाद परिजनों ने कैंट थाने में बुधवार को गुमशुदगी का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज करने के बाद से ही डॉक्टर की लोकेशन सर्विलांस के आधार पर राजघाट पूल के पास पता चला जिसके बाद से ही तलाश जारी थी। बृहस्पतिवार को राप्ती नदी से डाक्टर आशीष रंजन को मृत हालत में बाहर निकाला। यह खबर जैसे ही सिसवां के चिकित्सक व कर्मचारियों को पता चला पूरे परिसर में शोक की लहर दौड़ पडी। सीएचसी व पीएचसी परिसर में चिकित्सकों ने दो मिनट का मौन रखकर मृत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना किया। इस दौरान सीएचसी प्रभारी डॉक्टर केके झा, पीएचसी प्रभारी डॉक्टर ओमशिव मणि त्रिपाठी, डॉक्टर बालकेश्वर, फार्मासिस्ट उमेश चंद गुप्ता, अवधेश यादव, मुकेश गुप्ता, आयुष चिकित्सक डॉ. मनोज दूबे, डॉ. अतुल रंजन, डॉ. आशुतोष पटेल, डॉ.शिवानंद उपाध्याय, एलटी कमलेश सिंह, रमेश यादव, अविनाश सिंह, पिंटू मौर्या, कीर्ति तिवारी, अंजू राय, माधुरी राय आदि कर्मचारी उपस्थित रहे।
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सरल व मृदुभाषी थे डॉक्टर आशीष रंजन
सिसवा बाजार। सिसवा सीएचसी पर तैनात जनरल फिजिशियन डॉक्टर आशीष रंजन अपने सरल व मृदुभाषी स्वभाव की वजह से चिकित्सकों, कर्मचारियों व मरीजों के बीच एक अलग छाप छोड़ गए।
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विगत मई 2014 में महराजगंज के परतावल सीएचसी से सिसवा सीएचसी पर स्थांतरित होकर आए डाक्टर आशीष रंजन को मौजूदा सीएचसी व पीएचसी प्रभारी डॉक्टर सुमित कुमार महराज ने चिकित्सकों की कमी के कारण डाक्टर आशीष को पीएचसी पर ही अटैच कर दिया। ठीक एक वर्ष के अपने कार्यकाल में डाक्टर आशीष रंजन ने पीएचसी पर चिकित्सकों,कर्मचारियों व मरीजों के बीच अपनी एक अलग पहचान बना लिए थे। मरीजों की बिमारी तो इनके सरल व मधुर स्वभाव से ही संतुष्ट होकर ही कुछ ठीक हो जाती थी। लेकिन शासनादेश के बाद जून 2015 में इनका अटैचमेंट कैंसिल कर एक बार पुन: इन्हें सीएचसी सिसवा पर तैनात कर दिया गया। तबसे इन्होंने सीएचसी पर अपनी एक अलग ख्याति स्थापित कर ली थी। लेकिन बृहस्पतिवार की देर शाम डॉक्टर आशीष रंजन के मौत की खबर आते ही पूरा हॉस्पिटल परिसर व नगर के लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। जिसे लोग हमेशा अपने जेहन में जिंदा रखेंगे।