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कार्यकाल खत्म, मेयर बोली अभी कुर्सी नहीं छोड़ूूंगी
Updated Tue, 08 Aug 2017 02:24 AM IST
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गोरखपुर।
नगर निगम के प्रशासक के तौर पर नगर आयुक्त के मसले पर मेयर और नगर आयुक्त के बीच तनातनी वाली स्थिति हो गई है। एक तरफ जहां नगर आयुक्त ने कहा कि नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल के साथ ही मेयर का कार्यकाल भी खत्म हो गया, वहीं मेयर डॉ. सत्या पांडेय ने कहा कि चुनाव तक वह बनी रहेंगी और रोजाना की तरह कामकाज निपटाएंगी। हालांकि मेयर के दावे को संवैधानिक सहयोग नहीं मिलता है। हाईकोर्ट में नगर निगम के अधिवक्ता का कहना है कि कार्यकाल खत्म होने के साथ ही मेयर, पार्षद के पावर सीज हो जाते हैं। इसके बाद सब कुछ नगर आयुक्त के हाथ में आ जाता है।
नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल खत्म होने के साथ ही मंगलवार से नगर आयुक्त नगर निगम के ‘कर्ता-धर्ता’ हो जाएंगे। मेयर और सभी पार्षदों के अब ‘पूर्व’ होने से नगर निगम में नियमानुसार इनका कोई महत्व नहीं रह जाएगा। शासनादेश के अनुसार कार्यकारिणी के सदस्य नगर आयुक्त के सलाहकार की भूमिका निभाएंगे। वहीं नगर पंचायतों की कमान अधिशासी अधिकारियों के पास रहेगी। नगर निगम के अलावा जिले के पीपीगंज, सहजनवां, मुंडेरा बाजार, गोला, बड़हलगंज, बांसगांव और पिपराइच में नगर पंचायत है। प्रमुख सचिव कुमार कमलेश ने कुछ दिनों पहले डीएम को जारी आदेश में स्पष्ट कर दिया था कि बोर्ड की पहली बैठक की तिथि से ही नगर निकायों के कार्यकाल की समाप्ति मानी जाएगी। इसके बाद नगर निगम के कार्यों का संचालन का जिम्मा नगर आयुक्त एवं नगर पंचायत में अधिशासी अधिकारी के पास होगा। लिहाजा सात अगस्त को गोरखपुर नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल खत्म होने के बाद इसके संचालन की जिम्मेदारी अब नगर आयुक्त को मिल गई है। अब कार्यकारिणी समिति बहुमत के द्वारा नगर आयुक्त को परामर्श देगी और नागरिक सुविधाओं की निगरानी करेगी। इसके लिए कार्यकारिणी समिति के सदस्यों को कोई पारिश्रमिक या भत्ता नहीं मिलेगा। नकदी निकालने पर पूरी तरह से रोक लगाते हुए चेक से ही लेनदेन का प्रावधान किया गया है।
कार्यकारिणी के ये सदस्य हैं
नगर निगम कार्यकारिणी के सदस्यों का कार्यकाल दो साल पर स्वत: ही खत्म हो जाता है। ऐसे में सितंबर 2016 में ही कार्यकारिणी के छह सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो गया था। इनमें अजय राय, मनीष सिंह, मोहम्मद अख्तर, श्याम यादव, आशा श्रीवास्तव और मनु जायसवाल शामिल हैं। हालांकि इसके बाद बोर्ड की बैठक न होने से कार्यकारिणी के रिक्त हुए छह सदस्यों का चुनाव नहीं हुआ। लिहाजा नियमानुसार अब रमेश गुप्ता, धर्मदेव चौहान, मनोज सिंह, अमरुद्दीन अंसारी, संजय यादव, और चंद्रभान प्रजापति ही कार्यकारिणी के सदस्य के रूप में बचे हैं।
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कोट::::
अगले मेयर के चुने जाने तक बनी रहूंगी
मेयर अपना कार्यभार मेयर को हैंडओवर करता है। ऐसे में अगले मेयर के चुने जाने तक मैं गोरखपुर की मेयर रहुंगी। इस संबंध में पूर्व में आदेश भी जारी किया गया था।
डॉ. सत्या पांडेय, मेयर
- सात अगस्त को नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल खत्म
शासनादेश के अनुसार सात अगस्त को नगर निगम का कार्यकाल खत्म हो गया है। इसके बाद शासन ने नगर आयुक्त को कार्य संचालन का दायित्व सौंपा है। सात अगस्त तक डॉ. सत्या पांडेय मेयर हैं।
प्रेमप्रकाश सिंह, नगर आयुक्त
- नगर आयुक्त में निहित होंगे सारे अधिकार
नगर निगम का कार्यकाल खत्म होने के साथ ही सारे अधिकार नगर आयुक्त में निहित हो गए हैं। नगर निगम को संचालित करने की जिम्मेदारी नगर आयुक्त के पास आ गई है।
