महीने भर में तैयार होगी गोरखपुर मेट्रो की डीपीआर
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पहली बार गोरखपुर आए श्रीधरन ने कहा कि यहां काफ ी अच्छा माहौल है। मेट्रो कब शुरू होगी, कैसे होगी इसपर अभी काफ ी कुछ काम होना है। उन्होंने कहा कि मेट्रो के दो कॉरिडोर प्रस्तावित है। एक रूट 18 किलोमीटर का तो दूसरा 12 किलोमीटर का होगा। गोरखपुर में जमीन अधिग्रहण जैसी कोई समस्या नहीं है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मेट्रो में केंद्र और प्रदेश सरकार आर्थिक सहयोग करती है। फि लहाल फं डिंग की कोई समस्या नहीं है। प्रशासन और जीडीए के अधिकारियों से सकारात्मक वार्ता हुई है।
मेट्रो दौड़ाने के लिए तीन घंटे तक तलाशी संभावनाएं
इंजीनियर श्रीधरन ने बुधवार को करीब तीन घंटे तक सभी प्रस्तावित स्टेशनों के स्थान का निरीक्षण कर शहर में मेट्रो दौड़ाने की संभावनाएं तलाशी। देर शाम राइट्स और जीडीए के अधिकारियों के साथ मेट्रो के प्रस्तावित डीपीआर पर चर्चा की। इससे पहले वह बुधवार को दोपहर 12.30 बजे गोरखपुर एयरपोर्ट पहुंचे। पार्क रोड स्थित एक होटल में उन्होंने राइट्स और एलएमआरसी के अधिकारियों के साथ मेट्रो के प्रस्तावित कॉरिडोर पर चर्चा की। करीब 3.30 बजे वह मेट्रो के प्रस्तावित रूट का निरीक्षण करने निकले।
सबसे पहले सूबा बाजार पहुंचे। फिर जंगल सिकरी के पास प्रस्तावित स्टेशन का निरीक्षण किया। करीब 10 मिनट तक प्रस्तावित डीपीआर का ले-आउट देखने के बाद इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी गेट, गिरधरगंज बाजार, कूड़ाघाट, मोहद्दीपुर होते हुए रेलवे स्टेशन के गेट संख्या छह के सामने पहुंच मेट्रो के प्रस्तावित जंक्शन का निरीक्षण किया। मेट्रो के दोनों कॉरिडोर का जंक्शन गेट नंबर छह से लेकर यातायात तिराहे के बीच में प्रस्तावित है। इसके बाद वह गोरखनाथ, बरगदवां होते हुए श्याम नगर पहुंचे। श्याम नगर में स्थलीय निरीक्षण किया। इसके बाद वे बरगदवा, फर्टिलाइजर होते हुए गुलरिहा थाने पहुंचे। गुलरिहा थाना से मेडिकल कॉलेज, असुरन, काली मंदिर होते हुए वापस पार्क रोड स्थित होटल पहुंच गए। निरीक्षण के समय एलएमआरसी के एमडी कुमार केशव, मुख्य आर्किटेक्ट रवि जैन, मुख्य अभियंता रमेश कुमार, जीडीए के सहायक अभियंता एसपी अरविंद आदि मौजूद रहे।
नई मेट्रो नीति के तहत तैयार हो रहा डीपीआर: कुमार केशव
एलएमआरसी के एमडी कुमार केशव ने बताया कि गोरखपुर मेट्रो की डीपीआर शहरी विकास मंत्रालय की ओर से तैयार नई मेट्रो नीति के तहत बनाई जा रही है। डीपीआर का काफी हिस्सा बन गया है। करीब 45 दिन में इसके पूरा होने की उम्मीद है। डीपीआर के साथ ही कम्प्रेहेंसिव मूबिल्टी प्लान (सीएमपी) पर भी काम हो रहा है।
मेट्रो दौड़ाने के लिए सीएमपी को मंजूरी
गोरक्ष नगरी में मेट्रो की तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है। बुधवार को मेट्रोमैन इंजीनियर श्रीधरन के गोरखपुर पहुंचने से पहले जीडीए, राइट्स, एलएमआरसी, वायु सेना, नगर निगम, परिवहन, यातायात, लोनिवि आदि विभागों के अधिकारियों ने मेट्रो के लिए तैयार की जाने वाली कंप्रेहेंसिव मोबिल्टी प्लान (सीएमपी) पर मंथन किया। जीडीए सभागार में करीब दो घंटे तक चली इस बैठक में अधिकारियों की सहमति के बाद इस यातायात योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। अब इसे संबंधित मंत्रालयों को भेजा जाएगा। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद इसे फाइनल किया जाएगा।
मेट्रो के लिए सीएमपी व डीपीआर बनाने की जिम्मेदारी राइट्स को दी गई है। नई मेट्रो नीति के तहत सीएमपी के साथ ही डीपीआर भी तैयार कराई जा रही है। बैठक में जीडीए उपाध्यक्ष अमित सिंह बंसल, चीफ इंजीनियर संजय सिंह, एलएमआरसी के एमडी कुमार केशव, राइट्स के चीफ इंजीनियर रमेश कुमार, चीफ आर्किटेक्ट रवि जैन के अलावा संबंधित विभागों के अफसर मौजूद रहे।
यातायात प्रबंधन के लिए खींचा गया खाका
सीएमपी में गोरखपुर शहर के यातायात प्रबंधन को लेकर खाका खींचा गया है। वर्तमान के साथ ही भविष्य के संभावित यातायात दबाव को ध्यान में रखते हुए इसे तैयार किया गया है। इसके तहत कचहरी व रेलवे बस स्टेशन को शहर के बाहर शिफ्ट करने के साथ ही बेहतर सिटी ट्रांसपोर्ट सुविधा के लिए महानगर के 18 रूटों पर सिटी बस चलाने की योजना है। मालवाहक वाहनों के लिए अलग से फ्रं ट कॉरिडोर बनाने की भी सलाह दी गई है जिससे जाम से बचा जा सके और शहरी यातायात में बड़े वाहनों के चलते मुश्किलें न खड़ी हों। यही नहीं, टीपी नगर को भी पूरी तरह से बाहर शिफ्ट करने की योजना को सीएमपी में शामिल किया गया है ताकि यातायात में सहूलियत हो।