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ग्राम पंचायत के धन से सुधरेगी स्कूलों की सूरत
Updated Fri, 25 Aug 2017 11:59 PM IST
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कुशीनगर। जिले के परिषदीय स्कूलों में जलनिकासी, पेयजल, मरम्मत और सफाई आदि का कार्य अब ग्राम पंचायतें अपने मद से कराएंगी। इसके लिए डीएम ने पंचायतीराज विभाग को निर्देश जारी कर दिया है। साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग से ऐसे स्कूलों की सूची मांगी गई है जहां बारिश व बाढ़ के चलते पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
कुशीनगर जिले में 2379 प्राथमिक व 824 जूनियर हाईस्कूल हैं। विभाग की तरफ से इन स्कूलों को मरम्मत आदि के लिए आवश्यक बजट नहीं मिल पाता है। जिन स्कूलों का फील्ड नीचे है वहां बारिश का पानी एकत्र होने की वजह से दिक्कत आती है। इस बार हुई बरसात व बाढ़ के चलते खड्डा, दुदही व सेवरही के अलावा पडरौना, कसया, कप्तानगंज आदि ब्लॉकों के स्कूलों में भी पढ़ाई प्रभावित हो गई। वजह यह है कि जलनिकासी का समुचित प्रबंध नहीं होने और स्कूलों का प्रांगण नीचे होने की वजह से बारिश का पानी यहां भर गया। कई दिन तक पानी भरे रहने से संक्रामक बीमारियों के फैलने का भी खतरा है। इसके अलावा अधिकांश स्कूलों में फर्श टूटा होने, शौचालय की स्थिति ठीक न होने तथा इंडिया मार्का हैंडपंप खराब होने की शिकायत है। हैंडपंप रिबोर व मरम्मत का कार्य अब ग्राम पंचायतों के अधिकार क्षेत्र में आ गया है। इसके अलावा शौचालय तथा स्कूल की टूटी फर्श का मरम्मत कराने का अधिकार भी ग्राम पंचायतों को पहले से ही है। इसको देखते हुए डीएम आंद्रा वामसी ने जिले की सभी ग्राम पंचायतों के लिए यह निर्देश जारी किया है कि उस ग्राम पंचायत में स्थित परिषदीय विद्यालय में जलनिकासी का प्रबंध, मिट्टी भराई, पेयजल के लिए हैंडपंप की मरम्मत या रिबोर, शौचालय की सफाई, आवागमन के लिए सड़क की मरम्मत आदि का कार्य ग्राम पंचायतें अपने मद से ही कराएंगी। साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग को भी निर्देशित किया गया है कि ब्लॉकवार ऐसे स्कूलों की सूची बना लें, जिसमें ग्राम पंचायत के बजट से मरम्मत व अन्य जरूरी कार्य कराकर स्कूल को बेहतर बनाया जा सके।
बीएसए हेमंत राव का कहना है कि डीएम के निर्देश पर सभी खंड शिक्षाधिकारियों से ऐसे स्कूलों की सूची मांगी गई है जहां जलभराव या रास्ता खराब होने के चलते पढ़ाई बाधित होती है। साथ ही खराब हैंडपंप, शौचालय, टूटे फर्श आदि से संबंधित जानकारी भी जुटाई जा रही है। डीएम आंद्रा वामसी का कहना है कि अगले महीने अभियान चलाकर पूरे जिले में स्कूलों में मिट्टी भराई, फर्श मरम्मत, शौचालय मरम्मत, पेयजल का प्रबंध तथा अन्य वह जरूरी कार्य जो ग्राम पंचायत के बजट से कराना संभव है, उसे कराया जाएगा।
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कुशीनगर जिले में 2379 प्राथमिक व 824 जूनियर हाईस्कूल हैं। विभाग की तरफ से इन स्कूलों को मरम्मत आदि के लिए आवश्यक बजट नहीं मिल पाता है। जिन स्कूलों का फील्ड नीचे है वहां बारिश का पानी एकत्र होने की वजह से दिक्कत आती है। इस बार हुई बरसात व बाढ़ के चलते खड्डा, दुदही व सेवरही के अलावा पडरौना, कसया, कप्तानगंज आदि ब्लॉकों के स्कूलों में भी पढ़ाई प्रभावित हो गई। वजह यह है कि जलनिकासी का समुचित प्रबंध नहीं होने और स्कूलों का प्रांगण नीचे होने की वजह से बारिश का पानी यहां भर गया। कई दिन तक पानी भरे रहने से संक्रामक बीमारियों के फैलने का भी खतरा है। इसके अलावा अधिकांश स्कूलों में फर्श टूटा होने, शौचालय की स्थिति ठीक न होने तथा इंडिया मार्का हैंडपंप खराब होने की शिकायत है। हैंडपंप रिबोर व मरम्मत का कार्य अब ग्राम पंचायतों के अधिकार क्षेत्र में आ गया है। इसके अलावा शौचालय तथा स्कूल की टूटी फर्श का मरम्मत कराने का अधिकार भी ग्राम पंचायतों को पहले से ही है। इसको देखते हुए डीएम आंद्रा वामसी ने जिले की सभी ग्राम पंचायतों के लिए यह निर्देश जारी किया है कि उस ग्राम पंचायत में स्थित परिषदीय विद्यालय में जलनिकासी का प्रबंध, मिट्टी भराई, पेयजल के लिए हैंडपंप की मरम्मत या रिबोर, शौचालय की सफाई, आवागमन के लिए सड़क की मरम्मत आदि का कार्य ग्राम पंचायतें अपने मद से ही कराएंगी। साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग को भी निर्देशित किया गया है कि ब्लॉकवार ऐसे स्कूलों की सूची बना लें, जिसमें ग्राम पंचायत के बजट से मरम्मत व अन्य जरूरी कार्य कराकर स्कूल को बेहतर बनाया जा सके।
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बीएसए हेमंत राव का कहना है कि डीएम के निर्देश पर सभी खंड शिक्षाधिकारियों से ऐसे स्कूलों की सूची मांगी गई है जहां जलभराव या रास्ता खराब होने के चलते पढ़ाई बाधित होती है। साथ ही खराब हैंडपंप, शौचालय, टूटे फर्श आदि से संबंधित जानकारी भी जुटाई जा रही है। डीएम आंद्रा वामसी का कहना है कि अगले महीने अभियान चलाकर पूरे जिले में स्कूलों में मिट्टी भराई, फर्श मरम्मत, शौचालय मरम्मत, पेयजल का प्रबंध तथा अन्य वह जरूरी कार्य जो ग्राम पंचायत के बजट से कराना संभव है, उसे कराया जाएगा।
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