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रास्ता पुराना मगर संकल्प नए
Updated Sat, 06 Jan 2018 10:53 PM IST
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दिल्ली/देवरिया। देशभर के नौजवानों में स्वरोजगार का अलख जगाने निकली युवाओं की टीम को शुक्रवार को न सिर्फ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की ओर से प्रशस्ति मिली, बल्कि सीख भी मिली। राष्ट्रपति भवन देखने के क्रम में समय प्रबंधन (टाइम मैनेजमेंट) की अहमियत को खुद पर आयद करने का अवसर मिला तो राष्ट्रपति के संदेश में लक्ष्य आधारित नसीहत भी थी।
जागृति यात्रा का हिस्सा बने युवक-युवतियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने यात्रा की थीम और इसमें योगदान दे रही टीम की सराहना की। साथ ही कहा कि यात्रा को खास दायरे तक सीमित न करें। देश के विकास के लिए और भी कई विषय हैं, जिन्हें शामिल कर यात्रा को आंदोलन की शक्ल दें। ठीक वैसे, जैसे महात्मा गांधी ने अंग्रेजों से देश को आजादी दिलाने के लिए रेल यात्रा से शुरुआत कर आंदोलन का माहौल बना दिया था। अपेक्षा जताई कि यात्रा के अगले संस्करण (11वीं यात्रा) से पहले पांच युवाओं को उद्यमशीलता के रास्ते पर लाएं। राष्ट्रपति के इस आह्वान को युवाओं की टीम ने संकल्प के तौर पर लिया।
राष्ट्रपति की मौजूदगी में नए संकल्प लेकर जागृति यात्रा की विशेष ट्रेन आगे रवाना हो गई। पारंपरिक रास्ते पर बढ़ रही जागृति यात्रा के अगले दो पड़ाव तिलोनिया और अहमदाबाद में हैं। नौजवानों की इस यात्रा में अमर उजाला मीडिया पार्टनर की भूमिका में है।
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शशांक ने गिनाए पांच संकल्प
राष्ट्रपति भवन के कार्यक्रम में जागृति सेवा संस्थान के अध्यक्ष शशांक मणि त्रिपाठी ने जागृति यात्रा के हर साथी को युवाओं के साथ-साथ महिलाओं को देश निर्माण के लिए प्रेरित करने का संकल्प दिलाया। बताया कि 24 दिसंबर को उद्यमिता को बढ़ावा देने के संकल्प से शुरू हुई यात्रा के बीच देश के छोटे शहरों व गांव से लगाव का संकल्प लिया जा चुका है। मुंबई में यात्रा को विराम से पूर्व साबरमती में राष्ट्र निर्माण में हर देशवासी की हिस्सेदारी का माहौल बनाने का संकल्प लिया जाएगा।
बदला जहान, तो दूर हुई थकान
जागृति यात्रा के दसवें वर्ष में जहां तमाम नए युवाओं का उद्यमशीलता से जुड़ाव हुआ, वहीं राष्ट्रपति भवन घूमने का नया अनुभव भी उनके जीवन का हिस्सा बना। राष्ट्रपति के संबोधन से पहले राष्ट्रपति भवन के शिल्प और इतिहास को करीब से देखने और समझने का जो अवसर मिला उसने आठ हजार किलोमीटर के सफर पर निकले युवाओं की अब तक की यात्रा की थकान दूर करा दी।
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जागृति यात्रा का हिस्सा बने युवक-युवतियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने यात्रा की थीम और इसमें योगदान दे रही टीम की सराहना की। साथ ही कहा कि यात्रा को खास दायरे तक सीमित न करें। देश के विकास के लिए और भी कई विषय हैं, जिन्हें शामिल कर यात्रा को आंदोलन की शक्ल दें। ठीक वैसे, जैसे महात्मा गांधी ने अंग्रेजों से देश को आजादी दिलाने के लिए रेल यात्रा से शुरुआत कर आंदोलन का माहौल बना दिया था। अपेक्षा जताई कि यात्रा के अगले संस्करण (11वीं यात्रा) से पहले पांच युवाओं को उद्यमशीलता के रास्ते पर लाएं। राष्ट्रपति के इस आह्वान को युवाओं की टीम ने संकल्प के तौर पर लिया।
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राष्ट्रपति की मौजूदगी में नए संकल्प लेकर जागृति यात्रा की विशेष ट्रेन आगे रवाना हो गई। पारंपरिक रास्ते पर बढ़ रही जागृति यात्रा के अगले दो पड़ाव तिलोनिया और अहमदाबाद में हैं। नौजवानों की इस यात्रा में अमर उजाला मीडिया पार्टनर की भूमिका में है।
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शशांक ने गिनाए पांच संकल्प
राष्ट्रपति भवन के कार्यक्रम में जागृति सेवा संस्थान के अध्यक्ष शशांक मणि त्रिपाठी ने जागृति यात्रा के हर साथी को युवाओं के साथ-साथ महिलाओं को देश निर्माण के लिए प्रेरित करने का संकल्प दिलाया। बताया कि 24 दिसंबर को उद्यमिता को बढ़ावा देने के संकल्प से शुरू हुई यात्रा के बीच देश के छोटे शहरों व गांव से लगाव का संकल्प लिया जा चुका है। मुंबई में यात्रा को विराम से पूर्व साबरमती में राष्ट्र निर्माण में हर देशवासी की हिस्सेदारी का माहौल बनाने का संकल्प लिया जाएगा।
बदला जहान, तो दूर हुई थकान
जागृति यात्रा के दसवें वर्ष में जहां तमाम नए युवाओं का उद्यमशीलता से जुड़ाव हुआ, वहीं राष्ट्रपति भवन घूमने का नया अनुभव भी उनके जीवन का हिस्सा बना। राष्ट्रपति के संबोधन से पहले राष्ट्रपति भवन के शिल्प और इतिहास को करीब से देखने और समझने का जो अवसर मिला उसने आठ हजार किलोमीटर के सफर पर निकले युवाओं की अब तक की यात्रा की थकान दूर करा दी।