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कर्ज में डूबे मजदूर ने फांसी लगाकर दे दी जान
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कर्ज में डूबे मजदूर ने फंदा लगाकर दी जान
शाम को पड़ोसी से तो रात में पत्नी से किया था झगड़ा
छावनी थाना क्षेत्र के तालागांव की घटना
अमर उजाला ब्यूरो
विक्रमजोत। छावनी थाना क्षेत्र के तालागांव में मंगलवार भोर 30 वर्षीय युवक की फंदे से लटकी लाश मिली। पत्नी की चीख पुकार पर लोग जुटे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने पंचनामा भराकर शव के पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
तालागांव का 30 वर्षीय विजय निषाद पुत्र स्व. रामतेज मजदूरी कर जीविकोपार्जन करता था। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिली रकम से आवास की छत लगवा रहा था। सोमवार शाम को पड़ोसी से किसी बात को लेकर विवाद हुआ तो देर रात नशे में घर पहुंचा। जिसकी हालत देखकर पत्नी से भी तू-तू, मैं-मैं शुरू हो गई। रात में शांत होने पर खाना खाकर निर्माणाधीन मकान में सोने चला गया। मंगलवार भोर में पत्नी रंजना पहुंची तो वहां का दृश्य देखकर चीख पड़ी। विजय की लाश लोहे के जंगले से नारियल की रस्सी से लटकी थी। चीख पुकार सुनकर आसपास के लोग भी जुट गए। पड़ोसियों ने रस्सी काटकर शव को जमीन पर उतारा। किसी की सूचना पर पहुंची छावनी पुलिस ने पूछताछ के बाद शव का पंचनामा कराकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस संबंध में छावनी थानाध्यक्ष यशवंत सिंह ने बताया कि मृतक की पत्नी रंजना ने तहरीर दी है। इसमें कहा है कि घर बनाने के लिए रिश्ते-नातेदारों से काफी कर्ज ले लिया था जिसको चुकाने के लिए विजय काफी परेशान रहता था। नशे की हालत में तनाव के चलते उसने ऐसा कदम उठाया है। एसओ का कहना है कि आत्महत्या करने का मामला प्रतीत होता है।
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उधारी के बोझ ने दी मौत, पांच बच्चे बेसहारा
कर्ज से परेशान ताला गांव के विजय ने लगाई फांसी
पीएम आवास योजना की रकम से बनवा रहा था घर
अमर उजाला ब्यूरो
विक्रमजोत। गरीबी का दंश झेल रहे परिवार को सरकार की कृपा से आवास मिला। जिसे ठीकठाक बनवाने के लिए मजदूर ने नात-रिश्तेदारों से कर्ज भी लिया। छत लग रही थी लेकिन कर्ज के तनाव के चलते उसने मामूली विवाद में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।
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यह घटना छावनी के तालागांव में हुई। विजय निषाद मजदूरी कर करे परिवार का गुजर-बसर कर रहा था। उसके पांच छोटे-छोटे बच्चे हैं। 10 वर्षीय चांदनी, बेटा अंश (8), आयुष (6) साधना (5) तथा 3 वर्षीय बेटी राधना। मां रंजना को चीखते-चिल्लाते देखकर सभी बच्चे भी रोते और सिसकते रहे। बच्चों की हालत देखकर गांव का हर कोई मर्माहत है। मासूमों की परवरिश अब विधवा रंजना को करनी है जो पहले से ही बहुत गरीब है। आठ साल पहले विजय के बडे़ भाई अजय की भी ऐसी ही मौत हुई थी। लोगों का घर बनाने और खेतों में मजदूरी कर जैसे-तैसे खर्चा चलाता था। अति गरीबी देखकर इस वर्ष प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कॉलोनी जगह मिली थी। पत्नी रंजना की मानें तो घर को व्यवस्थित बनवाने के लिए रिश्तेदारों से उधार लेकर जैसे तैसे मकान निर्माण शुरू करा दिया था। पहले भी जिनका कर्ज था, घर बनते देखकर सभी अपना उधार चुकाने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिए। इससे विजय तनाव में रहने लगा। सोमवार की रात उसने इतना बड़ा कदम उठा लिया।
गांव में ही बनती और बिकती है कच्ची शराब
ताला गांव के कुछ लोगों का कहना है कि गांव में ही तालाब किनारे कच्ची शराब की भट्ठियां धधकती हैं। यहां कच्ची शराब बनाकर बेचने का धंधा काफी दिनों से चला आ रहा है। सोमवार की शाम श्यामू से गाली-गलौज और मारपीट हुई थी। इससे सदमे में आया विजय रात को नशे की हालत में घर लौटा और परिवार में भी झगड़ा कर बन रहे मकान में सोने चला गया। सुबह उसकी लाश जंगले में बंधी नारियल की रस्सी से लटकी मिली। श्यामू के साथ ही उसके परिजन घर छोड़कर भाग निकले हैं।
पुलिस को पता है पर कार्रवाई नहीं: ग्राम प्रधान
कच्ची शराब बनाए जाने के संबंध में ग्रामप्रधान अजित प्रताप सिंह ने बताया कि तालागांव और हंसराजपुर के बीच एक तालाब के किनारे शराब की भट्ठी धधकती है। कुछ लोग शराब बनाते और बेचने का काम करते हैं। जिससे गांव के अलावा आसपास के तमाम युवक बुरी लत में फंस गए हैं। इसकी जानकारी पुलिस वालों को है। धंधेबाजों से साठगांठ रहने के चलते कोई प्रभावी कार्रवाई आज तक नहीं हो सकी है।
