{"_id":"59dbd9474f1c1baf678b4e44","slug":"21507580231-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुजराती फार्मूले से गोरखपुर के विकास की तैयारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुजराती फार्मूले से गोरखपुर के विकास की तैयारी
Updated Tue, 10 Oct 2017 01:47 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
गोरखपुर।
गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) और किसानों के बीच विरोध के चलते धीमी हो चुकी शहर के विकास की रफ्तार को गुजराती फार्मूले से गति देने की तैयारी है। जीडीए अब गुजरात लैंड पूलिंग स्कीम के तहत आपसी सहमति से किसानों से जमीन लेगा और सड़क, नाली, बिजली, पानी आदि सभी सुविधाओं से इस जमीन को विकसित करेगा। 50 फीसदी जमीन पर विकास कार्यों के बाद जो 50 फीसदी जमीन बचेगी, उसमें से आधी यानी 25 फीसदी जमीन जीडीए अपने पास रखेगा और 25 फीसदी किसान को दे देगा। किसान इस जमीन को अपने मुताबिक इस्तेमाल या बेच सकेंगे। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष वैभव श्रीवास्तव ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि इस स्कीम के तहत ताल कंदरा, सेमरा अयोध्या और सिक्टौर आदि के किसानों से बातचीत शुरू कर दी गई है। उनका कहना है कि इससे प्राधिकरण का लैंड बैंक तो बढ़ेगा ही किसानों को भी लाभ होगा। अब देखना यह होगा कि किसानों को यह फार्मूला कितना जंचता है।
लैंड पूलिंग स्कीम
किसी बसावट में सरकारी एजेंसी या निजी विकासकर्ता जितने भी लोगों की जमीन लेंगे वह सहमति से ली जाएगी। जिन भूखंडों के लिए सहमति नहीं बनेगी, वहां लैंड एक्ट के तहत जमीन लेकर मुआवजा दिया जाएगा। मगर सहमति से जमीन सरेंडर करने पर लैंड पूलिंग स्कीम के तहत जमीन क्लब मानी जाएगी।
बसावट और सुविधा क्षेत्र में सामंजस्य
कालोनियों में 50:50 के अनुपात में बसावट व सुविधा क्षेत्र सुनिश्चित करने में यह स्कीम काफी कारगर साबित होगी। लैंड पूलिंग की कार्रवाई केवल शहरी क्षेत्रों में मास्टर प्लान के हिसाब से बसावट व विस्तार तथा ग्रीन लैंड विकास के तहत हरी भरी कालोनियां बसाने के लिए ही किया जा सकेगा।
विज्ञापन
शासन से लेनी होगी सहमति
योजना लांच करने से पहले लैंड पूलिंग से जमीन लेने का प्रस्ताव आता है तो इसे लेकर शासन से सहमति लेनी होगी। योजना को लेकर सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद दो साल के भीतर संबंधित योजना को फाइनल कर जिनकी जमीन ली गई है उनको समान अनुपात में विकसित जमीन देनी होगी।
गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) और किसानों के बीच विरोध के चलते धीमी हो चुकी शहर के विकास की रफ्तार को गुजराती फार्मूले से गति देने की तैयारी है। जीडीए अब गुजरात लैंड पूलिंग स्कीम के तहत आपसी सहमति से किसानों से जमीन लेगा और सड़क, नाली, बिजली, पानी आदि सभी सुविधाओं से इस जमीन को विकसित करेगा। 50 फीसदी जमीन पर विकास कार्यों के बाद जो 50 फीसदी जमीन बचेगी, उसमें से आधी यानी 25 फीसदी जमीन जीडीए अपने पास रखेगा और 25 फीसदी किसान को दे देगा। किसान इस जमीन को अपने मुताबिक इस्तेमाल या बेच सकेंगे। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष वैभव श्रीवास्तव ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि इस स्कीम के तहत ताल कंदरा, सेमरा अयोध्या और सिक्टौर आदि के किसानों से बातचीत शुरू कर दी गई है। उनका कहना है कि इससे प्राधिकरण का लैंड बैंक तो बढ़ेगा ही किसानों को भी लाभ होगा। अब देखना यह होगा कि किसानों को यह फार्मूला कितना जंचता है।
लैंड पूलिंग स्कीम
किसी बसावट में सरकारी एजेंसी या निजी विकासकर्ता जितने भी लोगों की जमीन लेंगे वह सहमति से ली जाएगी। जिन भूखंडों के लिए सहमति नहीं बनेगी, वहां लैंड एक्ट के तहत जमीन लेकर मुआवजा दिया जाएगा। मगर सहमति से जमीन सरेंडर करने पर लैंड पूलिंग स्कीम के तहत जमीन क्लब मानी जाएगी।
विज्ञापन
बसावट और सुविधा क्षेत्र में सामंजस्य
कालोनियों में 50:50 के अनुपात में बसावट व सुविधा क्षेत्र सुनिश्चित करने में यह स्कीम काफी कारगर साबित होगी। लैंड पूलिंग की कार्रवाई केवल शहरी क्षेत्रों में मास्टर प्लान के हिसाब से बसावट व विस्तार तथा ग्रीन लैंड विकास के तहत हरी भरी कालोनियां बसाने के लिए ही किया जा सकेगा।
विज्ञापन
शासन से लेनी होगी सहमति
योजना लांच करने से पहले लैंड पूलिंग से जमीन लेने का प्रस्ताव आता है तो इसे लेकर शासन से सहमति लेनी होगी। योजना को लेकर सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद दो साल के भीतर संबंधित योजना को फाइनल कर जिनकी जमीन ली गई है उनको समान अनुपात में विकसित जमीन देनी होगी।