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जेल में खिलौने पाकर चहक उठे चेहरे
Updated Sun, 17 Sep 2017 01:44 AM IST
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गोरखपुर।
जेल में सजा काट रही मां के साथ पल रहे बच्चे अब ककहरा सीखेंगे। इन बच्चों का आंगनबाड़ी केंद्र में रजिस्ट्रेशन करा दिया गया है। यहां इन बच्चों की अब नियमित निगरानी होगी और पौष्टिक भोजन मिलने के साथ यहां उनका स्वास्थ्य परीक्षण भी होगा। इसके अलावा शनिवार को वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. रामधनी ने बच्चों को कपड़े और खिलौने भी बांटे। जेल में होने से अपनी मासूमियत खो चुके ये बच्चे खिलौने पाते ही चहक उठे।
गोरखपुर जेल में नौ बच्चे हैं। इन सभी बच्चों की उम्र पांच वर्ष से कम है। इनकी माताएं किसी न किसी आपराधिक मामले में सजा काट रही हैं। छोटे होने के कारण इन बच्चों को भी मां के साथ एक तरह की सजा ही काटनी पड़ रही है। आंगनबाड़ी केंद्र में इनका रजिस्ट्रेशन होने के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जेल में इन्हें पढ़ाएंगी। इन्हें सरकार की ओर से मिलने वाली सुविधाएं भी दी जाएंगी। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. रामधनी इसे लेकर काफी उत्साहित हैं। उनका कहना है कि इन बच्चों को वह ईंट-पत्थर से खेलते देखते थे, तभी उनके मन में खिलौने की बात आई और बच्चों को खिलौने दिए गए।
जेल में सजा काट रही मां के साथ पल रहे बच्चे अब ककहरा सीखेंगे। इन बच्चों का आंगनबाड़ी केंद्र में रजिस्ट्रेशन करा दिया गया है। यहां इन बच्चों की अब नियमित निगरानी होगी और पौष्टिक भोजन मिलने के साथ यहां उनका स्वास्थ्य परीक्षण भी होगा। इसके अलावा शनिवार को वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. रामधनी ने बच्चों को कपड़े और खिलौने भी बांटे। जेल में होने से अपनी मासूमियत खो चुके ये बच्चे खिलौने पाते ही चहक उठे।
गोरखपुर जेल में नौ बच्चे हैं। इन सभी बच्चों की उम्र पांच वर्ष से कम है। इनकी माताएं किसी न किसी आपराधिक मामले में सजा काट रही हैं। छोटे होने के कारण इन बच्चों को भी मां के साथ एक तरह की सजा ही काटनी पड़ रही है। आंगनबाड़ी केंद्र में इनका रजिस्ट्रेशन होने के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जेल में इन्हें पढ़ाएंगी। इन्हें सरकार की ओर से मिलने वाली सुविधाएं भी दी जाएंगी। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. रामधनी इसे लेकर काफी उत्साहित हैं। उनका कहना है कि इन बच्चों को वह ईंट-पत्थर से खेलते देखते थे, तभी उनके मन में खिलौने की बात आई और बच्चों को खिलौने दिए गए।
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