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सौ रुपये का ‘जुगाड़’ करेगा हजारों का काम
Wed, 26 Dec 2018 12:39 AM IST
ajay Kumar
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Published by: ajay Kumar
Updated Wed, 26 Dec 2018 12:39 AM IST
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गोरखपुर। जिस तकनीक को विकसित करने में लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं, बाजार में जिस डिवाइस की कीमत करीब 10 हजार है, जरा सोचिए अगर वही तकनीक महज सौ रुपये में तैयार हो जाए तो है न अचरज भरी बात। जी हां, यह कारनामा कर दिखाया है गोरखपुर विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले दो सगे भाइयों ने। उन्होंने कड़ी मेहनत के बाद ऐसी डिवाइस तैयार की है, जिससे पानी की बर्बादी रुकेगी। दोनों छात्रों ने मंगलवार को एनसी हास्टल में वार्डन प्रो. अजय शुक्ला और छात्रों के बीच डिवाइस का प्रदर्शन भी किया।
नाथ चंद्रावत छात्रावास के कमरा नंबर 45 में रहने वाले बीएससी तृतीय वर्ष के छात्र मानस कुमार वर्मा और अर्जुन कुमार वर्मा भाई हैं। अर्जुन कहते हैं, करीब दो वर्ष पूर्व की बात है। छात्रावास में टंकी भरने के बाद भी पानी गिरता देखते थे तो दुख होता था। अक्सर टंकी भरने के बाद भी लोग स्विच ऑफ करने में लापरवाही करते हैं। इससे लाखों लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। पानी की बर्बादी रोकने के लिए दिमाग में वॉटर सेव डिवाइस बनाने का आइडिया आया।
मैंने भाई मानस से बात की और फिर हमने ऐसा डिवाइस बनाने का निर्णय किया जिससे टंकी का पानी खत्म होने पर मोटर अपने आप चालू हो जाए और भरने पर खुद बंद हो जाए। स्विच ऑन और ऑफ का झंझट ही न रहे। डिवाइस बनाने में 30 दिन का समय लगा। दोनों भाई पढ़ाई के बीच एक घंटे का समय डिवाइस बनाने में लगाते थे। मानस ने इस डिवाइस का नाम अपनी माता सुदामा देवी और पिता राजाराम के नाम पर रखा है। प्रो. अजय शुक्ला ने दोनों भाइयों की सराहना की और शुभकामनाएं दीं। इस दौरान छात्रावास के अधीक्षक डॉ. पंकज सिंह, डॉ. आशीष शुक्ला आदि भी मौजूद रहे।
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नाथ चंद्रावत छात्रावास के कमरा नंबर 45 में रहने वाले बीएससी तृतीय वर्ष के छात्र मानस कुमार वर्मा और अर्जुन कुमार वर्मा भाई हैं। अर्जुन कहते हैं, करीब दो वर्ष पूर्व की बात है। छात्रावास में टंकी भरने के बाद भी पानी गिरता देखते थे तो दुख होता था। अक्सर टंकी भरने के बाद भी लोग स्विच ऑफ करने में लापरवाही करते हैं। इससे लाखों लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। पानी की बर्बादी रोकने के लिए दिमाग में वॉटर सेव डिवाइस बनाने का आइडिया आया।
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मैंने भाई मानस से बात की और फिर हमने ऐसा डिवाइस बनाने का निर्णय किया जिससे टंकी का पानी खत्म होने पर मोटर अपने आप चालू हो जाए और भरने पर खुद बंद हो जाए। स्विच ऑन और ऑफ का झंझट ही न रहे। डिवाइस बनाने में 30 दिन का समय लगा। दोनों भाई पढ़ाई के बीच एक घंटे का समय डिवाइस बनाने में लगाते थे। मानस ने इस डिवाइस का नाम अपनी माता सुदामा देवी और पिता राजाराम के नाम पर रखा है। प्रो. अजय शुक्ला ने दोनों भाइयों की सराहना की और शुभकामनाएं दीं। इस दौरान छात्रावास के अधीक्षक डॉ. पंकज सिंह, डॉ. आशीष शुक्ला आदि भी मौजूद रहे।
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