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बीमार अस्पतालों को खुद दवा की दरकार
Updated Sat, 05 Aug 2017 01:32 AM IST
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गोरखपुर। सरकार की ओर से एक रुपये में बेहतर इलाज का वादा सीएम के जिले में छलावा बनकर रह गया है। ‘बीमार’ अस्पतालाें को खुद ‘दवा’ की दरकार है। अस्पतालों का यह रोग डॉक्टरों और जिम्मेदारों की लापरवाही से बिगड़ता ही जा रहा है। कहीं डॉक्टर का इंतजार करके घंटों बाद मरीजों को निराश लौटना पड़ रहा है तो किसी को एक रुपये के बदले एक गोली थमाकर आधा दर्जन दवाएं बाहर से खरीदने के लिए भेज दिया जा रहा है। ‘अमर उजाला’ टीम ने जिले के कुछ प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल देखा तो ‘बीमार’ अस्पतालों की ऐसी ही असलियत सामने आई। हद तो तब रही जब सत्ता पक्ष के विधायक संत प्रसाद को भी स्वास्थ्य की जांच के दौरान इन अव्यवस्थाओं से रूबरू होना पड़ा। हरनहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बाहर से लिखी जा रहीं दवाओं पर उन्होंने कहा कि जो दवाएं सरकार की ओर से मिली हैं, उन्हें ही मरीजों को लिखें। आगे शिकायत मिलेगी तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मर्ज कुछ भी हो मिलेगी सिर्फ बुखार और दर्द की दवा
हर दूसरे मरीज को दूसरी पर्ची पर लिखी जा रही थीं बाहरी दवाएं
खोराबार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दोपहर एक बजे। रामपुर निवासी 73 वर्षीय काशीनाथ को लेकर पोता इलाज कराने आया था। डॉक्टर को दिखाने वो पंजीकरण पर्ची लेकर गया, लेकिन उधर से लौटते वक्त दो पर्चियां हाथ में थीं। पंजीकरण पर्ची पर दो तो वहीं दूसरी पर्ची पर आधा दर्जन दवाएं लिखी थीं। पूछने पर बताया कि ये दवाएं डॉॅक्टर ने बाहर से खरीदने को कही हैं। जंगल सिकरी की गीता को देखने के बाद डॉक्टर ने इसी तरह से दवाएं लिखी थीं। हाथ में कीड़ी की एक गोली लेकर वह निराश अंदाज में बाहर जा रही थीं। बताया कि मजबूरी में दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ेंगी। अब आज तो रुपये नहीं हैं कल जुगाड़ करूंगी तो दवा आएगी। ये सिर्फ दो मरीजों की आपबीती नहीं थी बल्कि हर दूसरे मरीज के साथ ऐसा ही हो रहा था। बगल में पैथोलॉजी रूम बंद था। दर्जन भर मरीज बाहर पैथोलॉजिस्ट का इंतजार कर रहे थे। कुछ की जांच हो चुकी थी तो कुछ को अभी जांच करानी थी। मोतीराम अड्डा से आई शांति देवी अपने 15 साल के बेटे विवेक की जांच कराने के लिए 12 बजे से दोपहर पौने दो बजे तक इंतजार ही करती रहीं। जंगल सिकरी की निशा, पुछिया की गिरजा आदि रिपोर्ट के इंतजार में दो घंटे से बैठी थीं। जेई एईएस वार्ड के बाहर फर्श पर पानी जमा था। वहीं बगल में गंदगी का ढेर लगा था। अस्पताल प्रभारी डॉ. जीतेंद्र पाल ने बताया कि दवाओं का संकट है। पेट के मर्ज की दवा अस्पताल में नहीं है। ऐसी कई जरूरी दवाएं स्टाक में नहीं होने से दिक्कत हो रही है।
एईएस की चपेट में आए मासूमों के लिए नहीं है सिरप
एईएस मरीजों के इलाज के लिए एरिस्थ्रोमाइसिन की गोलियां तो थीं लेकिन मासूमों को देने के लिए इसका सिरप अस्पताल में नहीं था। पिछले दिनों चार हजार गोलियां यहां भेजी गई थीं। इनमें अब 1800 गोलियां ही स्टाक में बची थीं।
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सर्पदंश के मामलों में अधिकतर रेफर
