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मरणासन्न बछड़े के लिए सुबह से शाम तक मिन्नतें करती रहीं बहनें
Wed, 23 Jan 2019 01:34 AM IST
ajay Kumar
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Published by: ajay Kumar
Updated Wed, 23 Jan 2019 01:34 AM IST
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गाय की सेवा करती पूर्णिमा।
- फोटो : amar ujala
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गोरखपुर। ‘जानवर आदमी फरिश्ता खुदा, आदमी की हैं सैकड़ों किस्में।’ अल्ताफ हुसैन हाली का यह शे’र मंगलवार को तारामंडल रोड पर विमल पैलेस के सामने जिंदा हो गया। एक मरणासन्न बछड़ा और किस्म-किस्म के आदमी। इस भीड़ में पूर्णिमा त्रिपाठी सबसे अलग थीं। बछड़े की मदद के लिए वह कभी जिम्मेदारों को फोन लगातीं, तो कभी उसे पुचकार कर उठने को प्रेरित करतीं। बुद्धनगर कॉलोनी से प्रतियोगी परीक्षा की कोचिंग के निकलीं पूर्णिमा ने सुबह नौ बजे बछड़े को बेदम पड़े देखा। दिन भर में उन्होंने उसकी मदद के लिए पुलिस, प्रशासन, नगर निगम, जिला पशु चिकित्साधिकारी समेत 17 नंबरों पर कॉल करके गुहार की। पुलिस आई और चली गई। एक पशु चिकित्सक सुई लगाकर चले गए।
पूर्णिमा ने बछड़े को खिलाने के लिए आसपास से रोटियां मांगीं। वे कम लगीं तो घर जाकर रोटियां लाईं। अब बड़ी बहन गोल्डी त्रिपाठी भी साथ थीं। शाम के सात बज गए फिर भी बात नहीं बनी। मां पुष्पा त्रिपाठी बार-बार घर आने को कह रही थीं, पर दोनों बहनें बछड़े की जान बचाने को बेचैन वहीं डटी रहीं। इसी बीच बारिश भी शुरू हो गई। अजय त्रिपाठी की बेटियों की कोशिश करीब पौने नौ बजे रंग लाई जब नगर निगम की टीम पहुंची। आवारा पशुवाहन दस्ता के लोगों के साथ पूर्णिमा ने बछड़े को गाड़ी पर लदवाया। दस्तेवालों का नंबर लिया। बछड़े को अस्पताल ले जाने को कहा। वे अस्पताल जरूर ले जाएं इसलिए बोलीं, ‘मैं वीडियो कॉल करूंगी।’
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पूर्णिमा ने बछड़े को खिलाने के लिए आसपास से रोटियां मांगीं। वे कम लगीं तो घर जाकर रोटियां लाईं। अब बड़ी बहन गोल्डी त्रिपाठी भी साथ थीं। शाम के सात बज गए फिर भी बात नहीं बनी। मां पुष्पा त्रिपाठी बार-बार घर आने को कह रही थीं, पर दोनों बहनें बछड़े की जान बचाने को बेचैन वहीं डटी रहीं। इसी बीच बारिश भी शुरू हो गई। अजय त्रिपाठी की बेटियों की कोशिश करीब पौने नौ बजे रंग लाई जब नगर निगम की टीम पहुंची। आवारा पशुवाहन दस्ता के लोगों के साथ पूर्णिमा ने बछड़े को गाड़ी पर लदवाया। दस्तेवालों का नंबर लिया। बछड़े को अस्पताल ले जाने को कहा। वे अस्पताल जरूर ले जाएं इसलिए बोलीं, ‘मैं वीडियो कॉल करूंगी।’
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