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वापस मिलेंगे सामूहिक बीमा योजना के चार करोड़
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गोंडा। आठ साल से परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों के वेतन से सामूहिक बीमा के नाम पर की गई कटौती अब वापस मिलने की उम्मीद जगी है। साल 2014 में सामूहिक बीमा योजना बंद होने के बाद भी शिक्षकों के वेतन से हर महीने 87 रुपये कटौती होती रही। बीते दिनों ये मामला उठने पर दो सितंबर को कटौती रोकने का आदेश जारी हुआ।
सोमवार को वित्त नियंत्रक ने आठ साल में की गई कटौती की रकम का ब्यौरा मांगा है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से रिपोर्ट देने के बाद रकम वापसी की कार्रवाई होगी। जिले के करीब पांच हजार शिक्षकों से आठ साल में करीब चार करोड़ रुपये वेतन से कटौती की गई है।
सामूहिक बीमा योजना साल 2014 के पहले चल रही थी। जिसमें शिक्षकों के साथ कर्मचारियों के वेतन से अंशदान की कटौती होती थी। इसके लिए 87 रुपये रकम तय थी। मगर बीमा निगम ने साल 2014 में ही शिक्षकों व कर्मियों के लिए सामूहिक बीमा योजना बंद कर दी। इसके बाद भी शिक्षकों व कर्मियों के वेतन से अंशदान की कटौती बंद नहीं हुई।
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ऐसे में जिले के शिक्षकों के वेतन से अब तक सामूहिक बीमा योजना के अंशदान के करीब चार करोड़ रुपये की कटौती हो चुकी है। मगर विभाग अब इस रकम के बारे में कोई जानकारी नहीं दे पा रहा है। विभाग ये भी नहीं बता पा रहा कि कटौती की धनराशि कहां जमा की गई। वित्त नियंत्रक ने साल 2014 से अब तक की गई कटौती का पूरा ब्यौरा मांगा है। साथ ही ये भी रिपोर्ट मांगी है कि कितने शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन से कटौती की गई है। विभाग इसकी रिपोर्ट बनाने में जुटा है।
शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष विनय तिवारी का कहना है कि शिक्षकों के वेतन से की गई कटौती वापस होनी चाहिए। नियमों के तहत की गई कटौती पर बैंक का ब्याज भी दिया जाना चाहिए। रिपोर्ट तैयार करने में विभाग को पारदर्शिता बरतनी होगी, इसके लिए संगठनों को भी सूची उपलब्ध कराई जाए। वित्त नियंत्रक का ये कदम सराहनीय है।
सहायक शिक्षा निदेशक, बेसिक शिक्षा विनय मोहन वन का कहना है कि शिक्षकों की सामूहिक बीमा योजना के तहत अंशदान की कटौती बंद करने का आदेश अगस्त माह में ही आ गया था। अब वित्त नियंत्रक ने कटौती का ब्यौरा मांगा है। रिपोर्ट के आधार पर अग्रिम कार्रवाई होगी।
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सोमवार को वित्त नियंत्रक ने आठ साल में की गई कटौती की रकम का ब्यौरा मांगा है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से रिपोर्ट देने के बाद रकम वापसी की कार्रवाई होगी। जिले के करीब पांच हजार शिक्षकों से आठ साल में करीब चार करोड़ रुपये वेतन से कटौती की गई है।
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सामूहिक बीमा योजना साल 2014 के पहले चल रही थी। जिसमें शिक्षकों के साथ कर्मचारियों के वेतन से अंशदान की कटौती होती थी। इसके लिए 87 रुपये रकम तय थी। मगर बीमा निगम ने साल 2014 में ही शिक्षकों व कर्मियों के लिए सामूहिक बीमा योजना बंद कर दी। इसके बाद भी शिक्षकों व कर्मियों के वेतन से अंशदान की कटौती बंद नहीं हुई।
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ऐसे में जिले के शिक्षकों के वेतन से अब तक सामूहिक बीमा योजना के अंशदान के करीब चार करोड़ रुपये की कटौती हो चुकी है। मगर विभाग अब इस रकम के बारे में कोई जानकारी नहीं दे पा रहा है। विभाग ये भी नहीं बता पा रहा कि कटौती की धनराशि कहां जमा की गई। वित्त नियंत्रक ने साल 2014 से अब तक की गई कटौती का पूरा ब्यौरा मांगा है। साथ ही ये भी रिपोर्ट मांगी है कि कितने शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन से कटौती की गई है। विभाग इसकी रिपोर्ट बनाने में जुटा है।
शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष विनय तिवारी का कहना है कि शिक्षकों के वेतन से की गई कटौती वापस होनी चाहिए। नियमों के तहत की गई कटौती पर बैंक का ब्याज भी दिया जाना चाहिए। रिपोर्ट तैयार करने में विभाग को पारदर्शिता बरतनी होगी, इसके लिए संगठनों को भी सूची उपलब्ध कराई जाए। वित्त नियंत्रक का ये कदम सराहनीय है।
सहायक शिक्षा निदेशक, बेसिक शिक्षा विनय मोहन वन का कहना है कि शिक्षकों की सामूहिक बीमा योजना के तहत अंशदान की कटौती बंद करने का आदेश अगस्त माह में ही आ गया था। अब वित्त नियंत्रक ने कटौती का ब्यौरा मांगा है। रिपोर्ट के आधार पर अग्रिम कार्रवाई होगी।