बरसात के मौसम में अगर तीन मरीज सर्पदंश के यहां आ जाएं तो उनका इलाज मुमकिन नहीं है। सिर्फ 10 एंटी स्नेक वेनम स्टाक में है। सांप के जहर की तीव्रता देखकर कई बार एक मरीज को आधा दर्जन तक एएसवी लग जाती हैं। यह तथ्य रखते हुए जब प्रभारी से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि जब मरीज की हालत खराब लगती है तो उसे रेफर कर देते हैं।
एंटी रैबीज वैक्सीन बेहद कम
अस्पताल के ड्रग स्टोर में सिर्फ 15 एआरवी (एंटी रैबीज वैक्सीन) बची है। ऐसे में कुछ दिन तक अगर नया स्टाक नहीं आया तो कुत्ता काटने के मरीज भी यहां से वापस किए जाने लगेंगे।
दो बजे ही बंद हो जाते हैं कई अस्पताल
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जंगल धूसड़ पर दोपहर 2:18 बजे बंद मिला। हैदरगंज टोला की कैलाश देवी इलाज कराने पहुंचीं तो ताला बंद देख कर लौट गईं। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. वीके चौधरी ने बताया की दो बजे तक ही स्वास्थ्य केंद्र खुलने का समय है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरनहीं भी इसी तरह दो बजे ही बंद हो जाता है। इसके चलते इलाके के मरीजों को दो बजे के बाद स्वास्थ्य समस्या होने पर शहर आना पड़ता है।
चिकित्सक की तैनाती नहीं
अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पीपीगंज तीन कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है। दो वर्ष पूर्व अस्पताल का शुभारंभ हुआ लेकिन अभी तक स्थाई चिकित्सक की तैनाती न होने से मरीजों को दिक्कत झेलनी पड़ रही है। शिवपुर सहबाजगंज नवीन अरबन हेल्थ पोस्ट को नर्स और फार्मासिस्ट चलाते हैं। यहां किसी चिकित्सक की तैनाती नहीं है। इसके चलते अन्य कर्मचारी भी पूरी मनमानी के साथ ड्यूटी करते हैं।
मलेरिया और डेंगू दे सकता है अस्पताल
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जंगल कौड़िया परिसर में मौजूद झाड़-झंखाड़ यहां पहुंचने वालों का मन खिन्न कर देता है। गंदगी के चलते यहां मच्छरों की भरमार है। दिन के उजाले में भी मच्छर भनभनाते रहते हैं। अस्पताल का हाल मच्छरजनित बीमारियों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की संजीदगी की पोल खोलता है। खोराबार सीएचसी परिसर में बने शौचालय की छत पर खुली पानी की टंकी और उसके ढक्कन में पानी भरा मिला।
रात में आवास पर नहीं रुकते डॉक्टर
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरनहीं, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मिश्रौलिया में डॉक्टर रात में रुकना मुनासिब नहीं समझते। ऐसे में गंभीर मरीजों को रात के वक्त दिक्कत होने पर शहर की राह पकड़नी पड़ती है। इन अस्पतालों में साफ-सफाई की हालत भी बद से बदतर है। आलम यह है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिश्रौलिया में चार बेड होने के बाद भी महीनों से कोई गर्भवती प्रसव के लिए नहीं लाई गई।
अनुपस्थित डॉक्टरों का वेतन रोका
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कैंपियरगंज पर डॉ. सुरभि श्रीवास्तव दो बजे से पहले ही अस्पताल से चली गईं। दूसरी महिला चिकित्सक डॉ. कुमुद सिंह अस्पताल आई ही नहीं। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. भगवान ने बताया कि सुरभि श्रीवास्तव का वेतन रोक दिया गया है। दूसरी ओर सीएचसी बरही के निरीक्षण में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने यहां तैनात दो डॉक्टरों को अनुपस्थित पाया। इस पर डॉ. एसके मिश्र का एक दिन का वेतन रोका गया और लंबे समय से अनुपस्थित चल रहे डॉ. अमरेंद्र की बाबत शासन को रिपोर्ट भेजने की तैयारी है।
