फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   बाढ़-3:राहत बचाव में नाव की कमी आ रही आड़े

राहत बचाव में नाव की कमी आ रही आड़े

Sat, 19 Aug 2017 01:37 AM IST
Updated Sat, 19 Aug 2017 01:37 AM IST
विज्ञापन
बाढ़-3:राहत बचाव में नाव की कमी आ रही आड़े
गोरखपुर में बाढ़। - फोटो : Amar Ujala
गोरखपुर। बाढ़ में फंसे 25 हजार से अधिक परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने और बचाव कार्य में प्रशासन के सामने नाव की कमी चुनौती बनी हुई है। सेना और एनडीआरएफ की टीमों के यहां पहुंच जाने के बाद प्रशासन अब मैन पावर की तो कमी नहीं महसूस कर रहा है मगर जरूरत के मुताबिक नाव की उपलब्धता न होना परेरशानी का सबब बना हुआ है। शुक्रवार को भी जिला प्रशासन नाव के बंदोबस्त में हांफता रहा। पीएसी से और मोटर बोट मंगाने के लिए प्रमुख सचिव गृह और डीजी पीएसी से प्रशासन से गुहार लगाई गई है। बताया गया है कि जिले के कई इलाकों के पानी से घिर जाने की वजह से बाढ़ में फंसे लोगों तक पहुंच पाना कठिन हो रहा है। उन तक राहत सामग्री पहुंचाने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं कई ऐसे जिलों में पीएसी की नाव रिजर्व के तौर पर रखी गई है जहां अभी बाढ़ का कोई खतरा नहीं है। इसपर शासन ने आश्वस्त किया है कि जल्द ही जिले को और नाव मुहैया करा दी जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि शनिवार की आधी रात तक जिला प्रशासन को और नावें मिल जाएं।
विज्ञापन


निजी संबंधों का भी लाभ उठा रहा प्रशासन
इस मुश्किल घड़ी में प्रशासनिक अफसर निजी संबंधों का भी लाभ उठा रहे हैं। डीएम राजीव रौतेला के निर्देश पर एडीएम (फाइनेंस) डॉ चंद्रभूषण ने इलाहाबाद के एडीएम (फाइनेंस) रवि शंकर गुप्ता से नाव की मदद मांगी है। रवि शंकर गुप्ता गोरखपुर में सिटी मजिस्ट्रेट भी रह चुके हैं और यहां की बाढ़ की समस्या से वाकिफ हैं। शायद यही वजह है कि उन्होंने फोन पर दी गई मौखिक सूचना पर ही 50 नाव मुहैया कराने की हामी भर दी। यही नहीं, उन्होंने इसके लिए ट्रकों का प्रबंध करने का भी आश्वासन दिया है। एडीएम ने चौरीचौरा की एसडीएम कीर्तिका ज्योत्सना को नाव लाने के लिए रात को ही तहसील के एक कानूनगो और लेखपाल की टीम इलाहाबाद रवाना कर देने का निर्देश दिया।
विज्ञापन


पानी के वेग ने डिगाए हौसले
राहत बचाव कार्य में लगे तमाम तहसील कर्मियों के हौसले भी पानी का वेग देख हिल जा रहे हैं। जिन्हें तैरने नहीं आता वे लाइफ जैकेट होने के बाद भी नाव पर चढ़कर राहत सामग्री बांटने के लिए प्रभावित गांवों में जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रशासन की नजर में 1998 जैसे हालात नहीं
नदियों का लगातार बढ़ता जलस्तर और हर दिन टूटते बंधों से हर कोई सहम गया है। जो अभी बाढ़ के पानी से नहीं घिरे हैं उन्हें भी यह भय है कि 1998 जैसे हालात न बन जाए। हालांकि प्रशासन अभी ऐसी स्थिति नहीं मान रहा है। उसका कहना है कि अगर स्थिति और खराब हुई तो और सेना बुलाई जाएगी। बंधों पर नजर रखी जा रही है और जहां से भी रिसाव की सूचना मिल रही है उसे दुरुस्त कराया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed