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साहब! यह पीड़ितों की मदद है या लूट
Updated Fri, 25 Aug 2017 12:28 AM IST
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सिद्धार्थनगर। साहब, यह बाढ़ पीड़ितों की मदद है या लूट-खसोट। बाजार में जो आलू 8-10 रुपये किलो मिल रहा है, प्रशासन उसे 14 रुपये में खरीद रहा है। दलील है कि दो माह पहले टेंडर के वक्त आलू का सबसे कम रेट यही था। इसी रेट पर अनुबंध हुआ, लिहाजा भुगतान करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि सामग्री की आपूर्ति के लिए अनुबंध केवल एक फर्म से हुआ था, मगर अब आपूर्ति देने वाली चारों फर्मों को इसी दर से भुगतान की स्वीकृत दे दी गई है। बाढ़ पीड़ितों को प्रशासन खाद्य सामग्री से भरा एक थैला दे रहा है। इसमें आटा, चावल, मोमबत्ती, माचिस, नमक के साथ आलू भी है। पहले आलू की मात्रा 5 किलो थी, जो अब 10 किलो कर दी गई है। सरकारी रिकार्ड में आलू का रेट 14 रुपये दिया जा रहा है, जबकि बाजार में आलू 8-10 रुपये में ही उपलब्ध है। प्रशासन के प्रारंभिक आंकलन के मुताबिक पूरे जिले में 85 हजार बाढ़ पीड़ित हैं, जिन तक राहत सामग्री पहुंचाई जानी है। इस लिहाज से साढ़े आठ लाख किलो आलू की सप्लाई होगी। 14 रुपये की दर से इसकी कुल कीमत 1.19 करोड़ रुपये होगी। वर्तमान बाजार दर आठ रुपये से गणना करें तो साढ़े आठ लाख किलो आलू की कीमत महज 68 लाख रुपये हो रही है। यानि सामग्री आपूर्ति करने वाले को 51 लाख रुपये की सीधी बचत है। आपदाग्रस्त लोगों की मदद के लिए जहां एक तरफ आम लोग बढ़-चढ़कर सहयोग राशि दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी खजाने को इतनी बड़ी चपत जिम्मेदारों की मंशा पर सवाल उठा रही है। बहरहाल, इस बाबत डीएम कुणाल सिल्कू का कहना था कि आपदा की घड़ी में सामानों की आपूर्ति के लिए पहले से तैयारी होती है। दो माह पहले ही सामग्री आपूर्ति के लिए टेंडर करा लिया गया था, तब सबसे कम रेट 14 रुपये का ही आया था, लिहाजा उसे स्वीकृत करना पड़ा। संयोग है कि अब आलू सस्ता हो गया है, अगर महंगा होता तो भी इसी दर से भुगतान किया जाता। टेंडर पूरी पारदर्शिता के साथ हुआ है। नियमानुसार कार्य हो रहा है।
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