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साहित्य किसी धर्म का नहीं : अखिलेंद्र
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
Updated Sun, 07 Oct 2018 09:52 PM IST
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अखिलेंद्र मिश्र।
- फोटो : amar ujala
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गोरखपुर। फिल्म अभिनेता और रंगमंच की दुनिया के जाने-माने कलाकार अखिलेंद्र मिश्र ने ‘गुफ्तगू’ को आगे बढ़ाया और कहा कि साहित्य किसी धर्म का नहीं होता। धर्म का आधारभूत तत्व एक है, यह भी साहित्य ही बताता है। साहित्य ही बताता है कि कोई धर्म बुरा नहीं। जरूरत साहित्य को ज्यादा पढ़ने की है। जब ज्ञान का गागर भरा रहेगा, तभी छलककर बाहर आएगा। इसका फायदा दूसरों को मिलेगा।
फिल्म अभिनेता ने कहा कि शब्द का मर्म अब खत्म हो गया है। हिंदी रोमन में लिखी जा रही है। अनुस्वार और चंद्र बिंदु गायब हो रहे हैं। चंद्र बिंदु को शिव और भगवती का रूप माना जाता है, जिसका साहित्य से गहरा नाता है। उन्होंने संत, आईपीएस, इंजीनियर और पुलिस कर्मियों की आत्महत्या पर चिंता जताई और कहा कि यह समाज कहां जा रहा है। शिक्षा सिर्फ कमाई या फिर कैंपस प्लेसमेंट के लिए हासिल की जा रही है। समाज में संस्कार का अभाव है। आपको नींद आती है, वही सफलता है। फ्लैट-कार खरीद लेना भर सफलता नहीं।
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फिल्म अभिनेता ने कहा कि शब्द का मर्म अब खत्म हो गया है। हिंदी रोमन में लिखी जा रही है। अनुस्वार और चंद्र बिंदु गायब हो रहे हैं। चंद्र बिंदु को शिव और भगवती का रूप माना जाता है, जिसका साहित्य से गहरा नाता है। उन्होंने संत, आईपीएस, इंजीनियर और पुलिस कर्मियों की आत्महत्या पर चिंता जताई और कहा कि यह समाज कहां जा रहा है। शिक्षा सिर्फ कमाई या फिर कैंपस प्लेसमेंट के लिए हासिल की जा रही है। समाज में संस्कार का अभाव है। आपको नींद आती है, वही सफलता है। फ्लैट-कार खरीद लेना भर सफलता नहीं।
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पाकिस्तान में पढ़े जाते हैं मुंशी प्रेमचंद
पाकिस्तान में भी मुंशी प्रेमचंद का साहित्य पढ़ा जाता है। कक्षा चार से 12वीं तक में 30 नंबर के सवाल पूछे जाते हैं लेकिन भारतीय अंग्रेजी के पीछे भाग रहे हैं। अखिलेंद्र ने फिल्म जगत पर भी तंज कसा और कहा कि हिंदी की खाने-कमाने वाले भी हिंदी बोलने में शर्माते हैं। अभिनय और साहित्य एक-दूसरे के पूरक हैं। हालांकि बोले, सिनेमा में अब गहराई नहीं बची है। बगैर यात्रा किए फिल्में बन रही हैं।
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