संजय कुमार त्रिपाठी, नगर निगम के हाईकोर्ट में वकील
नगर निगम के प्रशासक के तौर पर नगर आयुक्त के मसले पर मेयर और नगर आयुक्त के बीच तनातनी वाली स्थिति हो गई है। एक तरफ जहां नगर आयुक्त ने कहा कि नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल के साथ ही मेयर का कार्यकाल भी खत्म हो गया, वहीं मेयर डॉ. सत्या पांडेय ने कहा कि चुनाव तक वह बनी रहेंगी और रोजाना की तरह कामकाज निपटाएंगी। हालांकि मेयर के दावे को संवैधानिक सहयोग नहीं मिलता है। हाईकोर्ट में नगर निगम के अधिवक्ता का कहना है कि कार्यकाल खत्म होने के साथ ही मेयर, पार्षद के पावर सीज हो जाते हैं। इसके बाद सब कुछ नगर आयुक्त के हाथ में आ जाता है।
नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल खत्म होने के साथ ही मंगलवार से नगर आयुक्त नगर निगम के ‘कर्ता-धर्ता’ हो जाएंगे। मेयर और सभी पार्षदों के अब ‘पूर्व’ होने से नगर निगम में नियमानुसार इनका कोई महत्व नहीं रह जाएगा। शासनादेश के अनुसार कार्यकारिणी के सदस्य नगर आयुक्त के सलाहकार की भूमिका निभाएंगे। वहीं नगर पंचायतों की कमान अधिशासी अधिकारियों के पास रहेगी। नगर निगम के अलावा जिले के पीपीगंज, सहजनवां, मुंडेरा बाजार, गोला, बड़हलगंज, बांसगांव और पिपराइच में नगर पंचायत है। प्रमुख सचिव कुमार कमलेश ने कुछ दिनों पहले डीएम को जारी आदेश में स्पष्ट कर दिया था कि बोर्ड की पहली बैठक की तिथि से ही नगर निकायों के कार्यकाल की समाप्ति मानी जाएगी। इसके बाद नगर निगम के कार्यों का संचालन का जिम्मा नगर आयुक्त एवं नगर पंचायत में अधिशासी अधिकारी के पास होगा। लिहाजा सात अगस्त को गोरखपुर नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल खत्म होने के बाद इसके संचालन की जिम्मेदारी अब नगर आयुक्त को मिल गई है। अब कार्यकारिणी समिति बहुमत के द्वारा नगर आयुक्त को परामर्श देगी और नागरिक सुविधाओं की निगरानी करेगी। इसके लिए कार्यकारिणी समिति के सदस्यों को कोई पारिश्रमिक या भत्ता नहीं मिलेगा। नकदी निकालने पर पूरी तरह से रोक लगाते हुए चेक से ही लेनदेन का प्रावधान किया गया है।
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कार्यकारिणी के ये सदस्य हैं
नगर निगम कार्यकारिणी के सदस्यों का कार्यकाल दो साल पर स्वत: ही खत्म हो जाता है। ऐसे में सितंबर 2016 में ही कार्यकारिणी के छह सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो गया था। इनमें अजय राय, मनीष सिंह, मोहम्मद अख्तर, श्याम यादव, आशा श्रीवास्तव और मनु जायसवाल शामिल हैं। हालांकि इसके बाद बोर्ड की बैठक न होने से कार्यकारिणी के रिक्त हुए छह सदस्यों का चुनाव नहीं हुआ। लिहाजा नियमानुसार अब रमेश गुप्ता, धर्मदेव चौहान, मनोज सिंह, अमरुद्दीन अंसारी, संजय यादव, और चंद्रभान प्रजापति ही कार्यकारिणी के सदस्य के रूप में बचे हैं।
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अगले मेयर के चुने जाने तक बनी रहूंगी
मेयर अपना कार्यभार मेयर को हैंडओवर करता है। ऐसे में अगले मेयर के चुने जाने तक मैं गोरखपुर की मेयर रहुंगी। इस संबंध में पूर्व में आदेश भी जारी किया गया था।
डॉ. सत्या पांडेय, मेयर
- सात अगस्त को नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल खत्म
शासनादेश के अनुसार सात अगस्त को नगर निगम का कार्यकाल खत्म हो गया है। इसके बाद शासन ने नगर आयुक्त को कार्य संचालन का दायित्व सौंपा है। सात अगस्त तक डॉ. सत्या पांडेय मेयर हैं।
प्रेमप्रकाश सिंह, नगर आयुक्त
- नगर आयुक्त में निहित होंगे सारे अधिकार
नगर निगम का कार्यकाल खत्म होने के साथ ही सारे अधिकार नगर आयुक्त में निहित हो गए हैं। नगर निगम को संचालित करने की जिम्मेदारी नगर आयुक्त के पास आ गई है।
संजय कुमार त्रिपाठी, नगर निगम के हाईकोर्ट में वकील