कोट-
स्वास्थ्य विभाग की टीम सीएचसी और पीएचसी का नियमित निरीक्षण कर व्यवस्था जांच रही है। जहां कमियां मिल रही हैं उन्हें दूर कराया जा रहा है। इसके साथ ही संबंधित लोगों से जवाब-तलब करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
- डॉ. रवींद्र कुमार, सीएमओ
मर्ज कुछ भी हो मिलेगी सिर्फ बुखार और दर्द की दवा
हर दूसरे मरीज को दूसरी पर्ची पर लिखी जा रही थीं बाहरी दवाएं
खोराबार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दोपहर एक बजे। रामपुर निवासी 73 वर्षीय काशीनाथ को लेकर पोता इलाज कराने आया था। डॉक्टर को दिखाने वो पंजीकरण पर्ची लेकर गया, लेकिन उधर से लौटते वक्त दो पर्चियां हाथ में थीं। पंजीकरण पर्ची पर दो तो वहीं दूसरी पर्ची पर आधा दर्जन दवाएं लिखी थीं। पूछने पर बताया कि ये दवाएं डॉॅक्टर ने बाहर से खरीदने को कही हैं। जंगल सिकरी की गीता को देखने के बाद डॉक्टर ने इसी तरह से दवाएं लिखी थीं। हाथ में कीड़ी की एक गोली लेकर वह निराश अंदाज में बाहर जा रही थीं। बताया कि मजबूरी में दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ेंगी। अब आज तो रुपये नहीं हैं कल जुगाड़ करूंगी तो दवा आएगी। ये सिर्फ दो मरीजों की आपबीती नहीं थी बल्कि हर दूसरे मरीज के साथ ऐसा ही हो रहा था। बगल में पैथोलॉजी रूम बंद था। दर्जन भर मरीज बाहर पैथोलॉजिस्ट का इंतजार कर रहे थे। कुछ की जांच हो चुकी थी तो कुछ को अभी जांच करानी थी। मोतीराम अड्डा से आई शांति देवी अपने 15 साल के बेटे विवेक की जांच कराने के लिए 12 बजे से दोपहर पौने दो बजे तक इंतजार ही करती रहीं। जंगल सिकरी की निशा, पुछिया की गिरजा आदि रिपोर्ट के इंतजार में दो घंटे से बैठी थीं। जेई एईएस वार्ड के बाहर फर्श पर पानी जमा था। वहीं बगल में गंदगी का ढेर लगा था। अस्पताल प्रभारी डॉ. जीतेंद्र पाल ने बताया कि दवाओं का संकट है। पेट के मर्ज की दवा अस्पताल में नहीं है। ऐसी कई जरूरी दवाएं स्टाक में नहीं होने से दिक्कत हो रही है।
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एईएस की चपेट में आए मासूमों के लिए नहीं है सिरप
एईएस मरीजों के इलाज के लिए एरिस्थ्रोमाइसिन की गोलियां तो थीं लेकिन मासूमों को देने के लिए इसका सिरप अस्पताल में नहीं था। पिछले दिनों चार हजार गोलियां यहां भेजी गई थीं। इनमें अब 1800 गोलियां ही स्टाक में बची थीं।
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सर्पदंश के मामलों में अधिकतर रेफर
बरसात के मौसम में अगर तीन मरीज सर्पदंश के यहां आ जाएं तो उनका इलाज मुमकिन नहीं है। सिर्फ 10 एंटी स्नेक वेनम स्टाक में है। सांप के जहर की तीव्रता देखकर कई बार एक मरीज को आधा दर्जन तक एएसवी लग जाती हैं। यह तथ्य रखते हुए जब प्रभारी से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि जब मरीज की हालत खराब लगती है तो उसे रेफर कर देते हैं।
एंटी रैबीज वैक्सीन बेहद कम
अस्पताल के ड्रग स्टोर में सिर्फ 15 एआरवी (एंटी रैबीज वैक्सीन) बची है। ऐसे में कुछ दिन तक अगर नया स्टाक नहीं आया तो कुत्ता काटने के मरीज भी यहां से वापस किए जाने लगेंगे।
