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Gonda News: समस्याओं के दशानन से गोंडा को कब मिलेगी मुक्ति...

Mon, 19 Oct 2026 11:17 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Mon, 19 Oct 2026 11:17 PM IST
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When will Gonda be liberated from its ten-headed demon of problems...
अंबेडकर चौराहे पर बना सेल्फी पाॅइंट व शहर में लगा जाम। -संवाद
गोंडा। विजयदशमी पर रावण के पुतले का दहन होगा लेकिन आम लोगों की जिंदगी मुश्किल बनाने वाली समस्याओं का अंत कब होगा? शहर में जाम, मोहल्लों में बदहाल सड़कें, अस्पतालों में सुविधाओं की कमी और युवाओं के सामने रोजगार की चुनौती लोगों को परेशान कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। पेश है समस्याओं के दशानन पर नंदलाल तिवारी की रिपोर्ट :
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1. अतिक्रमण से सिकुड़ रहीं सड़कें
शहर के प्रमुख बाजारों में पटरियों पर दुकानें सजने और सड़क किनारे वाहन खड़े होने से आवागमन बाधित होता है। अतिक्रमण हटाकर रास्ते खाली रखना चुनौती बना हुआ है। व्यापारी नेता आदित्य पाल का कहना है कि अतिक्रमण की समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है।
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2. जाम में फंसती जिंदगी
अस्पतालों, स्कूलों और बाजारों के आसपास जाम से लोगों को परेशानी होती है। पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने से समस्या और गंभीर हो जाती है। अधिवक्ता रामबाबू का कहना है कि जाम से निजात दिलाने के लिए प्रशासन को प्रयास करना चाहिए।
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3. बदहाल सड़कों से परेशानी
कई मोहल्लों में जर्जर सड़कों के कारण लोगों को आवागमन में दिक्कत होती है। सड़कों की मरम्मत के साथ निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निगरानी भी जरूरी है। सेवानिवृत्त कर्मचारी केबी सिंह का कहना है कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर नजर रखी जानी चाहिए।

4. अस्पतालों में सुविधाओं की कमी
ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर पेयजल, बिजली और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है। नियमित निरीक्षण कर कमियों को दूर करना भी चुनौती है। इंकलाब फाउंडेशन के अविनाश सिंह का कहना है कि दवाओं के साथ अन्य संसाधनों की भी व्यवस्था की जानी चाहिए।

5. इलाज के लिए भटकते मरीज
स्वास्थ्य केंद्रों पर जरूरी सुविधाएं और संसाधन नहीं मिलने से मरीजों को दूसरे केंद्रों का रुख करना पड़ता है। इससे उनका समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं। सेवानिवृत्त स्वास्थ्यकर्मी अनिल श्रीवास्तव का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्रों में खाली पदों को भरना जरूरी है।

6. बाढ़ में बाधित होती पढ़ाई
सरयू नदी की बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में जलभराव के कारण विद्यार्थियों को विद्यालय पहुंचने में परेशानी होती है। ऐसे इलाकों में वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था जरूरी है। शिक्षक अखंड सिंह का कहना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रखने के लिए जरूरी प्रबंध किए जाने चाहिए।

7. गांवों में आवागमन की चुनौती
बारिश और जलभराव के दौरान कई ग्रामीण रास्तों पर चलना मुश्किल हो जाता है। इससे लोगों को आवागमन में परेशानी होती है। भुनेश्वर दत्त का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस समस्या के समाधान के लिए सुरक्षित रास्तों और जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था जरूरी है।

8. रोजगार के सीमित अवसर
स्थानीय स्तर पर उद्योगों की स्थापना और रोजगार के अवसर बढ़ाना युवाओं के सामने बड़ी चुनौती है। कौशल प्रशिक्षण और निवेश से रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं। युवा सोच के अनिल सिंह का कहना है कि रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए औद्योगिक इकाइयों की स्थापना आवश्यक है।

9. शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल
विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों की उपलब्धता और पढ़ाई की गुणवत्ता पर ध्यान देने की जरूरत है। बच्चों को बेहतर शैक्षिक माहौल उपलब्ध कराना जरूरी है। अभिभावक विशाल श्रीवास्तव का कहना है कि स्कूलों की व्यवस्था में सुधार पर ध्यान दिया जाना चाहिए।


10. शिकायतों के निस्तारण में जवाबदेही
सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और सफाई से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण की समयसीमा तय होनी चाहिए। कार्रवाई के बाद यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि समस्या दोबारा न उभरे। शिक्षक जितेंद्र कुमार का कहना है कि समस्याओं का समाधान संबंधित विभागों की गंभीरता और नियमित निगरानी पर निर्भर करता है।

अंबेडकर चौराहे पर बना सेल्फी पाॅइंट व शहर में लगा जाम। -संवाद

अंबेडकर चौराहे पर बना सेल्फी पाॅइंट व शहर में लगा जाम। -संवाद

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