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दांपत्य जीवन को खुशियों की सौगात देगा करवा चौथ
Updated Sun, 08 Oct 2017 01:39 AM IST
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गोरखपुर। सुहागिनें अखंड सौभाग्य के लिए कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवाचौथ व्रत रखती हैं। रविवार को पड़ रहा यह व्रत इस बार कई शुभ योग लेकर आ रहा है। ज्योतिषी बता रहे हैं कि शुभ योगों वाला यह करवाचौथ दाम्पत्य जीवन को खुशियों से भरने वाला साबित होगा।
7:51 पर होगा चंद्रोदय
ज्योतिषाचार्य पंडित शरद चंद्र मिश्र और अखिल भारतीय विद्वत महासभा के पंडित बृजेश पांडेय ने बताया कि रविवार को सूर्योदय 6:11 बजे और तृतीया तिथि सायं 7:25 बजे तक है। इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो रही है। चंद्रोदय रात्रि 7:51 बजे है। चंद्रोदय के समय चतुर्थी होने से रविवार को ही करवाचौथ व्रत रखना मान्य है। इस व्रत के लिए तृतीया युक्त चतुर्थी ही को श्रेयस्कर माना जाता है, क्योंकि तृतीया की स्वामिनी भगवती गौरी और चतुर्थी के अधिपति भगवान गणेश हैं। विवाहित स्त्रियां इस दिन पति की दीर्घायु एवं स्वास्थ्य की मंगलकामना कर भगवान रजनीश (चंद्रमा) को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण करती हैं।
मालव्य योग बना रहा त्योहार को खास
पंडित नरेंद्र उपाध्याय बताते हैं कि ग्रहों की विवेचना के अनुसार इस बार कालपुरुष की कुंडली में सप्तम भाव में गुरु विराजमान है। गुरु की यह स्थिति मालव्य योग का निर्माण कर रही है। ऐसा होना जीवनसाथी के लिए वरदान सा है। करीब एक दशक बाद ऐसा संयोग बनता है। शुक्र के घर में गुरु का होना जीवनसाथी के लिए शुभ प्रभाव देने वाला है। इससे निश्चित ही करवाचौथ व्रत दांपत्य जीवन में चली आ रही परेशानियाें को दूर करने वाला साबित होगा।
7:51 पर होगा चंद्रोदय
ज्योतिषाचार्य पंडित शरद चंद्र मिश्र और अखिल भारतीय विद्वत महासभा के पंडित बृजेश पांडेय ने बताया कि रविवार को सूर्योदय 6:11 बजे और तृतीया तिथि सायं 7:25 बजे तक है। इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो रही है। चंद्रोदय रात्रि 7:51 बजे है। चंद्रोदय के समय चतुर्थी होने से रविवार को ही करवाचौथ व्रत रखना मान्य है। इस व्रत के लिए तृतीया युक्त चतुर्थी ही को श्रेयस्कर माना जाता है, क्योंकि तृतीया की स्वामिनी भगवती गौरी और चतुर्थी के अधिपति भगवान गणेश हैं। विवाहित स्त्रियां इस दिन पति की दीर्घायु एवं स्वास्थ्य की मंगलकामना कर भगवान रजनीश (चंद्रमा) को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण करती हैं।
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मालव्य योग बना रहा त्योहार को खास
पंडित नरेंद्र उपाध्याय बताते हैं कि ग्रहों की विवेचना के अनुसार इस बार कालपुरुष की कुंडली में सप्तम भाव में गुरु विराजमान है। गुरु की यह स्थिति मालव्य योग का निर्माण कर रही है। ऐसा होना जीवनसाथी के लिए वरदान सा है। करीब एक दशक बाद ऐसा संयोग बनता है। शुक्र के घर में गुरु का होना जीवनसाथी के लिए शुभ प्रभाव देने वाला है। इससे निश्चित ही करवाचौथ व्रत दांपत्य जीवन में चली आ रही परेशानियाें को दूर करने वाला साबित होगा।
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