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मासूमों की मौत के मामले में दो और डॉक्टर निलंबित
Updated Fri, 25 Aug 2017 07:47 PM IST
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गोरखपुर।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों के मामले में शुक्रवार को दो और डॉक्टरों को निलंबित कर दिया गया। कॉलेज प्रशासन के पास राज्यपाल कार्यालय से एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. सतीश कुमार और एनआरएचएम के नोडल अफसर डॉ. कफील खान के निलंबन का आदेश आ गया है।
मामले में प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र को पहले निलंबित कर उन्हें महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया था। बाद में मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव राजीव कुमार से पूरे मामले की जांच कराई तो नौ लोगों को दोषी पाते हुए उनके खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। अब विभागीय कार्रवाई का सिलसिला जारी है। शुक्रवार को कार्रवाई करते हुए दो और आरोपियों को निलंबित कर दिया गया। मामले में अब तक पूर्व प्रिंसिपल सहित आठ लोगों को निलंबित किया जा चुका है। इन सब पर आपराधिक मामले भी दर्ज हैं।
मामले में अब तक सस्पेंड
पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र, उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला, डॉ. सतीश, डॉ. कफील खान, चीफ फॉर्मासिस्ट गजानन जायसवाल, लिपिक संजय, सुधीर और उदय। अंतिम आरोपी पुष्पा सेल्स के मालिक मनीष भंडारी हैं। उन पर मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है।
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डॉ. शहबाज बने एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष
डॉक्टरों का निलंबन आदेश मिलने के बाद प्राचार्य ने एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी डॉ. शहबाज अहमद को दे दी है। साथ ही उन्होंने ऑक्सीजन मेंटीनेंस का जिम्मा दंत एवं मुख रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार यादव को दिया है।
लेखा विभाग में नई व्यवस्था
लेखा विभाग के दो समेत कुल तीन बाबुओं के एक साथ निलंबन के बाद उनकी जिम्मेदारी संभालने के लिए नई व्यवस्था की गई है। शुक्रवार को प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने दूसरे विभाग में तैनात शंकर वर्मा को लेखा विभाग में समायोजित करने का आदेश जारी किया। ये मेडिकल कॉलेज के नेहरू चिकित्सालय में तैनात रहे निलंबित बाबू सुधीर का काम भी देखेंगे।
अनिल होंगे चीफ फॉर्मासिस्ट
हादसे में निलंबित किए गए चीफ फार्मासिस्ट गजानन जायसवाल का काम अनिल दुबे देखेंगे। शुक्रवार को एसआईसी डॉ. रमाशंकर शुक्ला ने इसका आदेश जारी किया। चीफ फार्मासिस्ट अनिल दुबे ऑक्सीजन खरीद और भुगतान से जुड़े काम भी देखेंगे।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों के मामले में शुक्रवार को दो और डॉक्टरों को निलंबित कर दिया गया। कॉलेज प्रशासन के पास राज्यपाल कार्यालय से एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. सतीश कुमार और एनआरएचएम के नोडल अफसर डॉ. कफील खान के निलंबन का आदेश आ गया है।
मामले में प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र को पहले निलंबित कर उन्हें महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया था। बाद में मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव राजीव कुमार से पूरे मामले की जांच कराई तो नौ लोगों को दोषी पाते हुए उनके खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। अब विभागीय कार्रवाई का सिलसिला जारी है। शुक्रवार को कार्रवाई करते हुए दो और आरोपियों को निलंबित कर दिया गया। मामले में अब तक पूर्व प्रिंसिपल सहित आठ लोगों को निलंबित किया जा चुका है। इन सब पर आपराधिक मामले भी दर्ज हैं।
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मामले में अब तक सस्पेंड
पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र, उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला, डॉ. सतीश, डॉ. कफील खान, चीफ फॉर्मासिस्ट गजानन जायसवाल, लिपिक संजय, सुधीर और उदय। अंतिम आरोपी पुष्पा सेल्स के मालिक मनीष भंडारी हैं। उन पर मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है।
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डॉ. शहबाज बने एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष
डॉक्टरों का निलंबन आदेश मिलने के बाद प्राचार्य ने एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी डॉ. शहबाज अहमद को दे दी है। साथ ही उन्होंने ऑक्सीजन मेंटीनेंस का जिम्मा दंत एवं मुख रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार यादव को दिया है।
लेखा विभाग में नई व्यवस्था
लेखा विभाग के दो समेत कुल तीन बाबुओं के एक साथ निलंबन के बाद उनकी जिम्मेदारी संभालने के लिए नई व्यवस्था की गई है। शुक्रवार को प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने दूसरे विभाग में तैनात शंकर वर्मा को लेखा विभाग में समायोजित करने का आदेश जारी किया। ये मेडिकल कॉलेज के नेहरू चिकित्सालय में तैनात रहे निलंबित बाबू सुधीर का काम भी देखेंगे।
अनिल होंगे चीफ फॉर्मासिस्ट
हादसे में निलंबित किए गए चीफ फार्मासिस्ट गजानन जायसवाल का काम अनिल दुबे देखेंगे। शुक्रवार को एसआईसी डॉ. रमाशंकर शुक्ला ने इसका आदेश जारी किया। चीफ फार्मासिस्ट अनिल दुबे ऑक्सीजन खरीद और भुगतान से जुड़े काम भी देखेंगे।