दर-दर भटकती रेहाना को चार साल बाद मिला अपनों का साथ

अमर उजाला/गाोरख्ापुर Updated Fri, 28 Sep 2018 12:56 AM IST
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रेहाना को चार साल बाद मिला अपनों का साथ।
रेहाना को चार साल बाद मिला अपनों का साथ। - फोटो : amar ujala

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संतोष सिंह
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गोरखपुर। तकरीबन चार साल पहले घर से लापता हुई रेहाना को घरवाले खोज-खोजकर थक चुके थे। बूढ़े पिता एनुल्ला ने बेटी के जिंदा होने की आस छोड़ दी थी। उनकी आंखों से आंसू सूख चुके थे। अचानक एक फोन से एनुल्ला के जीवन में बिखरी खुशियां फिर से लौट आईं। दर-दर भटकती रेहाना को गुरुवार को जब अपनों का साथ मिला तो वह गुमसुम एकटक पिता को निहारती रही, जबकि पिता फफक पड़े। रुंधे गले से बोले, खुदा ने नई जिंदगी दे दी। रेहाना को अपनो का साथ दिलाने में अहम कड़ी बनीं आशा ज्योति केंद्र बीआरडी मेडिकल कॉलेज की प्रबंधक पूजा पांडेय और अपर निदेशक स्वास्थ्य कार्यालय में तैनात वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. वीके श्रीवास्तव, जिन्होंने मानवता की बड़ी मिसाल पेश की।
खलीलाबाद की रेहाना मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। चार साल पहले वह अचानक घर से गायब हो गई थीं। परिवार वालों ने खोजबीन की लेकिन कुछ पता नहीं चल सका। गुमशुदगी भी दर्ज कराई गई थी। गत 24 सितंबर को सुबह आठ बजे डॉ. वीके श्रीवास्तव मेडिकल कॉलेज की तरफ जा रहे थे। इसी बीच उन्होंने सलवार, शूट पहनकर जा रही एक युवती को देखा। युवती कुछ बड़बड़ा रही थी। यह डॉक्टर को खटका। वह युवती के साथ चरगांवा तक गए।
साथ ही पूछना चाहा कि कोई अनहोनी तो नहीं हुई है? हालांकि उनकी हिम्मत जवाब दे गई। युवती की सुरक्षा को लेकर चिंतित डॉक्टर ने मेडिकल कॉलेज स्थित आशा ज्योति केंद्र की प्रबंधक पूजा पांडेय से संपर्क साधा। पूजा ने महिला हेल्पलाइन नंबर 181 पर सूचना दी, फिर वाहन के साथ मौके पर पहुंच गईं। उन्होंने जब नाम-पता पूछा तो युवती का जवाब था रेहाना, खलीलाबाद की। इतनी जानकारी मिलने के बाद युवती को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। प्राथमिक इलाज के बाद उसे आशा ज्योति केंद्र में रखा गया। इसके बाद केंद्र की टीम रेहाना का पता तलाशने में जुट गई। सबसे पहले खलीलाबाद पुलिस से संपर्क साधा गया।

पुराने रिकार्ड खंगाले गए तो पता चला कि कुछ युवतियों की गुमशुदगी दर्ज है। शिकायतकर्ताओें के मोबाइल नंबर, पते निकलवाए गए, फिर एक-एक से संपर्क साधा गया। इसी बीच रेहाना के पिता एनुल्ला से मुलाकात हो गई। एनुल्ला को जैसे ही बताया कि उनकी बेटी जिंदा है। वह खुशी से उछल पड़े। बोले, चमत्कार हो गया। बेटी के जिंदा मिलने की आस छोड़ दी थी। वह चार साल पहले लापता हुई थी। बहरहाल, देरशाम वह रेहाना को लेकर खलीलाबाद रवाना हो गए।

अब बेटा पांच साल का

गोरखपुर आए एनुल्ला ने बेटी से कहा, जब तुम लापता हुई थी, तब तुम्हारा बेटा एक साल का था। अब वह पांच साल का हो गया है। यह सुन रेहाना मुस्कुराई भी। इस पर पिता ने खुशी जताई। रो-रोकर पथरा गई आंखें अब उसके जिंदा मिलने की खबर पर डबडबा गईं। दरअसल, मानसिक रूप से अस्वस्थ रेहाना को पति ने छोड़ दिया था। वह मायके में रह रही थी। बेटा उसके पति के पास है। रेहाना के पिता को उम्मीद है कि वह ठीक हो जाएगी। उसे पति, बेटे का प्यार फिर मिलेगा।

रेहाना का इलाज कराएंगे डॉक्टर

मानसिक रूप से अस्वस्थ रेहाना के इलाज की जिम्मेदारी भी वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. वीके श्रीवास्तव ने ली है। उनका कहना है कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों से बात की गई है। वह रेहाना का बेहतर इलाज करेंगे। डॉक्टरों की प्राथमिक जांच में रेहाना मानसिक रूप से अस्वस्थ मिली है लेकिन उसके ठीक होने की उम्मीद है।
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