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योग से वैश्विक मंच पर बढ़ा भारत की प्राचीन परंपरा का मान : योगी
Sat, 22 Jun 2019 01:52 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
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Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 22 Jun 2019 01:52 AM IST
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विश्वविद्यालय के दीक्षा भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
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गोरखपुर। विश्व योग दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय के दीक्षा भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज के दिन हम सबको गौरव की अनुभूति करनी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से भारत की प्राचीन परंपरा योग को वैश्विक मंच पर स्थापित होने में सफलता मिली है। 11 दिसम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र संघ ने भारत सरकार के प्रयास को स्वीकार करते हुए योग को मान्यता दी और 21 जून को विश्व योग दिवस घोषित किया। इस दिन को पूरे विश्व ने योग दिवस के रूप में मनाकर भारत की परंपरा में विश्वास व्यक्त किया है।
सीएम योगी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ से विश्व के 193 देश जुड़े हैं। योग दिवस पर जिस तरह से भारत के पार्कों व अन्य प्रमुख स्थानों पर योग के प्रति लोगों का उत्साह देखा गया ठीक उसी तरह से विश्व तमाम देशों में भी इस दिन सामूहिक योगाभ्यास का आयोजन किया गया। चीन जैसे देश में भी योग दिवस वृहद पैमाने पर मनाया गया। इसका मतलब यह हुआ कि योग से जुड़ते हुए पूरी दुनिया ने भारत की आध्यात्मिक परंपरा में विश्वास व्यक्त किया है। इससे यह साबित हो गया कि पूरी दुनिया भारत की ऋषि परंपरा का प्रसाद प्राप्त करना चाहती है।
मुख्यमंत्री ने कुंभ का जिक्र करते हुए कहा कि इस साल कुंभ आयोजित करने का सौभाग्य उन्हें प्राप्त हुआ। पहले कुंभ का मतलब होता था अराजकता, गंदगी, अव्यवस्था पर उनकी सरकार ने कुंभ की सूरत बदल कर इसे वैश्विक मान्यता दिलाई है। यूनेस्को ने इसे मानवता की धरोहर के रूप में मान्यता दी। यह पहला अवसर था जब विश्व के 71 देशों ने कुंभ में अपने राष्ट्र ध्वज स्थापित किये। हमने प्रयास किया कि यूनेस्को से जुड़े सभी देश इसमें सहभागी बनें। यूएनओ ने जिस तरह से योग को मान्यता दी उसी तरह से कुंभ को भी मान्यता मिली। कुंभ में देश के छह लाख गांवों का प्रतिनिधित्व हुआ तो विश्व भर से 34 करोड़ लोगों इसमें शामिल हुए। 183 देशों ने इसे अपने से जोड़ कर अपने को गौरवशाली माना। ‘ कहा कैसा अद्भुत नजारा, कैसा मानव समागम है ’।
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योगी ने कहा कि गोरखपुर गोरखनाथ की साधना स्थली है। क्रियात्मक योग के प्रणेता गुरु गोरखनाथ रहे हैं। जितनी भी यौगिक क्रियाएं हैं उसके जनक गुरु गोरखनाथ हैं। प्रधानमंत्री के प्रयास से वैश्विक मंच पर योग और गुरु गोरखनाथ के साथ गोरखपुर की पहचान स्थापित हो गई है। हम योग के माध्यम से दुनिया को निरोग बना सकते हैं। उन्होंने मोदी के स्वच्छ भारत मिशन का जिक्र किया तथा उसके फायदे भी बताए। कहा कि इसका उदाहरण गोरखपुर है। जहां गंदगी और प्रदूषित जल के कारण इंसेफेलाइटिस से हर साल सैकड़ों बच्चों की मौत होती थी। स्वच्छता अभियान चलाकर उस पर नियंत्रण किया। उसके लिए मोदी ने हर घर में शौचालय का निर्माण कराया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। मुख्य अतिथि को उत्तरीय और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को आरएस निर्झर, कुलपति वीके सिंह ने संबोधित किया।
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सीएम योगी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ से विश्व के 193 देश जुड़े हैं। योग दिवस पर जिस तरह से भारत के पार्कों व अन्य प्रमुख स्थानों पर योग के प्रति लोगों का उत्साह देखा गया ठीक उसी तरह से विश्व तमाम देशों में भी इस दिन सामूहिक योगाभ्यास का आयोजन किया गया। चीन जैसे देश में भी योग दिवस वृहद पैमाने पर मनाया गया। इसका मतलब यह हुआ कि योग से जुड़ते हुए पूरी दुनिया ने भारत की आध्यात्मिक परंपरा में विश्वास व्यक्त किया है। इससे यह साबित हो गया कि पूरी दुनिया भारत की ऋषि परंपरा का प्रसाद प्राप्त करना चाहती है।
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मुख्यमंत्री ने कुंभ का जिक्र करते हुए कहा कि इस साल कुंभ आयोजित करने का सौभाग्य उन्हें प्राप्त हुआ। पहले कुंभ का मतलब होता था अराजकता, गंदगी, अव्यवस्था पर उनकी सरकार ने कुंभ की सूरत बदल कर इसे वैश्विक मान्यता दिलाई है। यूनेस्को ने इसे मानवता की धरोहर के रूप में मान्यता दी। यह पहला अवसर था जब विश्व के 71 देशों ने कुंभ में अपने राष्ट्र ध्वज स्थापित किये। हमने प्रयास किया कि यूनेस्को से जुड़े सभी देश इसमें सहभागी बनें। यूएनओ ने जिस तरह से योग को मान्यता दी उसी तरह से कुंभ को भी मान्यता मिली। कुंभ में देश के छह लाख गांवों का प्रतिनिधित्व हुआ तो विश्व भर से 34 करोड़ लोगों इसमें शामिल हुए। 183 देशों ने इसे अपने से जोड़ कर अपने को गौरवशाली माना। ‘ कहा कैसा अद्भुत नजारा, कैसा मानव समागम है ’।
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योगी ने कहा कि गोरखपुर गोरखनाथ की साधना स्थली है। क्रियात्मक योग के प्रणेता गुरु गोरखनाथ रहे हैं। जितनी भी यौगिक क्रियाएं हैं उसके जनक गुरु गोरखनाथ हैं। प्रधानमंत्री के प्रयास से वैश्विक मंच पर योग और गुरु गोरखनाथ के साथ गोरखपुर की पहचान स्थापित हो गई है। हम योग के माध्यम से दुनिया को निरोग बना सकते हैं। उन्होंने मोदी के स्वच्छ भारत मिशन का जिक्र किया तथा उसके फायदे भी बताए। कहा कि इसका उदाहरण गोरखपुर है। जहां गंदगी और प्रदूषित जल के कारण इंसेफेलाइटिस से हर साल सैकड़ों बच्चों की मौत होती थी। स्वच्छता अभियान चलाकर उस पर नियंत्रण किया। उसके लिए मोदी ने हर घर में शौचालय का निर्माण कराया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। मुख्य अतिथि को उत्तरीय और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को आरएस निर्झर, कुलपति वीके सिंह ने संबोधित किया।