ज्ञान व विज्ञान का मूल दर्शन है जिज्ञासा : हृदय नारायण दीक्षित

Gorakhpur, Uttar Pradesh, India Updated Thu, 24 Jan 2019 12:58 AM IST
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विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में मंचासीन विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित
विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में मंचासीन विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित - फोटो : amar ujala

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गोरखपुर। विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि ज्ञान और विज्ञान का मूल दर्शन जिज्ञासा है। जिज्ञासा का समाधान सिर्फ भारत के दर्शन में है। विज्ञान ऋग्वेद का अवदान है। आज विज्ञान के माध्यम से हम जो खोज कर रहे हैं, उसे पहले ही योग के जरिए विश्व परिदृश्य में प्रस्तुत किया जा चुका है। बस अब जरूरत है कि आज के युग में इसे प्रमाणिकता के साथ स्वीकार किया जाए।
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वह गोरखपुर विश्वविद्यालय के संवाद भवन में अधिष्ठाता छात्र कल्याण, महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ एवं उप्र हिंदी संस्थान लखनऊ की ओर से ‘प्राचीन भारत के वैज्ञानिक और उनके अवदान’’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन अवसर पर बतौर मुख्य वक्ता अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हम सभी जानते हैं कि भारतीय दर्शन का आधार भारतीय ऋषि परंपरा व हमारे पौराणिक ग्रंथ वेद हैं।
आयोजकों को बधाई देता हूं कि ऐसे आयोजन के माध्यम से भारतीय ऋषि, मुनियों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रमाणिकता देने का कार्य कर रहे हैं।
कार्यक्रम की प्रस्तावना अधिष्ठाता, छात्र-कल्याण एवं महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ विशेष कार्याधिकारी प्रो. रविशंकर सिंह ने प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि भारत वैदिक काल से ही महर्षियों के रूप में विशिष्ट वैज्ञानिकों का देश रहा है। भारत के वेदों का जब हम अध्ययन करते हैं, तब हम पाते हैं कि हमारे वेद आज विज्ञान के कितने नजदीक थे। विशिष्ट अतिथि हिंदी संस्थान लखनऊ के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. सदानंद प्रसाद गुप्त ने कहा कि प्राचीन भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों को प्राथमिक स्तर से पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। इससे विद्यार्थियों में अच्छे संस्कार पैदा होंगे। अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. वीके सिंह ने कहा कि हमारे जो प्राचीन विज्ञान थे, वे बहुत आगे थे। उन्होंने चरक और शैल्य चिकित्सा के बारे में बताया। कहा कि विज्ञान का मूल आधार योग, प्रयोग और उपयोग है। धन्यवाद ज्ञापन शिक्षक संघ अध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार सिंह ने तथा संचालन प्रो विनय सिंह ने किया।
इस मौके पर प्रो. राजवंत राव, प्रो. आरडी राय, प्रो. केशव सिंह, प्रो. मानवेंद्र प्रताप सिंह, प्रो. डीके सिंह, प्रो. दिव्यारानी सिंह, प्रो. नंदिता सिंह, डॉॅ. प्रवीण कुमार सिंह, डॉ. वेद प्रकाश राय, निर्भय नारायण सिंह, जितेंद्र बहादुर सिंह आदि मौजूद रहे।
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