{"_id":"5cc9f49cbdec2207177149d9","slug":"11556739228-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"थीसिस का मैटर चुराए तो पकड़े जाएंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
थीसिस का मैटर चुराए तो पकड़े जाएंगे
Thu, 02 May 2019 01:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 02 May 2019 01:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोरखपुर। अब शोधपत्र का मैटर चुराकर इस्तेमाल करने वाले झट से पकड़े जा सकेंगे। गोरखपुर विश्वविद्यालय में 2013 के बाद के हुए सभी शोध कार्यों की थीसिस ऑनलाइन होगी। केंद्रीय ग्रंथालय ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। विभागों से इसके लिए जानकारी जुटाई जा रही है। नया सत्र शुरू होने से पहले सभी थीसिस को शोध गंगा पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
यूजीसी के इन्फ्लिबनेट परियोजना के कोआर्डिनेटर जगदीश अरोरा और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वीके सिंह ने बीते साल एक एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत थीसिस को शोध गंगा पोर्टल पर अपलोड किया जाना है। शोध गंगा पर अभी 45 हजार से ज्यादा थीसिस उपलब्ध हैं। इसी क्रम में अब केंद्रीय ग्रंथालय में पुस्तकों के साथ ही थीसिस के डिजिटाइजेशन का काम भी चल रहा है। विश्वविद्यालय में बहुत सारी ऐसी थीसिस हैं जिनका कुछ लोगों ने बाद में इस्तेमाल कर लिया। लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा। रिसर्च के दौरान यदि किसी शोधार्थी ने अन्य शोधार्थी की थीसिस से चैप्टर चोरी किया तो यह पकड़ा जाएगा।
विज्ञापन
नोट: आपको हमारी यह स्टोरी कैसी लगी इस पर अपना फीडबैक नीचे बने कमेंट बॉक्स में जरूर दें।
विज्ञापन
यूजीसी के इन्फ्लिबनेट परियोजना के कोआर्डिनेटर जगदीश अरोरा और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वीके सिंह ने बीते साल एक एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत थीसिस को शोध गंगा पोर्टल पर अपलोड किया जाना है। शोध गंगा पर अभी 45 हजार से ज्यादा थीसिस उपलब्ध हैं। इसी क्रम में अब केंद्रीय ग्रंथालय में पुस्तकों के साथ ही थीसिस के डिजिटाइजेशन का काम भी चल रहा है। विश्वविद्यालय में बहुत सारी ऐसी थीसिस हैं जिनका कुछ लोगों ने बाद में इस्तेमाल कर लिया। लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा। रिसर्च के दौरान यदि किसी शोधार्थी ने अन्य शोधार्थी की थीसिस से चैप्टर चोरी किया तो यह पकड़ा जाएगा।
विज्ञापन
दुर्लभ पुस्तकों का संग्रह भी होगा
विश्वविद्यालय के केंद्रीय ग्रंथालय में दुर्लभ पुस्तकों का भी संग्रह उपलब्ध रहेगा। ऐसी पुस्तकों को छांटकर डिलिटलाइज किया जाएगा और इसके बाद शोध गंगा पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इसके लिए विभागों से भी दुर्लभ पुस्तकों का ब्योरा मांगा गया है।
विज्ञापन
नोट: आपको हमारी यह स्टोरी कैसी लगी इस पर अपना फीडबैक नीचे बने कमेंट बॉक्स में जरूर दें।