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नोज और एप्रन धंसा, बंधे को खतरा
Updated Wed, 09 Aug 2017 11:39 PM IST
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कुशीनगर। गंडक नदी में वाल्मीकि बैराज से पानी का डिस्चार्ज बुधवार की शाम घट गया, लेकिन जलस्तर कम होते ही नदी पहले से ज्यादा खतरनाक हो गई। किनारों पर तेज कटान के चलते वीरभार ठोकर का नोज व एप्रन धंस गया है। खड्डा रेता क्षेत्र के गांवों में अभी भी बाढ़ का पानी भरा हुआ है। गांव के लोग संक्रामक बीमारी की आशंका से सहमे हुए हैं। देर शाम बाढ़ खंड के अफसरों ने वीरभार ठोकर का निरीक्षण किया।
गंडक नदी के जलस्तर में तेजी से उतार चढ़ाव हो रहा है। सोमवार और मंगलवार को नदी में पानी का डिस्चार्ज डेढ़ लाख क्यूसेक था जो बुधवार को घटकर 1.31 लाख क्यूसेक हो गया। पानी कम होते ही बुधवार की शाम को छितौनी बांध के वीरभार ठोकर पर एप्रन व नोज धंस गया। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता बीपी सिंह के अनुसार एप्रन एक तरफ 15 मीटर व एक तरफ 10 मीटर धंसा है। नोज का कुछ हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया है। एशिया के सबसे ऊंचा ठोकर वीरभार का नोच व एप्रन धंसने की जानकारी होने पर बाढ़ खंड के अफसरों ने देर शाम मौका मुआयना किया और तत्काल बचाव कार्य शुरू करने का निर्देश दिया। तमकुहीराज क्षेत्र के एपी तटबंध पर भी बाकखास समेत कई जगह बंधे पर नदी का दबाव बना हुआ है।
दूसरी तरफ जलस्तर घटने से भी खड्डा रेता क्षेत्र के लोगों को राहत नहीं मिली। मरचहवा, बकुलादह, शिवपुर आदि गांवों के चारों तरफ बाढ़ का पानी एकत्र है। गांव के भीतर से बाढ़ का पानी निकलने के बाद कीचड़ से लोग परेशान हैं। हैंडपंप भी दूषित पानी दे रहे हैं। जलीय जीव जंतुओं और सांपों की संख्या बढ़ने से लोग सहमे हुए हैं।
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गंडक नदी के जलस्तर में तेजी से उतार चढ़ाव हो रहा है। सोमवार और मंगलवार को नदी में पानी का डिस्चार्ज डेढ़ लाख क्यूसेक था जो बुधवार को घटकर 1.31 लाख क्यूसेक हो गया। पानी कम होते ही बुधवार की शाम को छितौनी बांध के वीरभार ठोकर पर एप्रन व नोज धंस गया। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता बीपी सिंह के अनुसार एप्रन एक तरफ 15 मीटर व एक तरफ 10 मीटर धंसा है। नोज का कुछ हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया है। एशिया के सबसे ऊंचा ठोकर वीरभार का नोच व एप्रन धंसने की जानकारी होने पर बाढ़ खंड के अफसरों ने देर शाम मौका मुआयना किया और तत्काल बचाव कार्य शुरू करने का निर्देश दिया। तमकुहीराज क्षेत्र के एपी तटबंध पर भी बाकखास समेत कई जगह बंधे पर नदी का दबाव बना हुआ है।
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दूसरी तरफ जलस्तर घटने से भी खड्डा रेता क्षेत्र के लोगों को राहत नहीं मिली। मरचहवा, बकुलादह, शिवपुर आदि गांवों के चारों तरफ बाढ़ का पानी एकत्र है। गांव के भीतर से बाढ़ का पानी निकलने के बाद कीचड़ से लोग परेशान हैं। हैंडपंप भी दूषित पानी दे रहे हैं। जलीय जीव जंतुओं और सांपों की संख्या बढ़ने से लोग सहमे हुए हैं।
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