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कर्ज में डूबे मजदूर ने फंदा लगाकर दी जान
शाम को पड़ोसी से तो रात में पत्नी से किया था झगड़ा
छावनी थाना क्षेत्र के तालागांव की घटना
अमर उजाला ब्यूरो
विक्रमजोत। छावनी थाना क्षेत्र के तालागांव में मंगलवार भोर 30 वर्षीय युवक की फंदे से लटकी लाश मिली। पत्नी की चीख पुकार पर लोग जुटे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने पंचनामा भराकर शव के पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
तालागांव का 30 वर्षीय विजय निषाद पुत्र स्व. रामतेज मजदूरी कर जीविकोपार्जन करता था। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिली रकम से आवास की छत लगवा रहा था। सोमवार शाम को पड़ोसी से किसी बात को लेकर विवाद हुआ तो देर रात नशे में घर पहुंचा। जिसकी हालत देखकर पत्नी से भी तू-तू, मैं-मैं शुरू हो गई। रात में शांत होने पर खाना खाकर निर्माणाधीन मकान में सोने चला गया। मंगलवार भोर में पत्नी रंजना पहुंची तो वहां का दृश्य देखकर चीख पड़ी। विजय की लाश लोहे के जंगले से नारियल की रस्सी से लटकी थी। चीख पुकार सुनकर आसपास के लोग भी जुट गए। पड़ोसियों ने रस्सी काटकर शव को जमीन पर उतारा। किसी की सूचना पर पहुंची छावनी पुलिस ने पूछताछ के बाद शव का पंचनामा कराकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस संबंध में छावनी थानाध्यक्ष यशवंत सिंह ने बताया कि मृतक की पत्नी रंजना ने तहरीर दी है। इसमें कहा है कि घर बनाने के लिए रिश्ते-नातेदारों से काफी कर्ज ले लिया था जिसको चुकाने के लिए विजय काफी परेशान रहता था। नशे की हालत में तनाव के चलते उसने ऐसा कदम उठाया है। एसओ का कहना है कि आत्महत्या करने का मामला प्रतीत होता है।
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उधारी के बोझ ने दी मौत, पांच बच्चे बेसहारा
कर्ज से परेशान ताला गांव के विजय ने लगाई फांसी
पीएम आवास योजना की रकम से बनवा रहा था घर
अमर उजाला ब्यूरो
विक्रमजोत। गरीबी का दंश झेल रहे परिवार को सरकार की कृपा से आवास मिला। जिसे ठीकठाक बनवाने के लिए मजदूर ने नात-रिश्तेदारों से कर्ज भी लिया। छत लग रही थी लेकिन कर्ज के तनाव के चलते उसने मामूली विवाद में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।
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यह घटना छावनी के तालागांव में हुई। विजय निषाद मजदूरी कर करे परिवार का गुजर-बसर कर रहा था। उसके पांच छोटे-छोटे बच्चे हैं। 10 वर्षीय चांदनी, बेटा अंश (8), आयुष (6) साधना (5) तथा 3 वर्षीय बेटी राधना। मां रंजना को चीखते-चिल्लाते देखकर सभी बच्चे भी रोते और सिसकते रहे। बच्चों की हालत देखकर गांव का हर कोई मर्माहत है। मासूमों की परवरिश अब विधवा रंजना को करनी है जो पहले से ही बहुत गरीब है। आठ साल पहले विजय के बडे़ भाई अजय की भी ऐसी ही मौत हुई थी। लोगों का घर बनाने और खेतों में मजदूरी कर जैसे-तैसे खर्चा चलाता था। अति गरीबी देखकर इस वर्ष प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कॉलोनी जगह मिली थी। पत्नी रंजना की मानें तो घर को व्यवस्थित बनवाने के लिए रिश्तेदारों से उधार लेकर जैसे तैसे मकान निर्माण शुरू करा दिया था। पहले भी जिनका कर्ज था, घर बनते देखकर सभी अपना उधार चुकाने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिए। इससे विजय तनाव में रहने लगा। सोमवार की रात उसने इतना बड़ा कदम उठा लिया।
गांव में ही बनती और बिकती है कच्ची शराब
ताला गांव के कुछ लोगों का कहना है कि गांव में ही तालाब किनारे कच्ची शराब की भट्ठियां धधकती हैं। यहां कच्ची शराब बनाकर बेचने का धंधा काफी दिनों से चला आ रहा है। सोमवार की शाम श्यामू से गाली-गलौज और मारपीट हुई थी। इससे सदमे में आया विजय रात को नशे की हालत में घर लौटा और परिवार में भी झगड़ा कर बन रहे मकान में सोने चला गया। सुबह उसकी लाश जंगले में बंधी नारियल की रस्सी से लटकी मिली। श्यामू के साथ ही उसके परिजन घर छोड़कर भाग निकले हैं।
पुलिस को पता है पर कार्रवाई नहीं: ग्राम प्रधान
कच्ची शराब बनाए जाने के संबंध में ग्रामप्रधान अजित प्रताप सिंह ने बताया कि तालागांव और हंसराजपुर के बीच एक तालाब के किनारे शराब की भट्ठी धधकती है। कुछ लोग शराब बनाते और बेचने का काम करते हैं। जिससे गांव के अलावा आसपास के तमाम युवक बुरी लत में फंस गए हैं। इसकी जानकारी पुलिस वालों को है। धंधेबाजों से साठगांठ रहने के चलते कोई प्रभावी कार्रवाई आज तक नहीं हो सकी है।