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जिला अस्पताल के डाय लसिस सेंटर में अभी काम बाकी
Updated Sun, 25 Jun 2017 02:04 AM IST
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गोरखपुर।
जिला अस्पताल में खुलने जा रही डायलिसिस सेंटर की राह में ठेकेदार की लापरवाही अड़ंगे डाल रही है। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर संचालित होने वाले इस सेंटर के संचालन के लिए वाराणसी की मेसर्स हेरिटेज हॉस्पिटल से करार हुआ है। हेरिटेज हॉस्पिटल के जिम्मेदारों ने सेंटर के निर्माण कार्य को अधूरा बताया है। इसको लेकरएसआईसी डॉ. दिनेश सोनकर ने सेंटर का निरीक्षण किया। इसमें कमी पाए जाने पर एसआईसी ने ठेकेदार व इंजीनियर से पूरी रिपोर्ट मांगी है।
शासन ने मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए सूबे के 18 जिला अस्पतालों में डायलिसिस यूनिट लगाने का फैसला लिया था। इनमें गोरखपुर का जिला अस्पताल भी शामिल है। इसके लिए दो हजार वर्ग फिट के कमरे की व्यवस्था अस्पताल प्रशासन को करनी है। कमरे में कुछ जरूरी काम अस्पताल प्रशासन को कराना है। तय बजट में सारे काम करने की बात ठेकेदार और इंजीनियर ने एसआईसी को दी थी, लेकिन हेरिटेज हॉस्पिटल की ओर से काम को अधूरा बताया गया। उनका कहना था कि काफी काम अभी बाकी हैं। जब तक सारे काम पूरे नहीं हो जाते तब तक यूनिट को शुरू नहीं की जा सकती। जबकि ठेकेदार व इंजीनियर का कहना है कि होने वाले कामों के लिए एक बिंदुवार सूची शासन को भेजी गई थी लेकिन कमरे के अंदर के सारे काम के बजट को काट दिया गया। कमरे के बाहरी कामों के लिए ही बजट दिया गया। ऐसे में मरीजों को मिलने वाली डायलिसिस यूनिट की सुविधा में विलंब हो रहा है।
अभी मेडिकल कॉलेज में ही सुविधा
गुर्दा रोग के गंभीर मरीजों को डायलिसिस कराने के लिए सरकारी स्तर पर सिर्फ मेडिकल कॉलेज में ही सुविधा उपलब्ध है। लेकिन यहां पर भी सभी मरीजों को समय से डायलिसिस की सुविधा नहीं मिल पाती। गरीब मरीजों को बड़ी धनराशि डायलिसिस पर निजी अस्पतालों में खर्च करनी पड़ रही है। जिला अस्पताल में इस सुविधा के शुरू होने से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
जिला अस्पताल में खुलने जा रही डायलिसिस सेंटर की राह में ठेकेदार की लापरवाही अड़ंगे डाल रही है। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर संचालित होने वाले इस सेंटर के संचालन के लिए वाराणसी की मेसर्स हेरिटेज हॉस्पिटल से करार हुआ है। हेरिटेज हॉस्पिटल के जिम्मेदारों ने सेंटर के निर्माण कार्य को अधूरा बताया है। इसको लेकरएसआईसी डॉ. दिनेश सोनकर ने सेंटर का निरीक्षण किया। इसमें कमी पाए जाने पर एसआईसी ने ठेकेदार व इंजीनियर से पूरी रिपोर्ट मांगी है।
शासन ने मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए सूबे के 18 जिला अस्पतालों में डायलिसिस यूनिट लगाने का फैसला लिया था। इनमें गोरखपुर का जिला अस्पताल भी शामिल है। इसके लिए दो हजार वर्ग फिट के कमरे की व्यवस्था अस्पताल प्रशासन को करनी है। कमरे में कुछ जरूरी काम अस्पताल प्रशासन को कराना है। तय बजट में सारे काम करने की बात ठेकेदार और इंजीनियर ने एसआईसी को दी थी, लेकिन हेरिटेज हॉस्पिटल की ओर से काम को अधूरा बताया गया। उनका कहना था कि काफी काम अभी बाकी हैं। जब तक सारे काम पूरे नहीं हो जाते तब तक यूनिट को शुरू नहीं की जा सकती। जबकि ठेकेदार व इंजीनियर का कहना है कि होने वाले कामों के लिए एक बिंदुवार सूची शासन को भेजी गई थी लेकिन कमरे के अंदर के सारे काम के बजट को काट दिया गया। कमरे के बाहरी कामों के लिए ही बजट दिया गया। ऐसे में मरीजों को मिलने वाली डायलिसिस यूनिट की सुविधा में विलंब हो रहा है।
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अभी मेडिकल कॉलेज में ही सुविधा
गुर्दा रोग के गंभीर मरीजों को डायलिसिस कराने के लिए सरकारी स्तर पर सिर्फ मेडिकल कॉलेज में ही सुविधा उपलब्ध है। लेकिन यहां पर भी सभी मरीजों को समय से डायलिसिस की सुविधा नहीं मिल पाती। गरीब मरीजों को बड़ी धनराशि डायलिसिस पर निजी अस्पतालों में खर्च करनी पड़ रही है। जिला अस्पताल में इस सुविधा के शुरू होने से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
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