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स्कूल प्रबंधक और प्रिंसिपल पर केस दर्ज का आदेश
Updated Sat, 16 Sep 2017 10:19 PM IST
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गोरखपुर।
सूरजकुंड कॉलोनी स्थित स्टेपिंग स्टोन इंटर कॉलेज के शिक्षक ने प्रबंधक राजीव गुप्ता और प्रिंसिपल अपनीत गुप्ता पर धोखाधड़ी कर वेतन हड़पने का आरोप लगाया है। शिकायत पर एसीजेएम बाकर शमीम रिजवी ने गोरखनाथ पुलिस को केस दर्ज कर विवेचना का आदेश दिया है।
कोर्ट में बेतियाहाता निवासी उमेश कुमार ठाकुर की ओर से गिरिजेश कुमार शुक्ला एडवोकेट का कथन था कि वादी की पत्नी रुहिना ठाकुर कॉलेज में 2011 से 2017 तक बतौर टीचर कार्यरत थीं। विद्यालय की तरफ से एक मौखिक नियम लागू था कि जून माह का वेतन चार किस्तों में वेतन के साथ समायोजित किया जाएगा। 2016-17 में मौखिक रूप से यह नियम बनाया गया कि सभी टीचर का एक माह का वेतन कॉलेज के पास रहेगा। कोई भी टीचर यदि सत्र पूरा करके स्कूल छोड़ता है तो उसका एक माह का वेतन दो माह के अंदर भुगतान कर दिया जाएगा। वादी की पत्नी सभी शर्तों को पूरा करते हुए 31 मार्च 17 को शैक्षिक सत्र पूरा करके लिखित रूप से निजी कारणों का हवाला देते हुए स्कूल छोड़ दिया। लेकिन कॉलेज की तरफ से वादी की पत्नी का 22500 रुपए अब तक नहीं दिया गया। कोर्ट ने मामले को संज्ञेय प्रकृति का पाते हुए मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया।
सूरजकुंड कॉलोनी स्थित स्टेपिंग स्टोन इंटर कॉलेज के शिक्षक ने प्रबंधक राजीव गुप्ता और प्रिंसिपल अपनीत गुप्ता पर धोखाधड़ी कर वेतन हड़पने का आरोप लगाया है। शिकायत पर एसीजेएम बाकर शमीम रिजवी ने गोरखनाथ पुलिस को केस दर्ज कर विवेचना का आदेश दिया है।
कोर्ट में बेतियाहाता निवासी उमेश कुमार ठाकुर की ओर से गिरिजेश कुमार शुक्ला एडवोकेट का कथन था कि वादी की पत्नी रुहिना ठाकुर कॉलेज में 2011 से 2017 तक बतौर टीचर कार्यरत थीं। विद्यालय की तरफ से एक मौखिक नियम लागू था कि जून माह का वेतन चार किस्तों में वेतन के साथ समायोजित किया जाएगा। 2016-17 में मौखिक रूप से यह नियम बनाया गया कि सभी टीचर का एक माह का वेतन कॉलेज के पास रहेगा। कोई भी टीचर यदि सत्र पूरा करके स्कूल छोड़ता है तो उसका एक माह का वेतन दो माह के अंदर भुगतान कर दिया जाएगा। वादी की पत्नी सभी शर्तों को पूरा करते हुए 31 मार्च 17 को शैक्षिक सत्र पूरा करके लिखित रूप से निजी कारणों का हवाला देते हुए स्कूल छोड़ दिया। लेकिन कॉलेज की तरफ से वादी की पत्नी का 22500 रुपए अब तक नहीं दिया गया। कोर्ट ने मामले को संज्ञेय प्रकृति का पाते हुए मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया।
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