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संशोधित- केले के रेश

Thu, 25 Oct 2018 12:00 AM IST
Updated Thu, 25 Oct 2018 12:00 AM IST
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संशोधित- केले के रेश
हेडिंग में सुधार किया गया है----
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खास खबर
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केले के रेशों से बदली तकदीर, कल गुमनाम था आज विदेश तक पहुंची ख्याति
- तुमकुहीराज के हरिहरपुर निवासी के उत्पाद का वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट योजना में हो चुका है चयन
- केले के रेशे से फुटवियर, पायदान, स्कूल बैग, योगा मैट व अन्य सामान बनाते हैं रवि प्रसाद
- चीन, कोरिया, नेपाल, भूटान, जापान, श्रीलंका समेत यूरोपीय देशों में है इन उत्पादों की मांग
शोभित कुमार पांडेय
पडरौना (कुशीनगर)। घर की गरीबी और बेरोजगारी की चक्की में पिस रहा एक युवक नौकरी की तलाश में दिल्ली पहुंचता है। गांव की गलियों से निकल कर देश की राजधानी में पहुंचा वह युवक वहां छोटी-मोटी नौकरी के लिए एक से दूसरी कंपनियों के चक्कर काटता है। इसी दौरान एक दिन वह प्रगति मैदान में लगी प्रदर्शनी देखने पहुंचता है। बेरोजगारी की मार से थका-हारा वह युवक प्रदर्शनी में बेमकसद एक स्टॉल से दूसरे स्टॉल का चक्कर काटता है। तभी कोयंबटूर के एक स्टॉल में लगे केले के रेशे से बने उत्पादों को देख उसकी जिज्ञासा बढ़ती है। वह स्टॉल मालिक से उत्पाद के बारे में तरह-तरह के सवाल करता है। उन चंद सवालों ने आज उसकी जिंदगी बदल दी है। कल के उस गुमनाम युवक को आज जिले ही नहीं, प्रदेश, देश और विदेश में भी पहचान मिल गई है। अपनी मेहनत और लग्न से फर्श से अर्श पर पहुंचने वाला वह युवक है कुशीनगर के तुमकुहीराज तहसील के हरिहरपुर का रवि प्रसाद। केले के रेशे से बने उत्पाद को प्रदेश सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना में चयनित कर लिया है।
बात वर्ष 2014-15 की है। रवि गोरखपुर के डीवीएन पीजी कॉलेज से अर्थशास्त्र से परास्तानक प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहे थे। उसी दौरान उनके पिता फूलचंद हादसे में दिव्यांग हो गए। बाद में उनकी मौत हो गई। घर की माली हालत बिगड़ने से रवि की पढ़ाई छूट गई। छोटी-मोटी नौकरी की तलाश में रवि वर्ष 2016 में दिल्ली पहुंचे। काफी भागदौड़ की पर नौकरी नहीं मिली। इसी दौरान एक दिन वह प्रगति मैदान में लगी प्रदर्शनी देखने पहुंचे। यहां एक स्टॉल में केले के रेशे से बने फुटवियर, पायदान, स्कूल बैग, योगा मैट व अन्य उत्पाद देख उनके मन में कुछ नया करने का विचार आया। इस बारे में उन्होंने स्टॉल मालिक से बात की और बाद में कोयंबटूर पहुंच कर 15 दिन का प्रशिक्षण लिया।
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रवि के लिए आगे की राह भी आसान नहीं रही। उनके पास योजना थी, लेकिन उस पर अमल करने के लिए पैसे नहीं थे। फिर भी रवि ने हिम्मत नहीं हारी। वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से यूनियन बैंक से पांच लाख रुपये का ऋण लिया। पौने दो लाख की कोयंबटूर से फाइबर मशीन खरीदी और ममेरे भाई मुन्ना के सहयोग से गांव में केले के रेशे से उपयोगी सामान बनाने लगे। रवि प्रसाद बताते हैं कि केले के पौधे से फल प्राप्त कर किसान उसके तने को फेंक देते हैं। उन्होंने उसी बेकार तने को कीमती बनाने की कला सीख ली थी। धीरे-धीरे रवि के उत्पादों की चर्चा शुरू हुई, जो आज देश की सीमा लांघकर विदेश तक जा पहुंची है।
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डीएम की पहल पर केले के रेशे से तैयार हस्तशिल्प को ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ में चयनित कर लिया गया है। आज गांव की महिलाएं भी उनके धंधे से जुड़ गई हैं। प्रशासन की ओर से गठित चार स्वयं सहायता समूह की महिलाएं भी रेशे से उपयोगी सामान तैयार करती हैं। शासन की ओर से लखनऊ के अवध शिल्प ग्राम में स्टॉल की जगह भी मिल गई है। अब कलस्टर बनाने की योजना है। पॉलिथीन पर प्रतिबंध के बाद वह केले के रेशे से साड़ियां, कप, प्लेट, थैला आदि बनाने की सोच रहे हैं। वह बेरोजगारों को प्रशिक्षण देकर इस कला में पारंगत बनाएंगे, ताकि लोग खुद का व्यवसाय कर सकें।
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केले के रेशे से तैयार होते हैं ये सामान
- सबसे पहले बेकार समझकर फेंके गए केले के तने की परतें अलग की जाती हैं। फाइबर मशीन से इन छिलकों से रेशे निकाले जाते हैं। रेशे को छांव में सुखा कर उसकी रंगाई की जाती है। इस रेशे से सजावटी सामान तैयार होते हैं। केले के रेशे से पर्स, टोपी, टिफिन, गुलदस्ता, पेन स्टैंड, फुटवियर, पायदान, स्कूल बैग, योगा मैट, मोबाइल पर्स, दरी, झोला आदि सामान तैयार किए जाते हैं। केले के तने से निकलने वाले पानी को रंगाई के काम में और खुज्जे को अलग कर आर्गेनिक खाद तैयार की जाती है। केले का पानी मछली पालन, मुर्गी पालन और सब्जी की खेती के लिए बेहद उपयोगी होता है।

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कोट--
- कुशीनगर जिले में करीब 5000 हेक्टेयर में केले की खेती होती है। हरिहरपुर के निवासी 31 वर्षीय रवि प्रसाद के जरिए केले के रेशे से तैयार उत्पाद को जनवरी 2018 में एक जनपद, एक उत्पाद योजना में चयनित कर लिया गया। वर्तमान में 12 इकाइयां चल रही हैं। डीएम की पहल पर अब तक परियोजना निदेशक की तरफ से 27 समूहों का गठन कर लिया गया है। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में भी इस ट्रेड को शामिल कर लिया गया है। उद्यमिता विकास की तरफ से भी साप्ताहिक प्रशिक्षण दिया जाता है। पीएम रोजगार सृजन कार्यक्रम, पीएम मुद्रा योजना, स्टैंडअप योजना, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना में लक्ष्य का 40 प्रतिशत एक जनपद एक उत्पाद योजना के लाभार्थियों को लाभान्वित किए जाने का प्रावधान है। सोशल मीडिया के माध्यम से विदेशों में भी कुशीनगर का नाम हुुआ है। चीन, कोरिया, नेपाल, भूटान, जापान, श्रीलंका समेत यूरोपीय देशों में भी रवि के उत्पादों की काफी मांग है।
-गुलाब चंद्र गौड़, जिला उद्योग सहायक प्रबंधक
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