{"_id":"575317d84f1c1b903c108c59","slug":"worship-the-women-of-the-banyan-tree","type":"story","status":"publish","title_hn":"महिलाओं ने की वट वृक्ष की पूजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महिलाओं ने की वट वृक्ष की पूजा
अमर उजाला/बलरामपुर
Updated Sat, 04 Jun 2016 11:33 PM IST
विज्ञापन
पूजा करतीं महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अखंड सुहाग के लिए सुहागिन महिलाओं ने शनिवार को वट सावित्री व्रत रखा। भगवान ब्रह्मा, सावित्री और सत्यवान के साथ वट वृक्ष की पूजा-अर्चना कर महिलाओं ने पति के लंबी आयु की कामना की। नगर में कई स्थानों पर वट वृक्ष की पूजा के लिए महिलाओं की भारी भीड़ जुटी।
सनातन धर्म में वट सावित्री व्रत को करवाचौथ के समान ही माना गया है। ऐसी मान्यता है कि सती सावित्री ने पति सत्यवान की मृत्यु होने पर यह व्रत रखकर यमराज से सत्यवान के प्राण बचाए थे। वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह कृष्ण पक्ष की अमावस्या को रखा जाता है।
महिलाओं ने वट सावित्री व्रत के दिन भोर पहर में ही घर को गंगाजल से पवित्र कर भगवान ब्रह्मा के साथ सती सावित्री की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। नगर के झारखंडी मंदिर, सिटी पैलेस स्थित कालीमाता मंदिर और धुसाह स्थित सम्मय माता मंदिर में वट वृक्ष के जड़ में जल अर्पित करते हुए रोली, सूत व धूप आदि से पूजन किया।
विज्ञापन
सूत के धागे को वट वृक्ष में लपेटकर तीन बार परिक्रमा करते हुए सती सावित्री एवं सत्यवान की कथा सुनी। पूजा समाप्त होने के बाद वस्त्र व फल आदि का दान कर महिलाओं ने पति की लंबी आयु का आशीर्वाद मांगा। इस दौरान महिलाओं ने चने का प्रसाद भी वितरित किया।
विज्ञापन
सनातन धर्म में वट सावित्री व्रत को करवाचौथ के समान ही माना गया है। ऐसी मान्यता है कि सती सावित्री ने पति सत्यवान की मृत्यु होने पर यह व्रत रखकर यमराज से सत्यवान के प्राण बचाए थे। वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह कृष्ण पक्ष की अमावस्या को रखा जाता है।
विज्ञापन
महिलाओं ने वट सावित्री व्रत के दिन भोर पहर में ही घर को गंगाजल से पवित्र कर भगवान ब्रह्मा के साथ सती सावित्री की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। नगर के झारखंडी मंदिर, सिटी पैलेस स्थित कालीमाता मंदिर और धुसाह स्थित सम्मय माता मंदिर में वट वृक्ष के जड़ में जल अर्पित करते हुए रोली, सूत व धूप आदि से पूजन किया।
विज्ञापन
सूत के धागे को वट वृक्ष में लपेटकर तीन बार परिक्रमा करते हुए सती सावित्री एवं सत्यवान की कथा सुनी। पूजा समाप्त होने के बाद वस्त्र व फल आदि का दान कर महिलाओं ने पति की लंबी आयु का आशीर्वाद मांगा। इस दौरान महिलाओं ने चने का प्रसाद भी वितरित किया।