{"_id":"5c55f3bebdec22738166605e","slug":"151549136830-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहर की सड़कों पर ‘हाथी मेरे साथी’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहर की सड़कों पर ‘हाथी मेरे साथी’
Sun, 03 Feb 2019 01:17 AM IST
ajay Kumar
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Published by: ajay Kumar
Updated Sun, 03 Feb 2019 01:17 AM IST
विज्ञापन
शवयात्रा के साथ जिसने भी चार हाथियों को चलते देखा हैरान रह गया।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोरखपुर। शहर में शुक्रवार को उस हाथी की चर्चा थी जिसने अपने महावत को कुचल दिया था। शनिवार को लेकिन लोगों ने चार ऐसे हाथियों को देखा जो राजेश खन्ना और तनुजा अभिनीत फिल्म ‘हाथी मेरे साथी’ जैसे लगे। वर्ष 1971 में रिलीज हुई इस सुपरहिट फिल्म में चार हाथियों और अनाथ राजू (राजेश खन्ना) के बीच गहरे प्रेम की कहानी थी। यहां के इन चार हाथियों को देखकर बरबस करीब 50 साल पुरानी फिल्म याद आ गई।
नंदानगर से राप्ती नदी के राजघाट तक, शवयात्रा के साथ जिसने भी चार हाथियों को चलते देखा, हैरान रह गया। क्योंकि प्राय: सबने इससे पहले खुशी के मौके पर ही हाथियों को देखा था। हाथी भी गमगीन लोगों के साथ न सिर्फ कदमताल कर रहे थे बल्कि इनकी मनोदशा भी शायद उन्हीं इंसानों जैसी ही थी। परिवार के सदस्य और मित्र-रिश्तेदार नंदानगर निवासी पहलवान उमाशंकर यादव (58) के निधन से दुखी थे तो इन हाथियों को अपने अजीज मालिक के गुजरने का गम था। आखिर, उमाशंकर यादव ने इन हाथियों को अपने बच्चों की तरह जो पाला था। पहलवानी के साथ वह हाथियों से अपने इस प्यार के लिए पूरे इलाके में जाने जाते थे। राजघाट पर उनकी अंत्येष्टि के दौरान बेटे विनोद और अरविंद यादव के साथ उनके श्रीश्री उमा विद्या महाविद्यालय के लोग भी हाथियों की उदासी की चर्चा कर रहे थे।
विज्ञापन
नंदानगर से राप्ती नदी के राजघाट तक, शवयात्रा के साथ जिसने भी चार हाथियों को चलते देखा, हैरान रह गया। क्योंकि प्राय: सबने इससे पहले खुशी के मौके पर ही हाथियों को देखा था। हाथी भी गमगीन लोगों के साथ न सिर्फ कदमताल कर रहे थे बल्कि इनकी मनोदशा भी शायद उन्हीं इंसानों जैसी ही थी। परिवार के सदस्य और मित्र-रिश्तेदार नंदानगर निवासी पहलवान उमाशंकर यादव (58) के निधन से दुखी थे तो इन हाथियों को अपने अजीज मालिक के गुजरने का गम था। आखिर, उमाशंकर यादव ने इन हाथियों को अपने बच्चों की तरह जो पाला था। पहलवानी के साथ वह हाथियों से अपने इस प्यार के लिए पूरे इलाके में जाने जाते थे। राजघाट पर उनकी अंत्येष्टि के दौरान बेटे विनोद और अरविंद यादव के साथ उनके श्रीश्री उमा विद्या महाविद्यालय के लोग भी हाथियों की उदासी की चर्चा कर रहे थे।
विज्ञापन