फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Five children orphaned after death of family members

चार महिने में हो गया पूरा परिवार खत्म, पांच बच्चे हुए बेसहारा, जानिए क्या है मामला

Mon, 25 Nov 2019 10:48 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो परमात्मा यादव, रोसया
परमात्मा यादव, रोसया Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Mon, 25 Nov 2019 10:48 PM IST
विज्ञापन
Five children orphaned after death of family members
विकास खंड हैंसर के भगोड़ा गांव के अनाथ बच्चे। - फोटो : KHALILABAD

विकास खंड पौली के बघौड़ा गांव में पांच मासूम भाई-बहन बेसहारा हो गए। मासूमों की देखरेख करने वाली घर में बची इकलौती बूढ़ी दादी भी 22 नवंबर को दुनिया छोड़ गईं। चार महीने के भीतर मां-बाप के साथ ही दादा-दादी की बीमारी से मौत हो गई। अनाथ हुए भाई-बहनों की जिंदगी अब कौन संवारेगा, यह सोच कर गांव के लोग भी परेशान हैं। वहीं, मासूमों की डबडबाती आंखें अपनों के खोने का गम बयां कर रही थीं।

विज्ञापन


पौली ब्लॉक के गौरपार गांव के बघौड़ा पुरवे की दलित बस्ती के निवासी कन्हैया पुत्र नागेंद्र के घर चार माह पूर्व सब कुछ ठीकठाक था। जुलाई में अचानक उनकी पत्नी गायत्री बीमार पड़ी और कुछ ही दिनों में उनकी मौत हो गई। पत्नी की मौत और खुद कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का दंश झेल रहे 37 वर्षीय कन्हैया भी अधिक दिनों तक बीमारी को झेल नहीं सके और अगस्त में उनकी भी मौत हो गई। कन्हैया के पांच बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी बूढ़े दादा नागेंद्र और दादी लालमती के कंधों पर आ गई। बच्चे अपने मां-बाप की मौत के गम से उबर नहीं पाए थे कि सितंबर में 60 वर्षीय दादा नागेंद्र की भी मौत हो गई। उसके बाद बच्चों की देखरेख बूढ़ी दादी लालमती कर रही थीं।
विज्ञापन


पौत्री कुमकुम 11 वर्ष, पौत्र विजय नौ वर्ष, पौत्री रूमा सात वर्ष, पौत्र दुर्गविजय चार वर्ष और पौत्री नेहा दो वर्ष की दादी ही सहारा थीं। 22 नवंबर को दादी लालमती की भी मौत हो गई। दादी की मौत के बाद बेसहारा हुए बच्चों की देखभाल करने वाला परिवार में कोई नहीं बचा। चार माह के भीतर परिवार के चार सदस्यों की मौत से बच्चे इस कदर सदमे में हैं कि वह कुछ भी बोलने में अपने को असमर्थ पा रहे हैं। गुमसुम होकर पूरे दिन दरवाजे पर बैठे हुए बच्चे घर आने-जाने वालों को बहुत ही उम्मीद से देखते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


चार माह के अंदर एक के बाद एक हुई मौतों की वजह गांववाले बीमारी बता रहे हैं। गरीबी की वजह से ठीक से उपचार नहीं हो पाना भी कारण रहा है। गांववालों का कहना है कि कन्हैया की बीमारी में इलाज के लिए जो थोड़ा खेत था वह भी गिरवी हो गया था। कोटे की दुकान से मिलने वाले अनाज से परिवार का पेट भरता था। अब इन मासूम बच्चों का कौन सहारा बनेगा, यह सवाल खड़ा हो गया है। गांववालों ने मासूमों की प्रशासन से मदद दिए जाने की मांग की। एसडीएम प्रमोद कुमार ने बताया कि इस संबंध में उन्हें अभी तक कोई जानकारी नहीं थी। मामले का पता कराएंगे और बच्चों की हर संभव मदद भी करेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed