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प्रदूषण कम करने में हरित रसायन कारगर : प्रो. सिंह
Updated Mon, 25 Sep 2017 09:23 PM IST
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गोरखपुर। मारवाड़ बिजनेस स्कूल में ‘ग्रीन केमिस्ट्री एंड एनवायरमेंटल हेल्थ’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। उद्घाटन करते हुए मालवीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसएन सिंह ने कहा कि रसायन विज्ञान हमारे भोजन में भी पाया जाता है जो हमारे दैनिक जीवन पर दुष्प्रभाव डालता है। इसे हरित रसायन से सामान्य किया जा सकता है। हम लोग मोबाइल फोन के रेडिएशन तथा नुकसानदायक किरणों से भी घिरे हुए हैं। इसके निवारण के लिए हमें अपनी तकनीकी भी सुधारनी होगी।
मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. आरके शर्मा ने कहा कि प्रदूषण का दुष्प्रभाव जो जल, वातावरण, ऊर्जा पर सीधे तौर पर पड़ रहा है, इसका निराकरण हरित रसायन से ही संभव है। प्लास्टिक की बोतलों से खतरनाक रसायन निकलता है, जो स्तन और मस्तिष्क कैंसर को बढ़ावा देता है। गोरखपुर यूनिवर्सिटी के साइंस फैकल्टी के डीन प्रो. एसके सेनगुप्ता ने कहा कि हरित रसायन के प्रयोग से रसायन के दुष्प्रभाव को कम कर सकते हैं। हरित रसायन हमारे दैनिक जीवन में आ चुका है। इससे पहले अतिथियों ने दीप जलाकर और मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की। स्वागत भाषण प्राचार्य डॉ. संतोष त्रिपाठी ने किया। प्रथम तकनीकी सत्र आईटीएम के प्रो. आरपी मणि की अध्यक्षता में हुआ। त्रिभुवन विश्वविद्यालय नेपाल के प्रो. एमएल शर्मा, जापान के डॉ. भरत चतुर्वेदी, तंजानिया के डॉ. वीवी एल श्रीवास्तव, इथोपिया के डॉ. सत्यनारायण ने भी व्याख्यान दिया। इस दौरान पांच शोध पत्र प्रस्तुत हुए। द्वितीय सत्र एमएमएमयूटी के डॉ. गोविंद पांडेय की अध्यक्षता में हुआ। इस अवसर पर प्रो. एसएन चतुर्वेदी, डॉ. गोपाल श्रीवास्तव, प्रेमचंद गौड़, डॉ. सर्वेश पांडेय, डॉ. अकील अहमद, डॉ. समीर मिश्र, डॉ. प्रीति गुप्ता आदि मौजूद थीं।
मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. आरके शर्मा ने कहा कि प्रदूषण का दुष्प्रभाव जो जल, वातावरण, ऊर्जा पर सीधे तौर पर पड़ रहा है, इसका निराकरण हरित रसायन से ही संभव है। प्लास्टिक की बोतलों से खतरनाक रसायन निकलता है, जो स्तन और मस्तिष्क कैंसर को बढ़ावा देता है। गोरखपुर यूनिवर्सिटी के साइंस फैकल्टी के डीन प्रो. एसके सेनगुप्ता ने कहा कि हरित रसायन के प्रयोग से रसायन के दुष्प्रभाव को कम कर सकते हैं। हरित रसायन हमारे दैनिक जीवन में आ चुका है। इससे पहले अतिथियों ने दीप जलाकर और मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की। स्वागत भाषण प्राचार्य डॉ. संतोष त्रिपाठी ने किया। प्रथम तकनीकी सत्र आईटीएम के प्रो. आरपी मणि की अध्यक्षता में हुआ। त्रिभुवन विश्वविद्यालय नेपाल के प्रो. एमएल शर्मा, जापान के डॉ. भरत चतुर्वेदी, तंजानिया के डॉ. वीवी एल श्रीवास्तव, इथोपिया के डॉ. सत्यनारायण ने भी व्याख्यान दिया। इस दौरान पांच शोध पत्र प्रस्तुत हुए। द्वितीय सत्र एमएमएमयूटी के डॉ. गोविंद पांडेय की अध्यक्षता में हुआ। इस अवसर पर प्रो. एसएन चतुर्वेदी, डॉ. गोपाल श्रीवास्तव, प्रेमचंद गौड़, डॉ. सर्वेश पांडेय, डॉ. अकील अहमद, डॉ. समीर मिश्र, डॉ. प्रीति गुप्ता आदि मौजूद थीं।
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