दो बजे ही बंद हो जाते हैं कई अस्पताल
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जंगल धूसड़ पर दोपहर 2:18 बजे बंद मिला। हैदरगंज टोला की कैलाश देवी इलाज कराने पहुंचीं तो ताला बंद देख कर लौट गईं। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. वीके चौधरी ने बताया की दो बजे तक ही स्वास्थ्य केंद्र खुलने का समय है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरनहीं भी इसी तरह दो बजे ही बंद हो जाता है। इसके चलते इलाके के मरीजों को दो बजे के बाद स्वास्थ्य समस्या होने पर शहर आना पड़ता है।
चिकित्सक की तैनाती नहीं
अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पीपीगंज तीन कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है। दो वर्ष पूर्व अस्पताल का शुभारंभ हुआ लेकिन अभी तक स्थाई चिकित्सक की तैनाती न होने से मरीजों को दिक्कत झेलनी पड़ रही है। शिवपुर सहबाजगंज नवीन अरबन हेल्थ पोस्ट को नर्स और फार्मासिस्ट चलाते हैं। यहां किसी चिकित्सक की तैनाती नहीं है। इसके चलते अन्य कर्मचारी भी पूरी मनमानी के साथ ड्यूटी करते हैं।
मलेरिया और डेंगू दे सकता है अस्पताल
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जंगल कौड़िया परिसर में मौजूद झाड़-झंखाड़ यहां पहुंचने वालों का मन खिन्न कर देता है। गंदगी के चलते यहां मच्छरों की भरमार है। दिन के उजाले में भी मच्छर भनभनाते रहते हैं। अस्पताल का हाल मच्छरजनित बीमारियों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की संजीदगी की पोल खोलता है। खोराबार सीएचसी परिसर में बने शौचालय की छत पर खुली पानी की टंकी और उसके ढक्कन में पानी भरा मिला।
रात में आवास पर नहीं रुकते डॉक्टर
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरनहीं, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मिश्रौलिया में डॉक्टर रात में रुकना मुनासिब नहीं समझते। ऐसे में गंभीर मरीजों को रात के वक्त दिक्कत होने पर शहर की राह पकड़नी पड़ती है। इन अस्पतालों में साफ-सफाई की हालत भी बद से बदतर है। आलम यह है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिश्रौलिया में चार बेड होने के बाद भी महीनों से कोई गर्भवती प्रसव के लिए नहीं लाई गई।
अनुपस्थित डॉक्टरों का वेतन रोका
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कैंपियरगंज पर डॉ. सुरभि श्रीवास्तव दो बजे से पहले ही अस्पताल से चली गईं। दूसरी महिला चिकित्सक डॉ. कुमुद सिंह अस्पताल आई ही नहीं। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. भगवान ने बताया कि सुरभि श्रीवास्तव का वेतन रोक दिया गया है। दूसरी ओर सीएचसी बरही के निरीक्षण में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने यहां तैनात दो डॉक्टरों को अनुपस्थित पाया। इस पर डॉ. एसके मिश्र का एक दिन का वेतन रोका गया और लंबे समय से अनुपस्थित चल रहे डॉ. अमरेंद्र की बाबत शासन को रिपोर्ट भेजने की तैयारी है।
कोट-
स्वास्थ्य विभाग की टीम सीएचसी और पीएचसी का नियमित निरीक्षण कर व्यवस्था जांच रही है। जहां कमियां मिल रही हैं उन्हें दूर कराया जा रहा है। इसके साथ ही संबंधित लोगों से जवाब-तलब करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
- डॉ. रवींद्र कुमार, सीएमओ