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मातम की 12 रातों के बाद ‘मंगल’ सुबह
Wed, 27 Feb 2019 12:47 AM IST
ajay Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Published by: ajay Kumar
Updated Wed, 27 Feb 2019 12:47 AM IST
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- फोटो : PTI
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आशुतोष मिश्र
गोरखपुर। हाथ में चाय का कप और आंखों में नींद की खुमारी थी। टीवी खोला तो वायुसेना की शौर्यगाथा देख जोश जाग उठा। चाय का प्याला छलक उठा और हलक से वाह की आवाज निकल गई। बरगदवां के राहुल मिश्र ही नहीं औरों के साथ भी ऐसा ही हुआ। प्रेम दिवस पर पुलवामा में नफरत भरी कायराना करतूत और गुजरी 12 मातमी रातों के बाद जब बदले की खबर लेकर ‘मंगल’ सुबह आई तो हर चेहरा खुशी से खिल उठा। आतंकी घटना के बाद से गुस्से में खीझ रहे युवा जोश से भर गए।
परिवार का जो सदस्य टीवी सेट के पास नहीं था, उन तक भी यह खुशखबरी पहुंचने में देर न हुई। पादरी बाजार के कमलेश को वायु सेना की शौर्य गाथा बिस्तर पर ही छोटे भाई आलोक ने आकर बताई। वह तुरंत बिस्तर से उठकर पूरी खबर जानने में जुट गए। आतंकियों पर बरसे 1000 किलोग्राम बम उनकी आवाज को दम दे गया। वह बोले, बहुत शानदार हुआ लेकिन अभी और दुश्मन मारे जाएंगे। कमलेश की तरह ही इस खबर ने जन सामान्य की मुराद पूरी कर दी। पुलवामा घटना के बाद हर ओर से दुआएं हुई थीं कि सेना जल्द बदला ले, पर इस बदले में अपना कोई जवान शहीद न हो। ‘मंगल’ सुबह इसी तरह का मंगलदायक समाचार लिए आई तो हर काई जोश में भरकर वायु सेना के जज्बे को सलाम करता नजर आया। टीवी के आगे अब पूरा परिवार जुट चुका था।
न्यूज एंकर की आवाज के बीच बच्चे हों या बड़े खुद को बोलने से रोक नहीं पा रहे थे। कोई कह रहा था कि मोदी जी ने बदला ले लिया तो किसी ने आगे और कड़े कदम उठाए जाने की उम्मीद जताई। समाचार के साथ अपनी कमेंट्री पेश कर रहे लोग तब एकदम खामोश हो जा रहे थे जब एयर स्ट्राइक से जुड़ा कोई अहम बयान दिखाया जाने लग रहा था। लोग जरूरी काम होने पर न चाहते हुए भी टीवी छोड़कर घर से निकले। लेकिन जहां टीवी चलता दिखा, रुककर न्यूज देखने लगे। टीवी से हटे तो पराक्रमी वीरों को नमन करते हुए अपनी तरह से खुशी का इजहार किया। किसी ने मिठाई से तो कोई आतिशबाजी करके खुशी जताता नजर आया।
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कहते हैं तो करते भी हैं
बृजनंदन सिंह, विशाल मिश्र, संतोष त्रिपाठी आदि युवाओं का कहना था कि 12 दिन से इसी खबर का इंतजार था। जब भी टीवी खोलते थे तब पुलवामा के बदले की खबर दिखने की उम्मीद होती थी, लेकिन इस बारे में कुछ न दिखाई देने पर निराशा होती थी। सप्ताह गुजरने के बाद लगने लगा था कि अब शायद सरकार शहादत को भुला देगी। इस खबर ने बता दिया कि मोदी जी जो कहते हैं वह करते हैं।
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गोरखपुर। हाथ में चाय का कप और आंखों में नींद की खुमारी थी। टीवी खोला तो वायुसेना की शौर्यगाथा देख जोश जाग उठा। चाय का प्याला छलक उठा और हलक से वाह की आवाज निकल गई। बरगदवां के राहुल मिश्र ही नहीं औरों के साथ भी ऐसा ही हुआ। प्रेम दिवस पर पुलवामा में नफरत भरी कायराना करतूत और गुजरी 12 मातमी रातों के बाद जब बदले की खबर लेकर ‘मंगल’ सुबह आई तो हर चेहरा खुशी से खिल उठा। आतंकी घटना के बाद से गुस्से में खीझ रहे युवा जोश से भर गए।
परिवार का जो सदस्य टीवी सेट के पास नहीं था, उन तक भी यह खुशखबरी पहुंचने में देर न हुई। पादरी बाजार के कमलेश को वायु सेना की शौर्य गाथा बिस्तर पर ही छोटे भाई आलोक ने आकर बताई। वह तुरंत बिस्तर से उठकर पूरी खबर जानने में जुट गए। आतंकियों पर बरसे 1000 किलोग्राम बम उनकी आवाज को दम दे गया। वह बोले, बहुत शानदार हुआ लेकिन अभी और दुश्मन मारे जाएंगे। कमलेश की तरह ही इस खबर ने जन सामान्य की मुराद पूरी कर दी। पुलवामा घटना के बाद हर ओर से दुआएं हुई थीं कि सेना जल्द बदला ले, पर इस बदले में अपना कोई जवान शहीद न हो। ‘मंगल’ सुबह इसी तरह का मंगलदायक समाचार लिए आई तो हर काई जोश में भरकर वायु सेना के जज्बे को सलाम करता नजर आया। टीवी के आगे अब पूरा परिवार जुट चुका था।
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न्यूज एंकर की आवाज के बीच बच्चे हों या बड़े खुद को बोलने से रोक नहीं पा रहे थे। कोई कह रहा था कि मोदी जी ने बदला ले लिया तो किसी ने आगे और कड़े कदम उठाए जाने की उम्मीद जताई। समाचार के साथ अपनी कमेंट्री पेश कर रहे लोग तब एकदम खामोश हो जा रहे थे जब एयर स्ट्राइक से जुड़ा कोई अहम बयान दिखाया जाने लग रहा था। लोग जरूरी काम होने पर न चाहते हुए भी टीवी छोड़कर घर से निकले। लेकिन जहां टीवी चलता दिखा, रुककर न्यूज देखने लगे। टीवी से हटे तो पराक्रमी वीरों को नमन करते हुए अपनी तरह से खुशी का इजहार किया। किसी ने मिठाई से तो कोई आतिशबाजी करके खुशी जताता नजर आया।
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बृजनंदन सिंह, विशाल मिश्र, संतोष त्रिपाठी आदि युवाओं का कहना था कि 12 दिन से इसी खबर का इंतजार था। जब भी टीवी खोलते थे तब पुलवामा के बदले की खबर दिखने की उम्मीद होती थी, लेकिन इस बारे में कुछ न दिखाई देने पर निराशा होती थी। सप्ताह गुजरने के बाद लगने लगा था कि अब शायद सरकार शहादत को भुला देगी। इस खबर ने बता दिया कि मोदी जी जो कहते हैं वह करते हैं।