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घटिया सड़क निर्माण पर मंडी परिषद के जेई निलंबित
Updated Fri, 11 Aug 2017 01:47 AM IST
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गोरखपुर।
मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले काम में लापरवाही मंडी परिषद के जेई त्रियोगी नारायण भट्ट के लिए मंहगी पड़ गई। अपर निदेशक मंडी जेपी सिंह ने गुरुवार को उन्हें निलंबित कर दिया। उन्हें मुख्यालय में संबद्ध कर दिया गया है और डीडीसी मुख्यालय को जांच सौंपी है। उन्होंने बताया उनके लखनऊ पहुंचते ही आदेश भी जारी हो जाएगा। कामों का भुगतान न हो इसके लिए भी वे डीएम को पत्र लिखेंगे। उन्होंने विभाग के दूसरे स्थानीय अफसरों को भी चेताया कि मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले कामों में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निर्माण कार्य में समय के साथ ही गुणवत्ता का ध्यान भी रखना होगा।
अपर निदेशक मंडी दो दिवसीय दौरे पर बुधवार को गोरखपुर आए थे। पहले दिन उन्होंने मंडी का निरीक्षण किया था। इस दौरान वहां गंदगी का अंबार और जगह-जगह जलभराव मिलने पर मंडी अफसरों को जमकर फटकार लगाई थी। संयुक्त निदेशक निर्माण के खिलाफ उन्होंने शासन को रिपोर्ट करने को भी कहा। गुरुवार को अपर निदेशक ने सहजनवां के पाली में मंडी परिषद की तरफ से बनवाई गई दो सड़कों का निरीक्षण किया। इन दोनों सड़कों का निर्माण मुख्यमंत्री की गड्ढामुक्त सड़क योजना के तहत किया गया था। दोनों को एक ही जेई त्रियोगी नारायण भट्ट ने बनवाया था। निरीक्षण के दौरान पाली ब्लॉक में मिनवा नहर से नरौली तक 1.2 किलोमीटर लंबी सड़क पर कहीं पर भी त्री मिक्स कारपेटिंग (गुणवत्ता बढ़ाने के लिए डामर का इस्तेमाल) होना नहीं पाया गया। जबकि 17.64 लाख रुपये लागत की सड़क में 8.30 लाख रुपये सिर्फ गुणवत्ता बढ़ाने के लिए त्री मिक्स कारपेटिंग के नाम पर स्वीकृत हुए थे। निरीक्षण के बाद अपर निदेशक ने डोमहर रेलवे ढाला के पास बनी सड़क का निरीक्षण किया। वहां भी इसी तरह की गड़बड़ी पकड़ में आई। 12.81 लाख रुपये लागत से बनी सड़क में त्री मिक्स कारपेटिंग के लिए 5.71 लाख रुपये का बजट स्वीकृत था, मगर काम नहीं कराया गया। अपर निदेशक का कहना है कि त्री मिक्स कारपेटिंग नहीं कराए जाने से ये दोनों ही सड़कें कुछ ही महीनों में उखड़ जाएंगी।
मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले काम में लापरवाही मंडी परिषद के जेई त्रियोगी नारायण भट्ट के लिए मंहगी पड़ गई। अपर निदेशक मंडी जेपी सिंह ने गुरुवार को उन्हें निलंबित कर दिया। उन्हें मुख्यालय में संबद्ध कर दिया गया है और डीडीसी मुख्यालय को जांच सौंपी है। उन्होंने बताया उनके लखनऊ पहुंचते ही आदेश भी जारी हो जाएगा। कामों का भुगतान न हो इसके लिए भी वे डीएम को पत्र लिखेंगे। उन्होंने विभाग के दूसरे स्थानीय अफसरों को भी चेताया कि मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले कामों में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निर्माण कार्य में समय के साथ ही गुणवत्ता का ध्यान भी रखना होगा।
अपर निदेशक मंडी दो दिवसीय दौरे पर बुधवार को गोरखपुर आए थे। पहले दिन उन्होंने मंडी का निरीक्षण किया था। इस दौरान वहां गंदगी का अंबार और जगह-जगह जलभराव मिलने पर मंडी अफसरों को जमकर फटकार लगाई थी। संयुक्त निदेशक निर्माण के खिलाफ उन्होंने शासन को रिपोर्ट करने को भी कहा। गुरुवार को अपर निदेशक ने सहजनवां के पाली में मंडी परिषद की तरफ से बनवाई गई दो सड़कों का निरीक्षण किया। इन दोनों सड़कों का निर्माण मुख्यमंत्री की गड्ढामुक्त सड़क योजना के तहत किया गया था। दोनों को एक ही जेई त्रियोगी नारायण भट्ट ने बनवाया था। निरीक्षण के दौरान पाली ब्लॉक में मिनवा नहर से नरौली तक 1.2 किलोमीटर लंबी सड़क पर कहीं पर भी त्री मिक्स कारपेटिंग (गुणवत्ता बढ़ाने के लिए डामर का इस्तेमाल) होना नहीं पाया गया। जबकि 17.64 लाख रुपये लागत की सड़क में 8.30 लाख रुपये सिर्फ गुणवत्ता बढ़ाने के लिए त्री मिक्स कारपेटिंग के नाम पर स्वीकृत हुए थे। निरीक्षण के बाद अपर निदेशक ने डोमहर रेलवे ढाला के पास बनी सड़क का निरीक्षण किया। वहां भी इसी तरह की गड़बड़ी पकड़ में आई। 12.81 लाख रुपये लागत से बनी सड़क में त्री मिक्स कारपेटिंग के लिए 5.71 लाख रुपये का बजट स्वीकृत था, मगर काम नहीं कराया गया। अपर निदेशक का कहना है कि त्री मिक्स कारपेटिंग नहीं कराए जाने से ये दोनों ही सड़कें कुछ ही महीनों में उखड़ जाएंगी।
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