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देश के आर्थिक चिंतन को समर्पित थे पंडित दीनदयाल
Updated Mon, 25 Sep 2017 08:27 PM IST
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गोरखपुर।
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के संवाद भवन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि भारतीय समाज विज्ञान अनुसंधान के सदस्य एवं प्रख्यात समाजशास्त्री डॉ. पीवी कृष्ण भट्ट ने कहा कि पंडित दीनदयाल का पूरा जीवन भारतीय दार्शनिक पद्धति और भारत के लिए उपयुक्त आर्थिक चिंतन के लिए समर्पित था। उनके विचारों को प्रतिष्ठित करके हम राष्ट्र को उन्नति के पथ पर ले जा सकते हैं। कहा कि जन्मशताब्दी वर्ष में आयोजित होने वाले समारोह पंडित दीनदयाल के व्यक्तित्व से कुछ सीखने-समझनेे और उसमें प्रस्तुत श्रेष्ठ तत्वों को अपने आचरण में समाहित करने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।
मुख्य वक्ता पांचजन्य तथा ऑर्गेनाइजर के समूह संपादक जगदीश उपासने ने कहा कि युवा ही पूरी दुनिया में और हर काल खंड में बदलाव के वाहक रहे हैं । हम उन नीतियों और योजनाओं का निर्माण करें जो हमारे देश और उसकी परिस्थितियों के अनुकूल हो। दीनदयाल जी ने अपने चिंतन का आधार इसी को बनाया था। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. विजय कृष्ण सिंह ने कहा कि पुरातन काल से अनेकों हमलों के बावजूद भारतीय संस्कृति अपनी शुद्धि और समृद्धि के लिए दुनिया भर में जानी जाती है, तो उसका कारण हमारी परंपरा के मूल तत्व हैं।
अतिथियों का स्वागत संयोजक प्रो. प्रकाश मणि त्रिपाठी ने किया तथा समारोह का संचालन प्रो. दिनेश यादव ने किया। इस अवसर पर प्रो. सुग्रीव नाथ तिवारी, प्रो. शैलजा सिंह, प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा, प्रो. राजवंत राव, प्रो. विपुला दुबे, प्रो ईश्वर शरण विश्वकर्मा, प्रो विनोद कुमार सिंह, प्रो. रवि शंकर सिंह, प्रो सुधीर श्रीवास्तव आदि मौजूद थे।
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के संवाद भवन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि भारतीय समाज विज्ञान अनुसंधान के सदस्य एवं प्रख्यात समाजशास्त्री डॉ. पीवी कृष्ण भट्ट ने कहा कि पंडित दीनदयाल का पूरा जीवन भारतीय दार्शनिक पद्धति और भारत के लिए उपयुक्त आर्थिक चिंतन के लिए समर्पित था। उनके विचारों को प्रतिष्ठित करके हम राष्ट्र को उन्नति के पथ पर ले जा सकते हैं। कहा कि जन्मशताब्दी वर्ष में आयोजित होने वाले समारोह पंडित दीनदयाल के व्यक्तित्व से कुछ सीखने-समझनेे और उसमें प्रस्तुत श्रेष्ठ तत्वों को अपने आचरण में समाहित करने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।
मुख्य वक्ता पांचजन्य तथा ऑर्गेनाइजर के समूह संपादक जगदीश उपासने ने कहा कि युवा ही पूरी दुनिया में और हर काल खंड में बदलाव के वाहक रहे हैं । हम उन नीतियों और योजनाओं का निर्माण करें जो हमारे देश और उसकी परिस्थितियों के अनुकूल हो। दीनदयाल जी ने अपने चिंतन का आधार इसी को बनाया था। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. विजय कृष्ण सिंह ने कहा कि पुरातन काल से अनेकों हमलों के बावजूद भारतीय संस्कृति अपनी शुद्धि और समृद्धि के लिए दुनिया भर में जानी जाती है, तो उसका कारण हमारी परंपरा के मूल तत्व हैं।
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अतिथियों का स्वागत संयोजक प्रो. प्रकाश मणि त्रिपाठी ने किया तथा समारोह का संचालन प्रो. दिनेश यादव ने किया। इस अवसर पर प्रो. सुग्रीव नाथ तिवारी, प्रो. शैलजा सिंह, प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा, प्रो. राजवंत राव, प्रो. विपुला दुबे, प्रो ईश्वर शरण विश्वकर्मा, प्रो विनोद कुमार सिंह, प्रो. रवि शंकर सिंह, प्रो सुधीर श्रीवास्तव आदि मौजूद थे।
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