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हाईकोर्ट के रुख से गीडा को चुनौती

Sat, 05 Aug 2017 01:32 AM IST
Updated Sat, 05 Aug 2017 01:32 AM IST
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हाईकोर्ट के रुख से गीडा को चुनौती

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गोरखपुर।
हाईकोर्ट के रुख ने गीडा की चुनौती बढ़ा दी है। लैंड बैंक की समस्या झेल रहे गीडा के सामने अब अधिग्रहण के बाद आवंटित प्लॉटों की रकम आवंटियों को लौटानी होगी। इसके तहत कोर्ट ने गीडा को मेसर्स जालान जी पॉलीटेक्स्ट प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित प्लाट की कीमत 8 करोड़ के अलावा स्टांप ड्यूटी के रूप में ली गई करीब 45 लाख रुपये भी देने का आदेश दिया है।
पिपरा और तेनुहारी की जमीन का अधिग्रहण निरस्त होने के बाद अब गीडा के सामने उन प्लॉटों का भी आवंटन निरस्त करना होगा, जिसकी उन्होंने आवंटन राशि भी ले ली है। दरअसल अधिग्रहण के बाद गीडा ने प्लॉटों का आवंटन कर दिया था, लेकिन आवंटियों को इनका पजेशन नहीं दिया सका था। इसी के विरोध में मेसर्स जालान जी पॉलीटेक्स्ट प्राइवेट लिमिटेड कोर्ट चला गया था। मामले में अंबे फाइबर की ओर से कभी कोर्ट में कोई उपस्थित नहीं हुआ। वहीं किसानों की ओर से पक्ष रखने वाले वकील रणजीत यादव ने बताया कि कोर्ट ने सुनवाई के दौरान गीडा को मेसर्स जालान जी पॉलीटेक्स्ट प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित प्लॉटों के लिए ली गई रकम आठ करोड़ के अलावा स्टांप ड्यूटी के रूप में ली गई रकम वापस करने का आदेश दिया है। इससे अधिग्रहण निरस्त होने के बाद पिपरा और तेनुहारी की अधिग्रहण की गई सभी जमीन किसानों को वापस हो जाएगी, लिहाजा गीडा ने जिन प्लॉटों का आवंटन किया है, वह भी निरस्त हो गई है। गीडा के संपत्ति प्रबंधक एके सिंह ने बताया कि जालान और अंबे फाइबर के अलावा 50 और उद्यमियों को प्लाटों का आवंटन किया गया है।
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100 गुना तक बढ़ गई है जमीन की कीमत
22 मई 2006 को धारा-4 के तहत जमीन के अधिग्रहण की अधिसूचना जारी हुई थी। तीन जुलाई 2008 को राज्यपाल की अधिसूचना से अधिग्रहण का निर्णय हुआ। इस दौरान एसएलओ रामविलास थे। इस दौरान मुआवजे के रूप में जमीन की जो कीमत तय की गई थी। आज की तारीख में उसकी कीमत में करीब 100 गुना बढ़ोतरी हो गई है। दरअसल यह जमीन नेशनल हाइवे के किनारे सहजनवां से आईजीएल फैक्ट्री तक है। गांव के किसानों का कहना है कि इन दिनों पिपरा में जमीन की कीमत 4 लाख रुपये प्रति डिस्मिल और तेनुहारी में तीन लाख रुपये प्रति डिस्मिल है। ऐसे में गीडा को इस जमीन के लिए काफी ज्यादा रकम चुकानी पड़ सकती है।
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अब सरकार को किसानों के साथ बैठकर जमीन की दर तय करनी होगी
एडवोकेट रणजीत यादव ने कहा कि भू-अधिग्रहण कानून 2013 के अनुसार अब किसानों की जमीन के फिर से अधिग्रहण के लिए सरकार को किसानों से वार्ता करनी होगी। नए भू-अधिग्रहण कानून के अनुसार अब किसानों को जमीन की कीमत बाजार भाव के दुगुनी देनी होगी। साथ ही अधिग्रहण की गई जमीन का 10 प्रतिशत विकसित करके किसानों को देनी होगी। साथ ही सरकार को किसानों से जमीन रजिस्ट्री करानी होगी।


1068 में से 262 किसानों ने नहीं लिया मुआवजा
पिपरा और तेनुहारी गांव के 1068 किसानों की 270.35 एकड़ (110.239) भूमि अधिग्रहित की गई थी। इसमें पिपरा के 426 किसानों में से सिर्फ 150 ने मुआवजा लिया और तेनुहारी गांव के 652 किसानों में से मात्र 112 ने। इस दौरान पिपरा में 3,76,384.13 रुपये प्रति एकड़ और तेनुहारी में 2,93,183.43 रुपये की दर से मुआवजा दिया गया था।

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